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आगरा: पांच साल बाद जेल से छूटे निर्दोष दंपती आखिरकार बच्चों से मिले, अब परवरिश की चिंता!
Sat, 30 Jan 2021 12:09 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:09 AM IST
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पांच साल बाद जेल से रिहा होने के बाद बच्चों के साथ दंपती
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा जनपद के बाह के जरार निवासी नरेंद्र और नजमा को पांच साल बाद बेटा अजीत और बेटी अंजू मिल गए। वह दोनों को कानपुर के आश्रय गृह से शुक्रवार को आगरा ले आए। बच्चों के लिए दोनों जेल से रिहाई के बाद से ही इधर-उधर भटक रहे थे। अब उनको बच्चों की परवरिश की चिंता सता रही है।
बाह के जरार निवासी योगेंद्र सिंह के छह वर्षीय बेटे रंजीत की एक सितंबर 2015 को हत्या कर दी गई थी। इस आरोप में पुलिस ने नरेंद्र और उसकी पत्नी नजमा को जेल भेजा था। वह पांच साल से जेल में थे। उनके बच्चे तीन साल की बेटी अंजू और आठ साल का बेटा अजीत दादा-दादी के पास रह रहे थे। अक्तूबर 2019 में दादा-दादी ने बच्चों के पालन पोषण में असमर्थता जताते हुए दोनों को पुलिस की मदद से आश्रय गृह भिजवा दिया था। अंजू को राजकीय बाल गृह बालिका, कानपुर भेजा था, जबकि अजीत को फिरोजाबाद के राजकीय बाल गृह भेजा गया था। बाद में अजीत को भी कानपुर के आश्रय गृह भेजा गया।
संबंधित खबर: पांच साल बाद जेल से छूटे निर्दोष दंपती को नहीं मिले मासूम बेटा-बेटी, यूपी सरकार को नोटिस
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कोर्ट ने 19 जनवरी को नजमा और नरेंद्र को दोष मुक्त करते हुए रिहा किया था। इसके बाद से दोनों बच्चों के लिए भटक रहे थे। उन्हें पता चला कि बच्चे आश्रय गृह में हैं। इस पर बाल कल्याण समिति के आदेश पर गुरुवार को दोनों ने बच्चों को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। शुक्रवार को दोनों को आगरा ले आए। बच्चों के मिलने से माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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बाह के जरार निवासी योगेंद्र सिंह के छह वर्षीय बेटे रंजीत की एक सितंबर 2015 को हत्या कर दी गई थी। इस आरोप में पुलिस ने नरेंद्र और उसकी पत्नी नजमा को जेल भेजा था। वह पांच साल से जेल में थे। उनके बच्चे तीन साल की बेटी अंजू और आठ साल का बेटा अजीत दादा-दादी के पास रह रहे थे। अक्तूबर 2019 में दादा-दादी ने बच्चों के पालन पोषण में असमर्थता जताते हुए दोनों को पुलिस की मदद से आश्रय गृह भिजवा दिया था। अंजू को राजकीय बाल गृह बालिका, कानपुर भेजा था, जबकि अजीत को फिरोजाबाद के राजकीय बाल गृह भेजा गया था। बाद में अजीत को भी कानपुर के आश्रय गृह भेजा गया।
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कोर्ट ने 19 जनवरी को नजमा और नरेंद्र को दोष मुक्त करते हुए रिहा किया था। इसके बाद से दोनों बच्चों के लिए भटक रहे थे। उन्हें पता चला कि बच्चे आश्रय गृह में हैं। इस पर बाल कल्याण समिति के आदेश पर गुरुवार को दोनों ने बच्चों को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। शुक्रवार को दोनों को आगरा ले आए। बच्चों के मिलने से माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
फोन पर करते थे बहन-भाई बात
बेटे अजीत ने आश्रय गृह में पांच साल बाद आईं अपनी मां को पहचान लिया, जबकि अंजू ने मां को नहीं पहचाना था। इस पर मां ने उसे दुलार किया। बाद में वह भी मां पुकारने लगी। नजमा को जब जेल भेजा गया था, तब अंजू तीन साल की थी। इस वजह से वह मां को नहीं पहचान पा रही थी। अजीत ने बताया कि वह फिरोजाबाद के आश्रय गृह में बहन से बात करने के लिए कहता था। इस पर उसे कानपुर भेजा गया था। यहां से वह अपनी बहन से फोन पर बात करता था। मगर, मिलने कभी नहीं जा पाए। अब मां-बाप के मिलने से दोनों खुश हैं।
बेटे अजीत ने आश्रय गृह में पांच साल बाद आईं अपनी मां को पहचान लिया, जबकि अंजू ने मां को नहीं पहचाना था। इस पर मां ने उसे दुलार किया। बाद में वह भी मां पुकारने लगी। नजमा को जब जेल भेजा गया था, तब अंजू तीन साल की थी। इस वजह से वह मां को नहीं पहचान पा रही थी। अजीत ने बताया कि वह फिरोजाबाद के आश्रय गृह में बहन से बात करने के लिए कहता था। इस पर उसे कानपुर भेजा गया था। यहां से वह अपनी बहन से फोन पर बात करता था। मगर, मिलने कभी नहीं जा पाए। अब मां-बाप के मिलने से दोनों खुश हैं।