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पोषण वाली दाल, दे सकती है लकवा

Wed, 13 Feb 2019 10:31 PM IST
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Updated Wed, 13 Feb 2019 10:31 PM IST
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पोषण वाली दाल, दे सकती है लकवा
दाल - फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी। दालों को सेहत का खजाना माना जाता है। जिले में बिक रही प्रतिबंधित खेसारी युक्त मिलावटी दाल आपकी सेहत को खराब कर सकती है। इससे लकवा भी हो सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में चने की दाल में खेसारी की दाल की मिलावट मिली है। टीम ने दाल की बिक्री करने वाले दुकानदार पर मुकदमा दर्ज कराया है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कुछ दिन पहले लेनगंज मंडी स्थित राजीव राठौर की दुकान से चने की दाल का एक नमूना लिया था। जांच के लिए इस नमूने को राज्य प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि चने की दाल में खेसारी की दाल मिलाई गई थी। ये दाल व्यक्ति को अपंग बना सकती है। इसी कारण सरकार द्वारा इस दाल की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है। आज तक लिए गए दालों के नमूनों में कभी भी खेसारी की दाल नहीं मिली।
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ऐसा पहली बार हुआ है कि चने की दाल में खेसारी की दाल मिली पाई गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग की टीम ने विक्रेता पर सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। इसके साथ ही पूरे जिले में दालों के नमूने लेने के लिए अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है।
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अरहर की दाल का नमूना भी फेल
केवल चने की दाल का ही नहीं बल्कि अरहर की दाल का भी एक नमूना जांच में फेल हुआ है। लेनगंज मंडी स्थित देवेंद्र कुमार की दुकान से लिए गए अरहर की दाल के नमूने में पीला रंग पाया गया। रंग मानव शरीर में पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। रंग मिलने से अरहर का नमूना भी जांच में फेल हो गया है। देवेंद्र गुप्ता पर भी विभाग की ओर से मिलावट का मुकदमा कायम किया गया है।

ये होती है खेसारी की दाल
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रामसुंदर प्रसाद ने बताया कि खेसारी की दाल एक धीमा जहर है। इसके खाने से व्यक्ति न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर से पीड़ित हो जाते हैं। इस दाल में वीटा एन ऑक्सिल डाई अमिनो प्रोपियोनिक एसिड पाया जाता है। इससे मानव शरीर में निचले हिस्से में अपंगता या लकवा होने के साथ ही कान की श्रवण क्षमता भी खत्म हो जाती है। इस दाल को 1961 में केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था।

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तीन साल जेल का है प्रावधान
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलावट करने वालों को लिए जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है। अगर जांच में नमूना मानव शरीर के लिए नुकसानदेह पाया जाता है तो इसके लिए विक्रेता पर पांच लाख का जुर्माना व तीन साल तक की सजा हो सकती है। इसके लिए सीजेएम कोर्ट में सुनवाई की जाती है।
 
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