{"_id":"60e8b13b8ebc3e9ec7470a72","slug":"corona-variant-delta-in-agra-agra-city-news-agr499192274","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीसरी लहर में ताजनगरी पर भारी पड़ सकता है कोरोना का डेल्टा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीसरी लहर में ताजनगरी पर भारी पड़ सकता है कोरोना का डेल्टा
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आगरा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमण की तीसरी लहर में ताजनगरी में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस का खतरा सबसे ज्यादा है। वहीं दूसरी लहर में आगरा के 10 मरीजों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। आगरा के अलावा डेल्टा के छह मरीज हाथरस, फिरोजाबाद, मैनपुरी और सहारनपुर के भी मिले हैं। संक्रमित होने पर इनके नमूने जांच के लिए दिल्ली भेजे गए थे। वहां जीनोम सीक्वेसिंग की रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। आगरा के 10 मरीजों में से दो को वैक्सीन की दोनों डोज और दो को पहली डोज लगी थी।
एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि पांच जून को 40 और 26 जून को 20 संक्रमितों के नमूने इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी दिल्ली में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे। इनमें से 40 नमूनों की रिपोर्ट मिली हैं। 16 में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इनमें से 10 संक्रमित आगरा के हैं। बाकी के दो मरीज फिरोजाबाद, दो हाथरस और एक-एक मरीज मैनपुरी व सहारनपुर के हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हाथरस, मैनपुरी, सहारनपुर समेत अन्य जिलों के नमूनों की भी जांच की जाती है। 20 साल से अधिक उम्र के मरीजों के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराई गई। इनमें से आठ मरीजों की उम्र 70 साल से अधिक की रही। यह अस्पताल में भर्ती रहे, हाईफ्लो ऑक्सीजन पर थे या फिर आईसीयू में भर्ती थे।
ईटा, लोटा, कप्पा, लैम्ब्डा, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस का खतरा
डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के आठ वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया है, जिनमें ईटा, लोटा, कप्पा, लैम्ब्डा, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस हैं। तीसरी लहर इन सभी में से डेल्टा प्लस का खतरा ताजनगरी में सबसे ज्यादा बताया गया है। इस वैरिएंट के केरल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में यह वैरिएंट के मरीज तेजी से बढ़े हैं। डेल्टा वैरिएंट पहली लहर के मुकाबले 60 गुना और डेल्टा प्लस 70 गुना तेजी से संक्रमण फैलाता है। कप्पा वैरिएंट बहुत ही कम संक्रामक होता है। इसकी फैलने की दर भी कम है। इस पर वैक्सीन पूरी तरह से प्रभावी हैं। बाकी के वैरिएंट की मारकता पर स्टडी चल रही है।
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फेफड़ों पर ज्यादा तेजी से चिपकता है डेल्टा प्लस
एसएन में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव चौधरी ने बताया कि डेल्टा प्लस बेहद ही खतरनाक है। यह वैरिएंट फेफड़ों पर सीधे प्रभाव डालता है और डेल्टा के मुकाबले फेफड़ों पर तेजी से चिपकता है। इस पर एंटीबॉडी भी बेअसर हैं। 30 से 40 फीसदी फेफड़े संक्रमित हुए तो जान का जोखिम पहले के मुकाबले कई गुना है।
म्यूटेशन से खतरनाक बना डेल्टा प्लस
डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट में म्यूटेशन होने से डेल्टा प्लस वैरिएंट (एवाई-1, एवाई-2) बना, जो बहुत ही खतरनाक है। यह शरीर में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को नष्ट कर देता है और फेफड़ों और हृदय पर प्रभाव डालता है। इस पर वैक्सीन भी बेअसर प्रतीत हो रही है।
60: नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग को भेजे
40: नमूनों की रिपोर्ट मिली
16: नमूनों में डेल्टा की पुष्टि हुई
10: मरीज आगरा के
02: मरीज हाथरस
02: मरीज फिरोजाबाद
01: मरीज मैनपुरी का
01: मरीज सहारनपुर का
सभी वैरिएंट के समान लक्षण
- बुखार, खांसी, गले में खराश
- शरीर में टूटन, कमजोरी,
- सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना।
यह बरतें सावधानी
- लक्षण नजर आते ही तत्काल जांच कराएं।
- इलाज में देरी न करें और खुद की डॉक्टरी से बचें।
- खुद को क्वारंटीन करें और पौष्टिक भोजन करें।
