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आगराः कोरोना संक्रमित के संपर्क में आए तीन बंदी पॉजिटिव, जिला जेल में हड़कम्प
Tue, 19 May 2020 01:30 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 19 May 2020 01:30 PM IST
सार
केंद्रीय कारागार के दस बंदी हैं संक्रमित
जिला कारागार के तीन बंदी हुए संक्रमित
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कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला जेल में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से हड़कम्प मच गया है। जिला जेल में तीन और बंदी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। यह तीनों चार दिन पहले मृत कोरोना संक्रमित बंदी के संपर्क में आए थे।
बंदियों की कोरोना पॉजिटिव सोमवार रात को आई थी। जेल प्रशासन ने तीनों बंदियों सहित 28 को क्वारंटीन कर दिया है। अब तक आगरा की जेलों में दो बंदियों की मौत हो चुकी है। वहीं केंद्रीय कारागार में भी दस बंदी पॉजिटिव आए हैं।
ये भी पढ़ें: जिला कारागार के संक्रमित बंदी की मौत से खलबली, दो दिन बाद आई कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव
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बता दें कि जिला जेल के 90 वर्षीय संक्रमित बंदी की एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हुई थी। वह उल्टी दस्त से पीड़ित था और 13 मई को बंदी ने दम तोड़ दिया था। कोरोना की रिपोर्ट शुक्रवार को आई थी।
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बंदियों की कोरोना पॉजिटिव सोमवार रात को आई थी। जेल प्रशासन ने तीनों बंदियों सहित 28 को क्वारंटीन कर दिया है। अब तक आगरा की जेलों में दो बंदियों की मौत हो चुकी है। वहीं केंद्रीय कारागार में भी दस बंदी पॉजिटिव आए हैं।
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ये भी पढ़ें: जिला कारागार के संक्रमित बंदी की मौत से खलबली, दो दिन बाद आई कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव
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बता दें कि जिला जेल के 90 वर्षीय संक्रमित बंदी की एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हुई थी। वह उल्टी दस्त से पीड़ित था और 13 मई को बंदी ने दम तोड़ दिया था। कोरोना की रिपोर्ट शुक्रवार को आई थी।
संक्रमित बंदी बसई जगनेर, थाना क्षेत्र के गढ़ी मोहन गांव का निवासी था। उसे विगत 16 मार्च को जिला कारागार में दाखिल किया गया था। उसके खिलाफ 1982 में मारपीट और जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज हुआ था।
नहीं दिखे कोरोना के लक्षण
जेल अफसरों का कहना है कि इलाज कर रहे डॉक्टर को बुजुर्ग बंदी में कोरोना का एक भी लक्षण नहीं दिखा था। बुखार, जुकाम या खांसी तक नहीं हुई। उल्टी और दस्त की समस्या थी। इसके चलते उसका कोरोना टेस्ट कराने की जरूरत नहीं समझी। उसे 22 अप्रैल को उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होने पर जेल के अस्पताल में फिर भर्ती कराया। यहां एक मई तक रहा। तीन मई को एक बार फिर उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर बंदी को जेल के अस्पताल में भर्ती किया गया।
हालत में सुधार नहीं होने पर उसे 13 मई को एसएन मेडकिल कॉलेज भर्ती कराया गया। इसी दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। पोस्टमार्टम से पहले बंदी का कोरोना टेस्ट सैंपल लिया गया था।
नहीं दिखे कोरोना के लक्षण
जेल अफसरों का कहना है कि इलाज कर रहे डॉक्टर को बुजुर्ग बंदी में कोरोना का एक भी लक्षण नहीं दिखा था। बुखार, जुकाम या खांसी तक नहीं हुई। उल्टी और दस्त की समस्या थी। इसके चलते उसका कोरोना टेस्ट कराने की जरूरत नहीं समझी। उसे 22 अप्रैल को उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होने पर जेल के अस्पताल में फिर भर्ती कराया। यहां एक मई तक रहा। तीन मई को एक बार फिर उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर बंदी को जेल के अस्पताल में भर्ती किया गया।
हालत में सुधार नहीं होने पर उसे 13 मई को एसएन मेडकिल कॉलेज भर्ती कराया गया। इसी दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। पोस्टमार्टम से पहले बंदी का कोरोना टेस्ट सैंपल लिया गया था।