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गोमूत्र से बनेगा फ्लोर क्लीनर, गोबर से लकड़ी और गमले
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गोवंश से बने पात्र में रखी पूजन सामग्री
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। निराश्रित गोवंशों को कुरावली नगर पंचायत ने रोजगार के रूप में अपनाया है। यहां अधिशासी अधिकारी की पहल पर गोमूत्र से फ्लोर क्लीनर और गोबर से लकड़ी (विशेष ईंधन) और गमले बनाए जा रहे हैं। इन उत्पादों को अब जिले की सभी गोशालाओं तक पहुंचाने के साथ ही महिला स्वयं सहायता समूह को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नगर पंचायत कुरावली में संचालित गोशाला से निकलने वाले गोबर और गोमूत्र को अधिशासी अधिकारी डॉ. कल्पना वाजपेयी ने आय का साधन बना लिया। कर्मचारियों को अपनी देखरेख में प्रशिक्षित कर यहां गोमूत्र से फ्लोर क्लीनर बनाया जा रहा है। साथ ही गोबर से लकड़ी, गमले और अन्य उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट और जैविक कीटनाशक भी तैयार की जा रही है। इन उत्पादों की नगर पंचायत कार्यालय और गोशाला से बिक्री की जा रही है।
प्रशासन ने इस सराहनीय पहल को अन्य गोशालाओं तक पहुंचाने की पहल की है। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित कर गोबर से उत्पाद बनाकर आय बढ़ाने के लिए भी प्रयास शुरू हो गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया की पहल पर जल्द ही प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। अधिशासी अधिकारी कुरावली डॉ. कल्पना वाजपेयी खुद ही महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी। वह कहती हैं कि गोबर के उत्पादों से उन्होंने एक प्रयास किया है, मुख्य विकास अधिकारी की पहल पर वे महिलाओं को इसका प्रशिक्षण देंगी।
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आकर्षक हैं गोबर से बने गमले
सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन गोबर से बने गमले वास्तव में देखते ही बनते हैं। इन्हें तैयार करने के बाद आकर्षक रंगों में रंगा गया है, जिससे ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। नगर पंचायत कार्यालय कुरावली में भी इन्हें सजावट के लिए रखवाया गया है।
वृक्ष बचाने को गोबर की लकड़ी
जलाने के लिए प्रयोग होने वाली लकड़ी का विकल्प भी गोशाला में गोबर से ही तैयार किया गया है। लगातार कम हो रहे वृक्षों को बचाने की दिशा में ये प्रयास अहम है। गोशाला में उच्च दाब पर गोबर से इस लकड़ी को तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग भट्ठियों आदि में किया जा रहा है।
फसलों को सुधारने की भी कवायद
गोशाला में बने जैविक कीटनाशक और वर्मी कंपोस्ट से फसलों को सुधारने की भी कवायद की गई है। गोबर से तैयार वर्मी कंपोस्ट से जहां फसलों की पैदावार बढ़ेगी तो वहीं गोमूत्र से तैयार जैविक कीटनाशक से बिना फसल को कोई नुकसान हुए कीट प्रबंधन किया जा सकेगा। ये अन्य कीटनाशकों की अपेक्षा काफी सस्ता भी है।
कुरावली स्थित गोशाला में अधिशासी अधिकारी डॉ. कल्पना वाजपेयी ने गोबर से उत्पाद बनाकर एक बेहतर प्रयास किया है। इसे अन्य गोशालाओं में भी शुरू कराया जाएगा। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण भी जल्द शुरू होगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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नगर पंचायत कुरावली में संचालित गोशाला से निकलने वाले गोबर और गोमूत्र को अधिशासी अधिकारी डॉ. कल्पना वाजपेयी ने आय का साधन बना लिया। कर्मचारियों को अपनी देखरेख में प्रशिक्षित कर यहां गोमूत्र से फ्लोर क्लीनर बनाया जा रहा है। साथ ही गोबर से लकड़ी, गमले और अन्य उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट और जैविक कीटनाशक भी तैयार की जा रही है। इन उत्पादों की नगर पंचायत कार्यालय और गोशाला से बिक्री की जा रही है।
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प्रशासन ने इस सराहनीय पहल को अन्य गोशालाओं तक पहुंचाने की पहल की है। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित कर गोबर से उत्पाद बनाकर आय बढ़ाने के लिए भी प्रयास शुरू हो गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया की पहल पर जल्द ही प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। अधिशासी अधिकारी कुरावली डॉ. कल्पना वाजपेयी खुद ही महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी। वह कहती हैं कि गोबर के उत्पादों से उन्होंने एक प्रयास किया है, मुख्य विकास अधिकारी की पहल पर वे महिलाओं को इसका प्रशिक्षण देंगी।
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आकर्षक हैं गोबर से बने गमले
सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन गोबर से बने गमले वास्तव में देखते ही बनते हैं। इन्हें तैयार करने के बाद आकर्षक रंगों में रंगा गया है, जिससे ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। नगर पंचायत कार्यालय कुरावली में भी इन्हें सजावट के लिए रखवाया गया है।
वृक्ष बचाने को गोबर की लकड़ी
जलाने के लिए प्रयोग होने वाली लकड़ी का विकल्प भी गोशाला में गोबर से ही तैयार किया गया है। लगातार कम हो रहे वृक्षों को बचाने की दिशा में ये प्रयास अहम है। गोशाला में उच्च दाब पर गोबर से इस लकड़ी को तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग भट्ठियों आदि में किया जा रहा है।
फसलों को सुधारने की भी कवायद
गोशाला में बने जैविक कीटनाशक और वर्मी कंपोस्ट से फसलों को सुधारने की भी कवायद की गई है। गोबर से तैयार वर्मी कंपोस्ट से जहां फसलों की पैदावार बढ़ेगी तो वहीं गोमूत्र से तैयार जैविक कीटनाशक से बिना फसल को कोई नुकसान हुए कीट प्रबंधन किया जा सकेगा। ये अन्य कीटनाशकों की अपेक्षा काफी सस्ता भी है।
कुरावली स्थित गोशाला में अधिशासी अधिकारी डॉ. कल्पना वाजपेयी ने गोबर से उत्पाद बनाकर एक बेहतर प्रयास किया है। इसे अन्य गोशालाओं में भी शुरू कराया जाएगा। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण भी जल्द शुरू होगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।