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घोटालेबाज प्रधान को नहीं मिली राहत, खारिज हुई जमानत याचिका
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मैनपुरी। ग्राम प्रधान टिंडौली को उच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिल सकी। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने डीएम के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
विकास खंड की ग्राम पंचायत टिंडौली में एक शिकायत पर हुई जांच में दस लाख का घोटाला सामने आया था। इसके बाद जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने ग्राम प्रधान विजय कर यादव के अधिकार सीज कर तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया था। वहीं प्रधान से 5.02 लाख रुपये की रिकवरी के भी आदेश किए थे।
इस आदेश को प्रधान विजय करन यादव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, उन्होंने प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को गलत बताया था। लेकिन उच्च न्यायालय से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने इस रिट को खारिज कर दिया। ऐसे में एक बार फिर ग्राम प्रधान विजय करन यादव को झटका लगा है। ऐसे में ग्राम प्रधान के अधिकार अब समिति के पास ही रहेंगे। वहीं रिकवरी भी ग्राम प्रधान को जमा करानी होगी।
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सचिव को मिल चुकी है राहत
ग्राम पंचायत टिंडौली की जांच में ग्राम प्रधान विजय करन यादव के साथ-साथ तत्कालीन सचिव आसू यादव व हरीसिंह को भी दोषी पाया गया था। उनसे भी 2.51 लाख की रिकवरी के आदेश हुए थे। इसी मामले में आसू यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिकवरी के आदेश पर रोक लगा दी थी।
ग्राम प्रधान टिंडौली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन सुनवाई के बाद प्रशासन के आदेश को सही बताते हुए ग्राम प्रधान की याचिका खारिज कर दी गई है।
-स्वामीदीन, डीपीआरओ।
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विकास खंड की ग्राम पंचायत टिंडौली में एक शिकायत पर हुई जांच में दस लाख का घोटाला सामने आया था। इसके बाद जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने ग्राम प्रधान विजय कर यादव के अधिकार सीज कर तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया था। वहीं प्रधान से 5.02 लाख रुपये की रिकवरी के भी आदेश किए थे।
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इस आदेश को प्रधान विजय करन यादव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, उन्होंने प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को गलत बताया था। लेकिन उच्च न्यायालय से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने इस रिट को खारिज कर दिया। ऐसे में एक बार फिर ग्राम प्रधान विजय करन यादव को झटका लगा है। ऐसे में ग्राम प्रधान के अधिकार अब समिति के पास ही रहेंगे। वहीं रिकवरी भी ग्राम प्रधान को जमा करानी होगी।
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सचिव को मिल चुकी है राहत
ग्राम पंचायत टिंडौली की जांच में ग्राम प्रधान विजय करन यादव के साथ-साथ तत्कालीन सचिव आसू यादव व हरीसिंह को भी दोषी पाया गया था। उनसे भी 2.51 लाख की रिकवरी के आदेश हुए थे। इसी मामले में आसू यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिकवरी के आदेश पर रोक लगा दी थी।
ग्राम प्रधान टिंडौली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन सुनवाई के बाद प्रशासन के आदेश को सही बताते हुए ग्राम प्रधान की याचिका खारिज कर दी गई है।
-स्वामीदीन, डीपीआरओ।