{"_id":"696d50ef20a3f4a6c90a554c","slug":"councillors-to-campaign-against-increased-water-bills-agra-news-c-25-1-agr1067-968514-2026-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: पानी के बढ़े बिल के खिलाफ अभियान चलाएंगे पार्षद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: पानी के बढ़े बिल के खिलाफ अभियान चलाएंगे पार्षद
विज्ञापन
आगरा। नगर निगम में सालाना रेंटल वेल्यु (एआरवी) लगाने के बाद जलकल विभाग के देरी से एरियर लगाने से पार्षद नाराज हैं। उन्होंने परेशान उपभोक्ताओं की बात उठाते हुए बिल न जमा कराने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने की चेतावनी दी है।
पार्षद रवि बिहारी माथुर, प्रकाश के शवानी, हेमंत प्रजापति व राकेश जैन ने कहा कि जलकल विभाग को शासन से किए जाने वाले पत्राचार के दौरान यह भी बताना चाहिए कि विभाग ने ही देर से एआरवी लगाया। विभाग की देरी के चलते उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। विभाग ने समय-समय पर एआरवी लगाया होता तो नियमित रूप से बिल जमा कराने वाले उपभोक्ताओं को परेशानी न होती।
पार्षदों ने कहा कि अगर विभाग ने मनमानी जारी रखते हुए वसूली का दबाव बनाया तो पार्षद जनजागरूकता अभियान चलाकर बिल न जमा कराने के लिए लोगों को विभाग की करतूत बताएंगे। उधर, जलकल के महाप्रबंधक एके राजपूत ने कहा कि आगरा ही नहीं पूरे प्रदेश में एआरवी देर से लगता रहा है। जब से एआरवी लगता है, तब से एरियर उपभोक्ताओं को अदा करना पड़ता है। यही वजह है कि इस व्यवस्था में बदलाव को लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पार्षद रवि बिहारी माथुर, प्रकाश के शवानी, हेमंत प्रजापति व राकेश जैन ने कहा कि जलकल विभाग को शासन से किए जाने वाले पत्राचार के दौरान यह भी बताना चाहिए कि विभाग ने ही देर से एआरवी लगाया। विभाग की देरी के चलते उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। विभाग ने समय-समय पर एआरवी लगाया होता तो नियमित रूप से बिल जमा कराने वाले उपभोक्ताओं को परेशानी न होती।
विज्ञापन
पार्षदों ने कहा कि अगर विभाग ने मनमानी जारी रखते हुए वसूली का दबाव बनाया तो पार्षद जनजागरूकता अभियान चलाकर बिल न जमा कराने के लिए लोगों को विभाग की करतूत बताएंगे। उधर, जलकल के महाप्रबंधक एके राजपूत ने कहा कि आगरा ही नहीं पूरे प्रदेश में एआरवी देर से लगता रहा है। जब से एआरवी लगता है, तब से एरियर उपभोक्ताओं को अदा करना पड़ता है। यही वजह है कि इस व्यवस्था में बदलाव को लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है।
विज्ञापन