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कोरोना संकट के बीच लापरवाही: आगरा में संक्रमित महिला की मौत के 17 दिन बाद आई जांच रिपोर्ट

Sat, 22 May 2021 12:06 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 22 May 2021 12:06 AM IST
सार

आगरा में स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एक महिला की मौत के 17 दिन बाद कोरोना जांच रिपोर्ट उनके परिजनों को मिली। 

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covid test report came 17 days after the death of woman in Agra
आगरा में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में 20 अप्रैल को जिस महिला ने कोरोना जांच के लिए सैंपल दिए थे। उसकी 22 अप्रैल को मौत हो गई। 17 दिन बाद 9 मई को महिला की जांच रिपोर्ट आई तो पूरा परिवार चौंक गया। स्वास्थ्य विभाग इसे अब लिपिकीय त्रुटि बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।

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गढ़ी भदौरिया के शकुंतला नगर निवासी 52 वर्षीय मीरा देवी की तबीयत 20 अप्रैल को बिगड़ गई। पुत्र महेंद्र ने बताया कि मैंने घर के नजदीक एक चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने कोरोना टेस्ट कराने को कहा। उसी दिन 20 अप्रैल को आईएसबीटी स्थित बूथ पर जांच कराई तो वहां एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन मां की तबीयत में सुधार नहीं था। 
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फिर एक निजी अस्पताल में जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव बताकर उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती करने के लिए कहा गया। रातभर भटकने के बाद परिजनों ने दूसरे दिन एक छोटे अस्पताल में मीरा देवी को भर्ती करा दिया। जहां दूसरे दिन 22 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

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मृतका का बेटा रोज चेक करता था पोर्टल 
मृतक के पुत्र महेंद्र ने बताया कि मां की मौत के बाद वो लगातार रोजाना अपनी और अपने पिता और मां की आरटीपीसीआर रिपोर्ट को ऑनलाइन सरकारी पोर्टल पर चेक करते रहे। 26 अप्रैल को उनकी और पिता की रिपोर्ट नेगेटिव आई, लेकिन मां मीरा देवी की रिपोर्ट नहीं आई। 

19 दिन बाद 9 मई को मां की रिपोर्ट ऑनलाइन दिखी। सैंपल कलेक्शन की डेट 9 मई 2021 लिखी थी। उसी दिन टेस्ट रिपोर्ट जारी की गई। जबकि एक दिन में जांच रिपोर्ट कैसे आ सकती है। अब सवाल उठता है कि मृत महिला ने जो एंटीजन सैंपल 20 अप्रैल को दिया था। उसकी रिपोर्ट 19 दिन बाद कैसे आई। इतने दिन सैंपल कहां था।

लिपिकीय त्रुटि, जांच की जाएगी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी पांडेय ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि यह लिपिकीय त्रुटि की वजह से हुआ है, पोर्टल पर रिपोर्ट फीड करने में कोई गलती हुई है। गलती कैसे हुई इसकी जांच की जाएगी। 

आंकड़ों में भी झोल
प्रशासन के आंकड़ों में भी झोल है। उस पर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। जिन मरीजों की मौत अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुई थी उनकी डेथ रिपोर्ट शासन के पोर्टल पर 20 से 25 दिन बाद अब दर्ज की गई। पिछले 48 घंटे में प्रशासन ने 19 मौतें दर्ज की हैं, जबकि बीते 24 घंटे में एसएन में किसी संक्रमित ने दम नहीं तोड़ा है।

ताजनगरी में 25 से 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा रहा। तब 19 मरीजों की मौत हो गई। इनकी रिपोर्ट अब सामने आई हैं। बुधवार को प्रशासन ने नौ मरीज और बृहस्पतिवार को दस मरीजों की मौत बताई है। यानी 48 घंटे में 19 मौतें सार्वजनिक की गई हैं। 

जबकि पिछले दस दिनों में संक्रमण में जबर्दस्त गिरावट आई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन संकट नहीं है। बहुत कम मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब दूसरी लहर अपने चरम पर थी तब इतनी मौतें नहीं हुई तो अब कैसे हो रही हैं।

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