{"_id":"5d2cb6bb8ebc3e6cfa3bee23","slug":"crime-jholachap-agra-news-agr396259360","type":"story","status":"publish","title_hn":"छापे पड़ते ही दुकान छोड़ भागे झोलाछाप,एक्सरे मशीन जब्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छापे पड़ते ही दुकान छोड़ भागे झोलाछाप,एक्सरे मशीन जब्त
विज्ञापन
एक झोलाछाप की दुकान पर जांच पड़ताल करते नोडल अधिकारी। अमर उजाला
- फोटो : ETAH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। झोलाछापों के यहां सोमवार को नोडल अधिकारी ने अपनी टीम के साथ कस्बा अवागढ़ और वसुंधरा में छापामार कार्रवाई की। इस दौरान एक झोलाछाप के यहां एक्सरे मशीन भी लगी पाई गई। टीम को देखकर मरीजों को छोड़कर झोलाछाप भाग गए। तीन को नोटिस जारी किया गया है जबकि दो दुकानें छोड़कर फरार हो गए।
झोलाछाप नोडल अधिकारी डा. महाराज की ओर से सोमवार को कस्बा अवागढ़ में छापामार कार्रवाई की गई। अवागढ़ में झोलाछाप उमेश कुमार के यहां एक्सरे मशीन लगी हुई पाई गई लेकिन नोटिस देकर चले आए, जबकि अधिकारियों को साथ लेकर सीज करना चाहिए था। नोडल अधिकारी ने कस्बे में ही किला रोड स्थित झोलाछाप शिव कुमार के यहां पर भी छापा मारा, यहां पर मरीजों को दवाएं दी जा रहीं थीं। झोलाछाप से दस्तावेज मांगे गए तो नहीं दे सका, इसके बाद नोटिस जारी कर एक सप्ताह में दस्तावेज जमा करने का समय दिया गया। यहां से टीम वापस हुई तो कस्बा वसुंधरा स्थित झोलाछाप उमेश कुमार के यहां छापा डाला गया। यहां पर मरीजों की खासी संख्या थी, लेकिन झोलाछाप भागने लगा तो टीम ने पकड़ लिया और नोटिस दिया गया। इतना ही नहीं झोलाछाप सुनील कुमार बसुंधरा अंदर से क्लीनिक का ताला लगाकर मरीजों का उपचार कर रहा था। इसको पकड़ा नहीं जा सका और आरके वर्मा बावसा को नोटिस देने की कार्रवाई गई। नोडल अधिकारी डा. महाराज सिंह ने बताया है कि सोमवार को हुई कार्रवाई के दौरान तीन झोलाछापों को नोटिस दिए गए हैं। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एटा। जनपद के हर कस्बे और तहसील में सैकड़ों झोलाछापों की दुकानें खुली हुई हैं। अधिकारी और जिम्मेदार अभियान के नाम पर छापामार कार्रवाई करते हैं तो इन्हें नोटिस देकर ही अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेते हैं। वर्ष 2019 में कई झोलाछापों की दुकानों और अपंजीकृत क्लीनिकों पर छापेमारी की गई। लेकिन नोटिस बस 20 को ही दिया गया।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग में झोलाछाप और अपंजीकृत क्लीनिक, हॉस्पिटल, नर्सिंग होम पर कार्रवाई करने के लिए एसीएमओ स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाती है। सामान्य तौर पर गर्मी शुरू होते ही बीमारियां फैलने लगती है वैसे ही 15 मई से झोलाछापों के खिलाफ छापामार कार्रवाई करने का अभियान शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार जून महीने से झोलाछापों पर कार्रवाई करने की बात ही जा रही है। इस बार झोलाछाप नोडल अधिकारी की कमान डा. महाराज सिंह को सौंपी गई है। इनके द्वारा अब तक 20 झोलाछापों के खिलाफ नोटिस देने की कार्रवाई की गई है, जबकि छापामारी के दौरान कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकी।
पिछली वर्ष सैकड़ों छापे एफआईआर सिर्फ सात
वर्ष 2018 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहले डा. चंद्रशेखर शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया गया, बाद में डा. आरएन गुप्ता को जिम्मेदारी सौंप दी गई। दोनों अधिकारियों की ओर से करीब 300 छापे और नोटिस जारी किए गए। लेकिन एफआईआर सिर्फ सात लोगों के खिलाफ की गई।
