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पलायन मजबूरीः खाने की तलाश में पांच किमी भटके दंपती, घर से पहले नहीं ठहरना चाहते मजदूर
Wed, 01 Apr 2020 12:01 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 01 Apr 2020 12:01 AM IST
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खाने की तलाश में भटके दंपती
- फोटो : अमर उजाला
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दीपक पत्नी सपना को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर आधा घंटे तक भटकते रहे। उन्हें उम्मीद थी कि मजदूरों को भोजन वितरण हो रहा होगा तो उन्हें भी मिल जाएगा लेकिन कोई शिविर नहीं मिला। इसके बाद हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां भोजन मिल गया।
उन्होंने बताया कि वह जगदीशपुरा से आए हैं। सोमवार सुबह समाजसेवी बस्ती में आए थे, एक पैकेट दे गए थे, उसमें चार पूरी और सब्जी थी। वह, उसकी पत्नी और दो बच्चों के हिस्से में एक एक पूरी आई। न सोमवार शाम को कोई आया और न ही मंगलवार सुबह।
हम दोनों तो पानी पीकर ही एक दिन और काट सकते थे लेकिन बच्चे रोने लगे। दीपक ने बताया कि वह ई रिक्शा चलाता है। इसे किराए पर लेता है। इतना ही कमा पाता है कि परिवार पेट भर ले। अब यह भी बंद है।
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उन्होंने बताया कि वह जगदीशपुरा से आए हैं। सोमवार सुबह समाजसेवी बस्ती में आए थे, एक पैकेट दे गए थे, उसमें चार पूरी और सब्जी थी। वह, उसकी पत्नी और दो बच्चों के हिस्से में एक एक पूरी आई। न सोमवार शाम को कोई आया और न ही मंगलवार सुबह।
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हम दोनों तो पानी पीकर ही एक दिन और काट सकते थे लेकिन बच्चे रोने लगे। दीपक ने बताया कि वह ई रिक्शा चलाता है। इसे किराए पर लेता है। इतना ही कमा पाता है कि परिवार पेट भर ले। अब यह भी बंद है।
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घर से पहले ठहराव नहीं चाहते मजदूर
लॉकडाउन में कामधंधे बंद होने से मजदूरों का पलायन लगातार जारी है। राजस्थान की सीमा बंद होने से वे सैंया से आगे नहीं जा पा रहे हैं। पुलिस ने इन मजदूरों के लिए रहने की व्यवस्था की है। पर, ये घर से पहले रुकना नहीं चाहते हैं।
शहरों से पैदल ही भूखे प्यासे अपने घर जाने के लिए निकले करीब तीन सौ मजदूर हाईवे पर झांसी, ललितपुर जिलों में जाने के लिए राजस्थान की सीमा पर मौजूद हैं। इनके साथ छोटे बच्चे और महिलाएं भी हैं। बरौदा डांग, ललितपुर निवासी मनोज और महेश ने बताया कि ग्राम मलपुरा निवासी रंधीर ठेकेदार काम दिलाने की बोलकर 30 लोगों को लेकर आया था। अब मुंह मोड़ लिया है। फोन भी नहीं उठा रहा है।
घर जाने के लिए पैसे भी नहीं बचे हैं। किसी तरह ट्रक में सवार होकर घर जा रहे थे कि यहां सीमा पर रोक लिया है। इन लोगों को सैंया पुलिस ने हाईवे स्थित मोतीलाल इंटर कॉलेज में रुकने के लिए कहा है। समाजसेवियों की मदद से इनके लिए खाने की व्यवस्था की गई है। पर, ये मजदूर घर पहुंचना चाहते हैं।
लॉकडाउन में कामधंधे बंद होने से मजदूरों का पलायन लगातार जारी है। राजस्थान की सीमा बंद होने से वे सैंया से आगे नहीं जा पा रहे हैं। पुलिस ने इन मजदूरों के लिए रहने की व्यवस्था की है। पर, ये घर से पहले रुकना नहीं चाहते हैं।
