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UP: फिल्म अभिनेत्री कंगना रनाैत को बड़ी राहत...कोर्ट ने खारिज किया वाद, आदेश में कही ये बात; जानें पूरा मामला
Tue, 06 May 2025 10:00 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 06 May 2025 10:00 PM IST
सार
भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनाैत को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रद्रोह केस में दाखिल वाद को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कंगना के खिलाफ कोई अपराध गठित नहीं होता।
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कंगना रनाैत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के मंडी क्षेत्र से भाजपा सांसद कंगना रनाैत के खिलाफ दायर वाद में मंगलवार को सुनवाई हुई। पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने वाद खारिज कर दिया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए अनुज प्रताप सिंह ने आदेश में लिखा है कि परिवाद पत्र में प्रस्तुत साक्ष्यों से कंगना के खिलाफ कोई अपराध गठित नहीं होता है। वहीं वादी अधिवक्ता का कहना है कि वह आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय जाएंगे।
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राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कंगना रनाैत के खिलाफ 11 सितंबर 2024 को वाद दायर किया था। उन्होंने देश के किसानों पर अभद्र टिप्पणी और क्रांतिकारी शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान का आरोप लगाया था। अदालत ने कंगना रनाैत को पक्ष रखने के लिए उनके हिमाचल प्रदेश स्थित कुल्लू मनाली और दिल्ली के पते पर तीन नोटिस भेजे थे।
24 अप्रैल को कंगना की तरफ से स्थानीय अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ने बहस की थी। वादी के अधिवक्ताओं ने भी दलीलें दी थी। मंगलवार को अदालत ने वाद खारिज कर दिया। आदेश में लिखा है कि उक्त मामले में केंद्र सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी आवश्यक है। वादी पक्ष ने प्रस्तुत प्रकरण में विपक्षी के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत करने से पूर्व मंजूरी प्राप्त किए जाने संबंधी कोई कथन नहीं किया गया। इसके अलावा न ही पर्याप्त साक्ष्य दाखिल किया है।
24 अप्रैल को कंगना की तरफ से स्थानीय अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ने बहस की थी। वादी के अधिवक्ताओं ने भी दलीलें दी थी। मंगलवार को अदालत ने वाद खारिज कर दिया। आदेश में लिखा है कि उक्त मामले में केंद्र सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी आवश्यक है। वादी पक्ष ने प्रस्तुत प्रकरण में विपक्षी के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत करने से पूर्व मंजूरी प्राप्त किए जाने संबंधी कोई कथन नहीं किया गया। इसके अलावा न ही पर्याप्त साक्ष्य दाखिल किया है।