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कोरोना से लोगों को बचाने के लिए दिन-रात जुटे 'योद्धा', बीमार मां को देखने तक नहीं है वक्त
Sat, 18 Apr 2020 02:10 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 18 Apr 2020 02:10 PM IST
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कोरोना वायरस के दौरान ड्यूटी कर रहे जिला अस्पताल व एसएन के कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में कोरोना वायरस के 172 मरीज अब तक मिल चुके हैं। शहर के साथ-साथ देहात क्षेत्र में भी संक्रमित मिलने से चिकित्सकों की ड्यूटी और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। आगरा के जिला अस्पताल में तैनात नोडल ऑफिसर की तारीफ खुद उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य कर चुके हैं। वहीं सेहत के प्रहरी संक्रमितों की सेवा करने में जुटे हैं। अपने परिजनों को देखने का भी वक्त उनके पास नहीं है।
दो महीने से कोई छुट्टी नहीं की: डॉ. पीयूष जैन
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. पीयूष जैन कंट्रोल रूम के नोडल ऑफिसर हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास कोरोना वायरस के मरीज, संदिग्धों की जानकारी आने के बाद तत्काल सर्विलांस और रैपिड रिस्पांस टीम को मौके पर भेजते हैं। दो महीने से छुट्टी नहीं ली है। घर भी जाता हूं तो एक कमरे तक ही सीमित कर लिया है। मां के पैर में फ्रैक्चर हो गया, लेकिन उनको भी दिखाने का वक्त नहीं मिल पाता।
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दो महीने से कोई छुट्टी नहीं की: डॉ. पीयूष जैन
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. पीयूष जैन कंट्रोल रूम के नोडल ऑफिसर हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास कोरोना वायरस के मरीज, संदिग्धों की जानकारी आने के बाद तत्काल सर्विलांस और रैपिड रिस्पांस टीम को मौके पर भेजते हैं। दो महीने से छुट्टी नहीं ली है। घर भी जाता हूं तो एक कमरे तक ही सीमित कर लिया है। मां के पैर में फ्रैक्चर हो गया, लेकिन उनको भी दिखाने का वक्त नहीं मिल पाता।
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आगरा में कोविड-19 की रोकथाम के लिए विशेष ड्यूटी पर चिकित्साधिकारी डॉ. पीयूष जैन के पास घर वालों से बात करने का वक़्त नहीं है लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह इस बीमारी से लड़ाई में योगदान दे रहे हैं।#UPKeCoronaYoddha #यूपीकेकोरोनायोद्धा #CoronaWarriors pic.twitter.com/b9VbVT1Qv7
विज्ञापन विज्ञापन— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) April 16, 2020
'वो अपनों से दूर हैं ताकि देश सुरक्षित रहे'
आगरा में चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक परिहार भी परिवार से दूर रहकर ड्यूटी कर रहे हैं। वो हर संक्रमित की जानकारी जुटाते हैं और लगातार संक्रमण को फैलने से रोकने की कोशिश में लगे रहते हैं। ड्यूटी कर जब वो घर जाते हैं तब भी अपने परिवार से अलग रहते हैं। ताकि घर में बाकी सब सुरक्षित रहें। इनके लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा है कि वो घरवालों से दूर हैं ताकि देश सुरक्षित रहे।
परिजन कहते, अपना भी ख्याल रखना: डॉ. आकाश शर्मा
एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के रेजीडेंट डॉ. आकाश शर्मा आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के मरीज आने के बाद से कार्य बढ़ गया है। होली से घर नहीं गया हूं। मथुरा में रह रहे मां-पिताजी चिंता करते हैं। फोन पर बात नहीं हो पाती है। जब एक्टिव क्वारंटीन सेंटर पहुंचता हूं तब कहीं बात हो पाती है। हर बार परिजन अपना ख्याल रखने की बात कहते हैं।
आगरा में मेडिकल ऑफिसर डॉ. अभिषेक परिहार परिवार से दूर रहकर दिन-रात काम करते हैं, ताकि सब सुरक्षित रहें। उनकी गुजारिश है कि कोई संक्रमित व्यक्ति अपनी स्थिति न छुपाए ताकि इस महामारी को रोका जा सके। ऐसे कोरोना वॉरियर का अभिनंदन।#UPKeCoronaYoddha #यूपीकेकोरानायोद्धा #CoronaWarriors pic.twitter.com/38JsS8hwjE
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) April 17, 2020
परिजन कहते, अपना भी ख्याल रखना: डॉ. आकाश शर्मा
एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के रेजीडेंट डॉ. आकाश शर्मा आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के मरीज आने के बाद से कार्य बढ़ गया है। होली से घर नहीं गया हूं। मथुरा में रह रहे मां-पिताजी चिंता करते हैं। फोन पर बात नहीं हो पाती है। जब एक्टिव क्वारंटीन सेंटर पहुंचता हूं तब कहीं बात हो पाती है। हर बार परिजन अपना ख्याल रखने की बात कहते हैं।
आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी से परिवार चिंतित: गणेश कुमार
एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी दे रहे वार्ड ब्वाय गणेश कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में डयूटी लगी तो शुरुआत में डर लगा, लेकिन जब औरों को जाते देखा तो डर खत्म हो गया। मरीजों के इलाज की व्यवस्थाएं, चिकित्सकीय उपकरणों की जांच समेत अन्य कार्य भी देखते हैं। परिजन चिंता करते हैं लेकिन जिम्मेदारी समझते हुए अपना ध्यान रखने की कहते हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में सफाई कार्य करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गोरेलाल का कहना है कि वार्ड की दो से तीन बार सफाई की जाती है। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट किट पहनकर फर्श, उपकरण, शौचालय, बेड समेत पूरे वार्ड की क्लीनिकल सफाई करते हैं। घर पर भी नहीं जा पा रहे हैं। बच्चों और परिजनों से फोन पर ही खैरखबर ले लेते हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में सफाई कार्य करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गोरेलाल का कहना है कि वार्ड की दो से तीन बार सफाई की जाती है। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट किट पहनकर फर्श, उपकरण, शौचालय, बेड समेत पूरे वार्ड की क्लीनिकल सफाई करते हैं। घर पर भी नहीं जा पा रहे हैं। बच्चों और परिजनों से फोन पर ही खैरखबर ले लेते हैं।