शहरों से पैदल ही भूखे प्यासे अपने घर जाने के लिए निकले करीब तीन सौ मजदूर हाईवे पर झांसी, ललितपुर जिलों में जाने के लिए राजस्थान की सीमा पर मौजूद हैं। इनके साथ छोटे बच्चे और महिलाएं भी हैं। बरौदा डांग, ललितपुर निवासी मनोज और महेश ने बताया कि ग्राम मलपुरा निवासी रंधीर ठेकेदार काम दिलाने की बोलकर 30 लोगों को लेकर आया था। अब मुंह मोड़ लिया है। फोन भी नहीं उठा रहा है।
घर जाने के लिए पैसे भी नहीं बचे हैं। किसी तरह ट्रक में सवार होकर घर जा रहे थे कि यहां सीमा पर रोक लिया है। इन लोगों को सैंया पुलिस ने हाईवे स्थित मोतीलाल इंटर कॉलेज में रुकने के लिए कहा है। समाजसेवियों की मदद से इनके लिए खाने की व्यवस्था की गई है। पर, ये मजदूर घर पहुंचना चाहते हैं।
मजदूरों ने शेल्टर होम में रुकने से किया इनकार, भेजा बिहार
कुबेरपुर के कृष्णा मैरिज होम में बनाए गए शेल्टर होम में रखे गए बिहार के 150 मजदूरों को जिला प्रशासन ने मंगलवार की रात को प्राइवेट वाहनों से बिहार की सीमा तक छोड़ने के लिए भेजा। कस्बे में चार मैरिज होम में शेल्टर होम बनाए गए हैं। हालांकि इनमें से किसी में भी मजदूर नहीं हैं। सोमवार को आगरा और फिरोजाबाद के अफसरों के बीच विवाद हो गया था। रात में ही दो हजार से ज्यादा मजदूर भेज दिए थे लेकिन 150 रह गए थे।
कस्बे में सोमवार को बाहरी राज्यों से आए कामगारों ने बसें नहीं मिलने पर हाईवे जाम करके हंगामा किया था। प्रशासन ने इन मजदूरों में से तकरीबन 150 को कुबेरपुर के कृष्णा मैरिज होम में रखा था। मंगलवार को इन्हें दोपहर को खाने के पैकेट भी मुहैया कराए गए। शाम को सभी मजदूरों को प्राइवेट गाड़ियों से बिहार की सीमा तक छोड़ने के लिए भेज दिया गया।
थाना प्रभारी एत्मादपुर ने बताया कि मजदूर यहां रुकना नहीं चाहते थे, इसलिए उनके लिए प्राइवेट वाहनों से बाहर भेजने की व्यवस्था कराई जा रही है। दूसरी ओर मैरिज होम में बनाए गए शेल्टर होम में अभी कोई मजदूर नहीं है। सोमवार रात को डीएम और एसएसपी एत्मादपुर पहुंचे थे। इसके बाद मजदूरों को ट्रकों और बसों से भिजवाया गया था।
कुबेरपुर के कृष्णा मैरिज होम में बनाए गए शेल्टर होम में रखे गए बिहार के 150 मजदूरों को जिला प्रशासन ने मंगलवार की रात को प्राइवेट वाहनों से बिहार की सीमा तक छोड़ने के लिए भेजा। कस्बे में चार मैरिज होम में शेल्टर होम बनाए गए हैं। हालांकि इनमें से किसी में भी मजदूर नहीं हैं। सोमवार को आगरा और फिरोजाबाद के अफसरों के बीच विवाद हो गया था। रात में ही दो हजार से ज्यादा मजदूर भेज दिए थे लेकिन 150 रह गए थे।
कस्बे में सोमवार को बाहरी राज्यों से आए कामगारों ने बसें नहीं मिलने पर हाईवे जाम करके हंगामा किया था। प्रशासन ने इन मजदूरों में से तकरीबन 150 को कुबेरपुर के कृष्णा मैरिज होम में रखा था। मंगलवार को इन्हें दोपहर को खाने के पैकेट भी मुहैया कराए गए। शाम को सभी मजदूरों को प्राइवेट गाड़ियों से बिहार की सीमा तक छोड़ने के लिए भेज दिया गया।
थाना प्रभारी एत्मादपुर ने बताया कि मजदूर यहां रुकना नहीं चाहते थे, इसलिए उनके लिए प्राइवेट वाहनों से बाहर भेजने की व्यवस्था कराई जा रही है। दूसरी ओर मैरिज होम में बनाए गए शेल्टर होम में अभी कोई मजदूर नहीं है। सोमवार रात को डीएम और एसएसपी एत्मादपुर पहुंचे थे। इसके बाद मजदूरों को ट्रकों और बसों से भिजवाया गया था।