- भीड़ में जाने से बचें, बाहर जाते वक्त दो मास्क लगाकर रखें।
- हाथों को साफ करके ही मुंह, नाक और आंख छुएं।
- टीकाकरण कराएं
अभी 20 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी
आगरा में 10 और अन्य जिलों के छह मरीजों में डेल्टा वैरिएंटी की पुष्टि हुई है। अभी 20 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी है। इनके अनावा 33 नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए केजीएमयू भेजा गया है। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य
अप्रैल-मई में डेल्टा ने मचाया कोहराम
आगरा। दूसरी लहर में ताजनगरी में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने कोहराम मचाया था। अप्रैल-मई में लगभग 15 हजार संक्रमित मिले और 350 लोगों की मौत हुई। जीनोम सीक्वेंसिंग में वायरस का स्वरूप की पहचान डेल्टा के रूप में हुई है। डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि ताजनगरी में अभी तक वायरस के तीन वैरिएंट मिल चुके हैं। इनमें से दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट की पुष्टि इसी साल जनवरी में एक महिला मरीज में हुई थी। यह ठीक हो चुकी हैं। फरवरी में एक युवक में अज्ञात वैरिएंट मिला था, यह किसका स्वरूप है, इसकी अभी तक पता नहीं लग सका है। यह मरीज भी ठीक हो चुका है। अब दूसरी लहर में खासतौर से अप्रैल-मई में डेल्टा वैरिएंट मिला, जो अभी तक के दोनों वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ।
ताजनगरी में वायरस का तीसरा वैरिएंट मिला
दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट : कमला नगर की 26 साल की युवती इसी साल जनवरी में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करके लौटी थी। बुखार, गला चोक होने पर निजी अस्पताल में इलाज चला और जीनोम सीक्वेंसिंग में दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट मिला। पहली लहर के वैरिएंट के मुकाबले ये ढाई से तीन गुना ज्यादा खतरनाक था।
अज्ञात वायरस : ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी 32 साल का युवक है। यह ट्रैवलिंग कंपनी का कार चालक है। फरवरी में बुखार, खांसी गला चोक होने पर जांच में संक्रमित मिला। जीनोम सीक्वेंसिंग में अज्ञात वायरस पाया गया। अफ्रीक वैरिएंट के मुकाबले ये खतरनाक था। संक्रमित करने की दर अधिक थी।
डेल्टा वैरिएंट : 20 से 83 साल के उम्र के लोगों में डेल्टा वैरिंएट की पुष्टि हुई। यह लोग वायरस की चपेट मेें कैैसे आए, इसकी पड़ताल की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इनकी ट्रैवलिंग और कांटेक्ट हिस्ट्री के बारे पता कर रहा है। यह पहली लहर के वैरिएंट के मुकाबले 60 गुना तेजी से संक्रमित कर रहा था।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि पांच जून को 40 और 26 जून को 20 संक्रमितों के नमूने इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी दिल्ली में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे। इनमें से 40 नमूनों की रिपोर्ट मिली हैं। 16 में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इनमें से 10 संक्रमित आगरा के हैं। बाकी के दो मरीज फिरोजाबाद, दो हाथरस और एक-एक मरीज मैनपुरी व सहारनपुर के हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हाथरस, मैनपुरी, सहारनपुर समेत अन्य जिलों के नमूनों की भी जांच की जाती है। 20 साल से अधिक उम्र के मरीजों के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराई गई। इनमें से आठ मरीजों की उम्र 70 साल से अधिक की रही। यह अस्पताल में भर्ती रहे, हाईफ्लो ऑक्सीजन पर थे या फिर आईसीयू में भर्ती थे।
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ईटा, लोटा, कप्पा, लैम्ब्डा, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस का खतरा
डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के आठ वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया है, जिनमें ईटा, लोटा, कप्पा, लैम्ब्डा, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस हैं। तीसरी लहर इन सभी में से डेल्टा प्लस का खतरा ताजनगरी में सबसे ज्यादा बताया गया है। इस वैरिएंट के केरल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में यह वैरिएंट के मरीज तेजी से बढ़े हैं। डेल्टा वैरिएंट पहली लहर के मुकाबले 60 गुना और डेल्टा प्लस 70 गुना तेजी से संक्रमण फैलाता है। कप्पा वैरिएंट बहुत ही कम संक्रामक होता है। इसकी फैलने की दर भी कम है। इस पर वैक्सीन पूरी तरह से प्रभावी हैं। बाकी के वैरिएंट की मारकता पर स्टडी चल रही है।
