कोरोना से बेहाल पर्यटन: 14 महीने से लगे होटलों में ताले, बिजली का बिल भरने के भी लाले
होटल एंड रेस्टोरेंट से जुड़े उद्यमियों ने हालात खराब देखकर प्रदेश और केंद्र सरकार से राहत की मांग की है। पर्यटन मंत्री के साथ मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर उन्हें बिजली बिल, हाउस टैक्स और वाटर टैक्स में छूट की मांग की है।
विस्तार
आगरा में कोरोना संक्रमण की पहली लहर ने ही पर्यटन उद्योग को जोर का झटका दिया था। पहली लहर से हुए नुकसान से ताजनगरी के 3.50 लाख से ज्यादा लोग संभल भी नहीं पाए थे कि दूसरी लहर ने हालात और बिगाड़ दिए।
साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों की रोजी रोटी पर्यटन से जुड़ी हुई थी। इनमें से होटल रोजगार का बड़ा जरिया थे। 650 से अधिक होटलों में 14 महीने से ताले लगे हुए हैं। अब हालात ये हैं कि बिजली का बिल भरने के भी लाले हैं। बड़े होटलों में 90 फीसदी से ज्यादा स्टाफ की छंटनी हो चुकी है।
होटल एंड रेस्टोरेंट से जुड़े उद्यमियों ने हालात खराब देखकर प्रदेश और केंद्र सरकार से राहत की मांग की है। इन संगठनों ने पर्यटन मंत्री के साथ मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर उन्हें बिजली बिल, हाउस टैक्स और वाटर टैक्स में छूट की मांग की है। उद्यमियों का कहना है कि पर्यटन उद्योग की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है। अक्तूबर से पहले पर्यटन शुरू होने के आसार ही नहीं हैं। विदेशी पर्यटक 14 माह से आ नहीं रहे, घरेलू पर्यटकों पर ट्रेड चलाना मुश्किल है। इसलिए रियायतें देनी ही चाहिए।
होटल ट्रेड को टैक्स फ्री करें
बिजली का बिल भरने की हिम्मत अब नहीं रही। 14 माह से होटल पर ताला है। सरकार अगले एक साल तक इस पूरे ट्रेड को टैक्स फ्री करें। जो कर्मचारी हैं उनको रोजगार देने के लिए नियोक्ताओं को इंसेंटिव और पीएफ में मदद दे। - रमेश वाधवा, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन
सरकार राहत नहीं दे रही
अधिकांश होटल बीते साल मार्च से बंद हैं। उनका हाउस टैक्स और वाटर टैक्स माफ किया जाए। नगर निगम अधिनियम में यह बिंदु हैं, लेकिन प्रदेश सरकार पर्यटन उद्योग को राहत नहीं दे रही। अक्तूबर से पहले होटल खुलने की कोई उम्मीद नहीं है। - राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन
पर्यटन को उद्योग का दर्जा दें
होटल बेहद बुरे दौर से जूझ रहे हैं। नए पर्यटन सीजन से पहले कोई उम्मीद नहीं दिखती। अगर सरकार का साथ न मिला तो दोबारा शुरू करना भी मुश्किल हो जाएगा। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर पैकेज दिया जाए। - हरी सुकुमार, अध्यक्ष, टूरिज्म गिल्ड आफ आगरा
सभी टैक्स माफ करने चाहिए
सरकार कुछ तो रियायत दे। जितने यूनिट बिजली उपयोग की, उतना बिल ले। बंद होटल का टैक्स माफ करने का नियम है तो लागू क्यों नहीं कर रहे। सरकारी उपेक्षा बेरोजगारी को बढ़ाएगी। - संदीप अरोड़ा, अध्यक्ष, आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन
कुछ कारीगर तो वापस लौट गए
फतेहाबाद रोड पर ताजमहल के दो किमी दायरे में मौजूद होटल विदेशी पर्यटकों पर आधारित थे, लेकिन उनके टूर मार्च 2020 से ही बंद हैं। बीते साल अक्तूबर में लॉकडाउन खुला और ताजमहल के दरवाजे आम पर्यटकों के लिए खुले तो कुछ होटल खुले और रेस्टोरेंट भी शुरू हो गए मगर नुकसान ही उठाना पड़ा। रेस्टोरेंट में काम करने वाले कुछ कारीगर तो वापस लौट चुके हैं। शहर में 600 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं।
सभी रेस्टोरेंट बंद हैं। होम डिलीवरी का भी ऑर्डर नहीं आ रहा। संक्रमण के डर से लोग कतरा रहे हैं। कारीगर ही काम करने को तैयार नहीं और ग्राहकों में कोरोना का जबरदस्त खौफ है। - संजीव जैन, रेस्टोरेंट संचालक
कारीगर अपने घर चले गए। केवल सिक्योरिटी गार्ड रह गया है। सप्ताह में एक दिन जाकर साफ सफाई चेकिंग कर लेते हैं। सरकार से बिजली बिल और टैक्स में ही राहत मिल जाए तो मुश्किलें कम हो जाएंगी। - नंदू गुप्ता, रेस्टोरेंट संचालक
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