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कोरोना के इलाज का साढ़े छह लाख बिल, परिजन का आरोप- मृत मरीज को रुपयों के लिए रखा वेंटिलेटर पर
Wed, 24 Jun 2020 12:56 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 24 Jun 2020 12:56 AM IST
सार
संक्रमित मरीज के परिजनों का कहना है कि उसकी मौत हो चुकी है, जबकि अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मरीज जिंदा है। उसकी हालत गंभीर है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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विस्तार
आगरा के निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज का साढ़े छह लाख का बिल बनाया है। परिजनों का आरोप है कि मरीज की मौत हो गई है, लेकिन रुपये के लिए वेंटिलेटर पर मरीज को रखा हुआ है। उन्होंने इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से की है।
नगला बूढ़ी क्षेत्र निवासी 41 साल के चांदी कारीगर को सांस लेने में परेशानी होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज ट्राएज ओपीडी में पांच जून को दिखाया था। यहां उनको भर्ती कर नमूना लिया गया।
जांच में रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। परिजनों का आरोप है कि यहां इलाज बेहतर न होने पर आठ जून को सिंकदरा स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां ढाई से तीन लाख रुपये का खर्च बताया गया।
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नगला बूढ़ी क्षेत्र निवासी 41 साल के चांदी कारीगर को सांस लेने में परेशानी होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज ट्राएज ओपीडी में पांच जून को दिखाया था। यहां उनको भर्ती कर नमूना लिया गया।
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जांच में रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। परिजनों का आरोप है कि यहां इलाज बेहतर न होने पर आठ जून को सिंकदरा स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां ढाई से तीन लाख रुपये का खर्च बताया गया।
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परिजनों ने लगाया यह आरोप
परिजनों के अनुसार अब साढ़े पांच लाख की बीमा पॉलिसी के अलावा 50 हजार रुपये जमा कराए जा चुके हैं। वीडियो कॉल के जरिये मरीज से बात करनी चाही, लेकिन कोई भी मूवमेंट नहीं दिखा। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनकी मौत हो चुकी है।
अब हॉस्पिटल प्रशासन बिल जमा करने के बाद ही मरीज की कोई जानकारी देने की बात कह रहा है। अस्पताल स्टाफ से पीपीई किट पहनकर मरीज को देखने की कहा तो भी उन्होंने मना कर दिया। इस संबंध में सीएमओ डॉ. आरसी पांडे का कहना है कि पीड़ितों के आरोप की जांच करा रहे हैं।
अस्पताल डायरेक्टर ने बताया कि मरीज जीवित हैं, लेकिन उनकी हालत गंभीर है। परिजनों को लेवल थ्री सेंटर में शिफ्ट कराने के लिए कहा है, लेकिन वह तैयार नहीं हैं। पांच लाख की पॉलिसी में 90 हजार रुपये ही स्वीकृत हुए हैं, 50 हजार रुपये उनके जमा हैं। अन्य आरोप गलत हैं।
अब हॉस्पिटल प्रशासन बिल जमा करने के बाद ही मरीज की कोई जानकारी देने की बात कह रहा है। अस्पताल स्टाफ से पीपीई किट पहनकर मरीज को देखने की कहा तो भी उन्होंने मना कर दिया। इस संबंध में सीएमओ डॉ. आरसी पांडे का कहना है कि पीड़ितों के आरोप की जांच करा रहे हैं।
अस्पताल डायरेक्टर ने बताया कि मरीज जीवित हैं, लेकिन उनकी हालत गंभीर है। परिजनों को लेवल थ्री सेंटर में शिफ्ट कराने के लिए कहा है, लेकिन वह तैयार नहीं हैं। पांच लाख की पॉलिसी में 90 हजार रुपये ही स्वीकृत हुए हैं, 50 हजार रुपये उनके जमा हैं। अन्य आरोप गलत हैं।