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फेफड़ों पर ज्यादा तेजी से चिपकता है डेल्टा प्लस
एसएन में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव चौधरी ने बताया कि डेल्टा प्लस बेहद ही खतरनाक है। यह वैरिएंट फेफड़ों पर सीधे प्रभाव डालता है और डेल्टा के मुकाबले फेफड़ों पर तेजी से चिपकता है। इस पर एंटीबॉडी भी बेअसर हैं। 30 से 40 फीसदी फेफड़े संक्रमित हुए तो जान का जोखिम पहले के मुकाबले कई गुना है।
म्यूटेशन से खतरनाक बना डेल्टा प्लस
डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट में म्यूटेशन होने से डेल्टा प्लस वैरिएंट (एवाई-1, एवाई-2) बना, जो बहुत ही खतरनाक है। यह शरीर में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को नष्ट कर देता है और फेफड़ों और हृदय पर प्रभाव डालता है। इस पर वैक्सीन भी बेअसर प्रतीत हो रही है।
60: नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग को भेजे
40: नमूनों की रिपोर्ट मिली
16: नमूनों में डेल्टा की पुष्टि हुई
10: मरीज आगरा के
02: मरीज हाथरस
02: मरीज फिरोजाबाद
01: मरीज मैनपुरी का
01: मरीज सहारनपुर का
सभी वैरिएंट के समान लक्षण
- बुखार, खांसी, गले में खराश
- शरीर में टूटन, कमजोरी,
- सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना।
यह बरतें सावधानी
- लक्षण नजर आते ही तत्काल जांच कराएं।
- इलाज में देरी न करें और खुद की डॉक्टरी से बचें।
- खुद को क्वारंटीन करें और पौष्टिक भोजन करें।
- भीड़ में जाने से बचें, बाहर जाते वक्त दो मास्क लगाकर रखें।
- हाथों को साफ करके ही मुंह, नाक और आंख छुएं।
- टीकाकरण कराएं
अभी 20 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी
आगरा में 10 और अन्य जिलों के छह मरीजों में डेल्टा वैरिएंटी की पुष्टि हुई है। अभी 20 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी है। इनके अनावा 33 नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए केजीएमयू भेजा गया है। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य
अप्रैल-मई में डेल्टा ने मचाया कोहराम
आगरा। दूसरी लहर में ताजनगरी में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने कोहराम मचाया था। अप्रैल-मई में लगभग 15 हजार संक्रमित मिले और 350 लोगों की मौत हुई। जीनोम सीक्वेंसिंग में वायरस का स्वरूप की पहचान डेल्टा के रूप में हुई है। डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि ताजनगरी में अभी तक वायरस के तीन वैरिएंट मिल चुके हैं। इनमें से दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट की पुष्टि इसी साल जनवरी में एक महिला मरीज में हुई थी। यह ठीक हो चुकी हैं। फरवरी में एक युवक में अज्ञात वैरिएंट मिला था, यह किसका स्वरूप है, इसकी अभी तक पता नहीं लग सका है। यह मरीज भी ठीक हो चुका है। अब दूसरी लहर में खासतौर से अप्रैल-मई में डेल्टा वैरिएंट मिला, जो अभी तक के दोनों वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ।
ताजनगरी में वायरस का तीसरा वैरिएंट मिला
दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट : कमला नगर की 26 साल की युवती इसी साल जनवरी में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करके लौटी थी। बुखार, गला चोक होने पर निजी अस्पताल में इलाज चला और जीनोम सीक्वेंसिंग में दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट मिला। पहली लहर के वैरिएंट के मुकाबले ये ढाई से तीन गुना ज्यादा खतरनाक था।
अज्ञात वायरस : ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी 32 साल का युवक है। यह ट्रैवलिंग कंपनी का कार चालक है। फरवरी में बुखार, खांसी गला चोक होने पर जांच में संक्रमित मिला। जीनोम सीक्वेंसिंग में अज्ञात वायरस पाया गया। अफ्रीक वैरिएंट के मुकाबले ये खतरनाक था। संक्रमित करने की दर अधिक थी।
डेल्टा वैरिएंट : 20 से 83 साल के उम्र के लोगों में डेल्टा वैरिंएट की पुष्टि हुई। यह लोग वायरस की चपेट मेें कैैसे आए, इसकी पड़ताल की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इनकी ट्रैवलिंग और कांटेक्ट हिस्ट्री के बारे पता कर रहा है। यह पहली लहर के वैरिएंट के मुकाबले 60 गुना तेजी से संक्रमित कर रहा था।