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मुन्ना बजरंगी के बाद साथी की सुरक्षा बढ़ाई
Updated Mon, 09 Jul 2018 10:49 PM IST
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मैनपुरी। यूपी के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह भाजपा नेता कृष्णानंद राय की हत्या का मुख्य आरोपी था। वहीं जिला कारागार में हत्याकांड में उसके साथी जीवा की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। जेल में बैरकों की सघनता के साथ चेकिंग की गई। जेल अधीक्षक ने बताया कि जीवा को अलग बैरक में रखा जाता है। उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।
मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में लाए जाने के समय गोली मारकर हत्या के बाद शासन प्रशासन में हड़कंप मच गया। शासन स्तर पर कार्रवाई के साथ ही आसपास के जिलो में एलर्ट जारी कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो मुन्ना बजरंगी की हत्या में कुख्यात बदमाश सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। माना जा रहा है सुनील के इशारे पर ही गुर्गों ने मुन्ना की हत्या की है। सुनील को हाल ही में बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। उधर एलर्ट जारी होने के साथ ही जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी के साथ भाजपा नेता कृष्णानंद हत्याकांड में साथी रहे संजीव उर्फ जीवा की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन चौकन्ना हो गया।
जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि जीवा को हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक अलग बैरक में रखा जाता है। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच पेशी पर ले जाया जाता है। उसकी सुरक्षा के इंतजामात हैं, फिर भी जेल की सभी बैरकों व परिसर की सघनता के साथ तलाशी ली गई। जेल प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। भाजपा नेता कृष्णानंद राय हाई प्रोफाइल हत्याकांड में मुख्तार अंसारी के इशारे पर मुन्ना बजरंगी, संजीव उर्फ जीवा व अन्य साथियों ने मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था। इस हत्याकांड के साथ ही जीवा और मुन्ना के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी। सूत्रों की मानें तो लूट, हत्या और रंगदारी वसूलने की कई घटनाएं दोनों ने साथ-साथ अंजाम दीं। मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। जो कि शायद उसे बेहद नजदीक से जानने वाले ही जानते हैं। बाकी उसे माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के नाम से ही जानते थे।
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देश भर की पुलिस के लिए सिरदर्द बने मुन्ना बजरंगी की अंडरवर्ल्ड में मजबूत पकड़ थी। सूत्रों के मुताबिक मुन्ना बजरंगी का गुजरात के ड्रग माफिया अनिरुद्ध जडेजा से संपर्क हुआ। इसके बाद विदेशी असलहों के साथ दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, कर्नाटक, मंगलौर, इंदौर, भोपाल जैसे इलाकों को उसने अपनी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बना लिया था। ठेके पर हत्या करना उसका सबसे बड़ा कारोबार बन गया। वहीं मुन्ना बजरंगी को पुर्तगाल में गिरफ्तार होकर आए डी कंपनी अबू सलेम की हत्या की सुपारी भी मिली थी। यह सुपारी पूर्वांचल के शूटरों से अपना काम कराने वाले दाउद इब्राहिम ने दी थी।
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मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में लाए जाने के समय गोली मारकर हत्या के बाद शासन प्रशासन में हड़कंप मच गया। शासन स्तर पर कार्रवाई के साथ ही आसपास के जिलो में एलर्ट जारी कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो मुन्ना बजरंगी की हत्या में कुख्यात बदमाश सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। माना जा रहा है सुनील के इशारे पर ही गुर्गों ने मुन्ना की हत्या की है। सुनील को हाल ही में बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। उधर एलर्ट जारी होने के साथ ही जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी के साथ भाजपा नेता कृष्णानंद हत्याकांड में साथी रहे संजीव उर्फ जीवा की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन चौकन्ना हो गया।
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जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि जीवा को हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक अलग बैरक में रखा जाता है। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच पेशी पर ले जाया जाता है। उसकी सुरक्षा के इंतजामात हैं, फिर भी जेल की सभी बैरकों व परिसर की सघनता के साथ तलाशी ली गई। जेल प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। भाजपा नेता कृष्णानंद राय हाई प्रोफाइल हत्याकांड में मुख्तार अंसारी के इशारे पर मुन्ना बजरंगी, संजीव उर्फ जीवा व अन्य साथियों ने मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था। इस हत्याकांड के साथ ही जीवा और मुन्ना के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी। सूत्रों की मानें तो लूट, हत्या और रंगदारी वसूलने की कई घटनाएं दोनों ने साथ-साथ अंजाम दीं। मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। जो कि शायद उसे बेहद नजदीक से जानने वाले ही जानते हैं। बाकी उसे माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के नाम से ही जानते थे।
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देश भर की पुलिस के लिए सिरदर्द बने मुन्ना बजरंगी की अंडरवर्ल्ड में मजबूत पकड़ थी। सूत्रों के मुताबिक मुन्ना बजरंगी का गुजरात के ड्रग माफिया अनिरुद्ध जडेजा से संपर्क हुआ। इसके बाद विदेशी असलहों के साथ दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, कर्नाटक, मंगलौर, इंदौर, भोपाल जैसे इलाकों को उसने अपनी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बना लिया था। ठेके पर हत्या करना उसका सबसे बड़ा कारोबार बन गया। वहीं मुन्ना बजरंगी को पुर्तगाल में गिरफ्तार होकर आए डी कंपनी अबू सलेम की हत्या की सुपारी भी मिली थी। यह सुपारी पूर्वांचल के शूटरों से अपना काम कराने वाले दाउद इब्राहिम ने दी थी।