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पांच साल बाद जेल से छूटे निर्दोष दंपती को नहीं मिले मासूम बेटा-बेटी, यूपी सरकार को नोटिस
Fri, 29 Jan 2021 03:23 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 29 Jan 2021 03:23 PM IST
सार
- आगरा जिले के जरार निवासी नरेंद्र और नजमा ने पांच साल तक जेल में बेगुनाह होने के बावजूद सजा काटी। उनके बच्चों को आश्रय सदन भेजा था। जब दंपती जेल से बाहर आए तो बेटा-बेटी का कोई पता नहीं है।
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आगरा: पांच साल जेल में रहे निर्दोष नरेंद्र और नजमा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बगैर कोई गुनाह किए पांच साल तक जेल में रहे आगरा के नरेंद्र और उनकी पत्नी नजमा को अब उनके बच्चे नहीं मिल रहे हैं। दंपती को जेल भेजने के बाद पुलिस ने बच्चों को अनाथालय भेजे जाने की बात कही थी लेकिन अब बच्चे कहां है, अफसर भी जानकारी नहीं दे पा रहे।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजे गए नोटिस पर चार सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा गया है।
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विडंबना: पांच साल तक जेल में बेगुनाह होने के बावजूद काटी सजा, निर्दोष मां-बाप की बच्चों को दिलाने की गुहार
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आयोग ने इस मामले को मानवाधिकारों का गंभीर हनन माना है। आगरा जिले के बाह के जरार निवासी दंपती को पांच वर्षीय बालक रंजीत उर्फ चुन्ना की हत्या में 2015 में जेल भेजा गया था। हत्या की रिपोर्ट में दंपती पर संदेह जताए जाने पर बगैर छानबीन किए जेल भेजे गए पति-पत्नी के उस समय पांच साल का बेटा अजीत और तीन साल की बेटी अंजू थी।
21 जनवरी को जेल से रिहा हुए दंपती
जेल भेजे जाने के बाद कहा गया था कि उनके बच्चों को अनाथालय में भेज दिया गया है। 21 जनवरी को अदालत ने दंपती को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था और एसएसपी आगरा को इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा था।
अदालत ने प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी तय किए जाने के निर्देश दिए थे। जब दंपती रिहा होकर बाहर आए तो उन्हें अपने बच्चे कहीं नहीं मिले। बच्चों के बारे में पुलिस और अन्य अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके।
समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद इस प्रकरण का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अब मुख्य सचिव व डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आयोग ने कहा है जवाब में दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी दी जाए।
जेल भेजे जाने के बाद कहा गया था कि उनके बच्चों को अनाथालय में भेज दिया गया है। 21 जनवरी को अदालत ने दंपती को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था और एसएसपी आगरा को इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा था।
अदालत ने प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी तय किए जाने के निर्देश दिए थे। जब दंपती रिहा होकर बाहर आए तो उन्हें अपने बच्चे कहीं नहीं मिले। बच्चों के बारे में पुलिस और अन्य अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके।
समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद इस प्रकरण का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अब मुख्य सचिव व डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आयोग ने कहा है जवाब में दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी दी जाए।