झोलाछापों के खिलाफ नोटिस देने का प्रावधान हैं, नोटिस की समय सीमा में दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने का नियम नहीं है। अगर कोई दस्तावेज नहीं पेश किए जाते हैं तो एफआईआर कराई जाती है। प्रक्रियाओं के अधीन कार्रवाई लगातार जारी हैं। डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ
विज्ञापन
झोलाछाप नोडल अधिकारी डा. महाराज की ओर से सोमवार को कस्बा अवागढ़ में छापामार कार्रवाई की गई। अवागढ़ में झोलाछाप उमेश कुमार के यहां एक्सरे मशीन लगी हुई पाई गई लेकिन नोटिस देकर चले आए, जबकि अधिकारियों को साथ लेकर सीज करना चाहिए था। नोडल अधिकारी ने कस्बे में ही किला रोड स्थित झोलाछाप शिव कुमार के यहां पर भी छापा मारा, यहां पर मरीजों को दवाएं दी जा रहीं थीं। झोलाछाप से दस्तावेज मांगे गए तो नहीं दे सका, इसके बाद नोटिस जारी कर एक सप्ताह में दस्तावेज जमा करने का समय दिया गया। यहां से टीम वापस हुई तो कस्बा वसुंधरा स्थित झोलाछाप उमेश कुमार के यहां छापा डाला गया। यहां पर मरीजों की खासी संख्या थी, लेकिन झोलाछाप भागने लगा तो टीम ने पकड़ लिया और नोटिस दिया गया। इतना ही नहीं झोलाछाप सुनील कुमार बसुंधरा अंदर से क्लीनिक का ताला लगाकर मरीजों का उपचार कर रहा था। इसको पकड़ा नहीं जा सका और आरके वर्मा बावसा को नोटिस देने की कार्रवाई गई। नोडल अधिकारी डा. महाराज सिंह ने बताया है कि सोमवार को हुई कार्रवाई के दौरान तीन झोलाछापों को नोटिस दिए गए हैं। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
एटा। जनपद के हर कस्बे और तहसील में सैकड़ों झोलाछापों की दुकानें खुली हुई हैं। अधिकारी और जिम्मेदार अभियान के नाम पर छापामार कार्रवाई करते हैं तो इन्हें नोटिस देकर ही अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेते हैं। वर्ष 2019 में कई झोलाछापों की दुकानों और अपंजीकृत क्लीनिकों पर छापेमारी की गई। लेकिन नोटिस बस 20 को ही दिया गया।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग में झोलाछाप और अपंजीकृत क्लीनिक, हॉस्पिटल, नर्सिंग होम पर कार्रवाई करने के लिए एसीएमओ स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाती है। सामान्य तौर पर गर्मी शुरू होते ही बीमारियां फैलने लगती है वैसे ही 15 मई से झोलाछापों के खिलाफ छापामार कार्रवाई करने का अभियान शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार जून महीने से झोलाछापों पर कार्रवाई करने की बात ही जा रही है। इस बार झोलाछाप नोडल अधिकारी की कमान डा. महाराज सिंह को सौंपी गई है। इनके द्वारा अब तक 20 झोलाछापों के खिलाफ नोटिस देने की कार्रवाई की गई है, जबकि छापामारी के दौरान कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकी।
पिछली वर्ष सैकड़ों छापे एफआईआर सिर्फ सात
वर्ष 2018 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहले डा. चंद्रशेखर शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया गया, बाद में डा. आरएन गुप्ता को जिम्मेदारी सौंप दी गई। दोनों अधिकारियों की ओर से करीब 300 छापे और नोटिस जारी किए गए। लेकिन एफआईआर सिर्फ सात लोगों के खिलाफ की गई।
झोलाछापों के खिलाफ नोटिस देने का प्रावधान हैं, नोटिस की समय सीमा में दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने का नियम नहीं है। अगर कोई दस्तावेज नहीं पेश किए जाते हैं तो एफआईआर कराई जाती है। प्रक्रियाओं के अधीन कार्रवाई लगातार जारी हैं। डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