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Agra News: तीस साल लड़ी लड़ाई, फिर बदल दी गवाही; कोर्ट ने दो आरोपियों को किया बरी
Tue, 03 Feb 2026 10:58 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 03 Feb 2026 10:58 PM IST
सार
कोर्ट में 30 वर्षों तक चले केस के बाद वादी अपनी गवाही से मुकर गया। ऐसे में आरोपियों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने दो आरोपियों को बरी कर दिया।
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कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
अदालत में पथराव, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के मुकदमे में सुनवाई के दौरान वादी और उसकी बहन पूर्व गवाही से मुकर गए। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अचल प्रताप सिंह ने ठोस साक्ष्य के अभाव में शाहगंज थाना क्षेत्र के तेलीपाड़ा निवासी गुड्डू और उसके भाई बबलू को घटना के 30 साल बाद बरी कर दिया।
थाना शाहगंज में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार शहजाद खां ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल 1996 को भाई नवाब ने शाम करीब 6 बजे आरोपी ऑटो चालक गुड्डू से कमाल खां से खेरिया मोड़ जाने के लिए किराया पूछा था। रुपये ज्यादा बताने पर भाई ने जाने से मना कर दिया। इस पर आरोपी गुड्डू गाली-गलौज करने लगा। विरोध पर गुड्डू उसके भाई बबलू के अलावा आजाद उर्फ टोटा ने पथराव कर लाठी-डंडों से भाई नवाब पर हमला कर दिया।
वादी जब भाई को बचाने गए तो उनकी की पिटाई की। लोगों के आने पर जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी आजाद उर्फ टोटा की मौत हो गई। उसके विरुद्ध अदालत ने कार्रवाई समाप्त कर दी। मुकदमे में वादी और उसकी बहन जमीला के अलावा इस्माइल की गवाही दर्ज हुई। वह भी पूर्व में दी गई गवाही से मुकर गए। अभियोजन की तरफ से अन्य कोई गवाह अदालत में पेश नहीं किया गया।
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थाना शाहगंज में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार शहजाद खां ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल 1996 को भाई नवाब ने शाम करीब 6 बजे आरोपी ऑटो चालक गुड्डू से कमाल खां से खेरिया मोड़ जाने के लिए किराया पूछा था। रुपये ज्यादा बताने पर भाई ने जाने से मना कर दिया। इस पर आरोपी गुड्डू गाली-गलौज करने लगा। विरोध पर गुड्डू उसके भाई बबलू के अलावा आजाद उर्फ टोटा ने पथराव कर लाठी-डंडों से भाई नवाब पर हमला कर दिया।
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वादी जब भाई को बचाने गए तो उनकी की पिटाई की। लोगों के आने पर जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी आजाद उर्फ टोटा की मौत हो गई। उसके विरुद्ध अदालत ने कार्रवाई समाप्त कर दी। मुकदमे में वादी और उसकी बहन जमीला के अलावा इस्माइल की गवाही दर्ज हुई। वह भी पूर्व में दी गई गवाही से मुकर गए। अभियोजन की तरफ से अन्य कोई गवाह अदालत में पेश नहीं किया गया।
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