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विकास भवन में रिश्वत लेने का ऑडियो वायरल
Updated Sat, 07 Apr 2018 11:34 PM IST
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मैनपुरी। एक ऑडियो के वायरल होने के बाद से विकास भवन में हलचल पैदा हो गई है। ऑडियो में जिला पंचायत राज विभाग के द्वारा ब्लाक पर लगाई जा रही गाड़ियों को लेकर बात की जा रही है। ऑडियो में विकास भवन के कर्मचारी और गाड़ी मालिक के बीच बातचीत हो रही है। इसमें दो बड़े अधिकारियों के पास भी रिश्वत पहुंचने की बात कही जा रही है।
जिला पंचायत राज अधिकारी विभाग द्वारा प्रत्येक ब्लाक पर स्वच्छ शौचालय के निरीक्षण के लिए प्राइवेट गाड़ियां लगाई जा रही हैं। गाड़ियों के माध्यम से ही बीडीओ गांव-गांव जाकर शौचालयों का निरीक्षण करेंगे। ऑडियों में साफ तौर पर सुनाई दे रहा है कि एक गाड़ी मालिक को रिश्वत नहीं देने पर गाड़ी हटाने की धमकी दी जा रही है। वहीं विकास भवन के दो बड़े अधिकारियों को पांच हजार रुपये के हिसाब से 10 गाड़ियों का 50 हजार रुपये रिश्वत पहुंचने की भी बात कही जा रही है।
गाड़ी मालिका का कहना है कि उन्होंने गाड़ी लगवाने के नाम पर छह हजार रुपये पहले ही दे दिए हैं। इसके बाद उसकी गाड़ी को करहल ब्लाक में लगा दिया गया। तीन दिन तक गाड़ी क्षेत्र में भी घूमने के लिए गई, लेकिन तीन दिन बाद पांच हजार रुपये की और मांग की जाने लगी। गाड़ी मालिक का कहना है कि गाड़ी लगाने के बाद उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया गया था, लेकिन रिश्वत नहीं दिए जाने के बाद अधिकारी प्रमाण पत्र को भी नहीं मान रहे हैं और उसकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। सीडीओ से बात करने पर उन्होंने कोई भी मदद नहीं किए जाने की बात कही। ऑडियो वायरल होने के बाद से अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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जिला पंचायत राज अधिकारी विभाग द्वारा प्रत्येक ब्लाक पर स्वच्छ शौचालय के निरीक्षण के लिए प्राइवेट गाड़ियां लगाई जा रही हैं। गाड़ियों के माध्यम से ही बीडीओ गांव-गांव जाकर शौचालयों का निरीक्षण करेंगे। ऑडियों में साफ तौर पर सुनाई दे रहा है कि एक गाड़ी मालिक को रिश्वत नहीं देने पर गाड़ी हटाने की धमकी दी जा रही है। वहीं विकास भवन के दो बड़े अधिकारियों को पांच हजार रुपये के हिसाब से 10 गाड़ियों का 50 हजार रुपये रिश्वत पहुंचने की भी बात कही जा रही है।
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गाड़ी मालिका का कहना है कि उन्होंने गाड़ी लगवाने के नाम पर छह हजार रुपये पहले ही दे दिए हैं। इसके बाद उसकी गाड़ी को करहल ब्लाक में लगा दिया गया। तीन दिन तक गाड़ी क्षेत्र में भी घूमने के लिए गई, लेकिन तीन दिन बाद पांच हजार रुपये की और मांग की जाने लगी। गाड़ी मालिक का कहना है कि गाड़ी लगाने के बाद उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया गया था, लेकिन रिश्वत नहीं दिए जाने के बाद अधिकारी प्रमाण पत्र को भी नहीं मान रहे हैं और उसकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। सीडीओ से बात करने पर उन्होंने कोई भी मदद नहीं किए जाने की बात कही। ऑडियो वायरल होने के बाद से अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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