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स्वास्थ्य सेवाओं का हाल: कबाड़ में पड़े स्ट्रेचर, गोदी में उठा कर ले जा रहे मरीज

Mon, 20 Mar 2023 11:44 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 20 Mar 2023 11:44 AM IST
सार

जिला अस्पताल में पांच में से तीन स्ट्रेचर खराब पड़े हुए हैं। ऐसे में तीमारदार मरीजों को गोदी में उठाकर ले जा रहे हैं।  मरीजों के लिए जरूरी उपकरण आदि पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
 

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Condition of health services stretchers lying in junk patients being carried in the lap
जिला अस्पताल से रेफर महिला को गोदी में उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाते परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैनपुरी के जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं रामभरोसे नजर आ रही हैं। जिला अस्पताल के स्ट्रेचर कबाड़ में पड़े हुए हैं वहीं तीमारदार मरीजों को गोदी में उठाकर ले जा रहे हैं। यहां मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में पहुंचाने, इमरजेंसी में भर्ती करने और प्लास्टर रूम में लाने ले जाने के लिए मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में मरीजों के लिए जरूरी उपकरण आदि पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अस्पताल में स्ट्रेचर तक की कमी नजर आ रही है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक मरीजों को लोग कहीं कंधे का सहारा देकर ले जा रहे हैं तो कहीं गोदी में उठाए हुए देखे जा रहे हैं। जिला अस्पताल में कुल पांच स्ट्रेचर हैं जिनमें से तीन खराब पड़े हुए हैं। बचे दो स्ट्रेचर में से एक इंडोर में चला जाता है तो इमरजेंसी के लिए एक मात्र स्ट्रेचर ही बचता है। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ रही हैं।
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Condition of health services stretchers lying in junk patients being carried in the lap
जिला अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर न मिलने पर कंधे का सहारा देकर अपनी सास को ले जाती महिला - फोटो : अमर उजाला
अगर व्हीलचेयर की बात करें तो जिला अस्पताल में मात्र दो व्हीलचेयर हैं जिसमें से एक इमरजेंसी तो दूसरी इंडोर में रहती है। जबकि इमरजेंसी में प्रतिदिन 40 से 50 मरीज पहुंचते हैं। जिसमें से अधिकतर मरीजों को स्ट्रेचर की जरूरत होती है। वहीं प्लास्टर आदि के लिए मरीजों को ले जाने के लिए भी स्ट्रेचर की जरूरत होती है। इमरजेंसी और इंडोर के लिए मात्र दो स्ट्रेचर की व्यवस्था होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।  वहीं सीएमएस डॉ.मदनलाल का कहना है कि स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की कमी नहीं है। थोड़ी बहुत कमी आ गई है उसे ठीक करा दिया जाएगा। मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। 

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Condition of health services stretchers lying in junk patients being carried in the lap
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जीने के नीचे पड़े खराब स्ट्रेचर - फोटो : अमर उजाला

केस नंबर-एक 

एलाऊ थाना क्षेत्र के गांव इलाबांस निवासी राहुल की 21 वर्षीय पत्नी ममता को फांसी लगाने पर गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था। यहां से गंभीर हालत में उसे मेडिकल कॉलेज सैफई रेफर किया गया। ममता के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला परिजन उसे ऑक्सीन सिलिंडर के साथ गोदी में उठाकर एंबुलेंस तक ले गए।

केस नंबर-दो

शहर के आगरा रोड निवासी शकुंतला देवी अपनी सास मीरा देवी को गंभीर हालत में लेकर जिला अस्पताल पहुंचीं। यहां उनके लिए स्टे्रचर और व्हीलचेयर नहीं मिल सकी। जिसके बाद कंधे का सहारा देकर शकुंतला अपनी सास को लेकर जांच कक्ष तक पहुंची।

केस नंबर-तीन

शहर के मोहल्ला पुरोहिताना निवासी राहुल पांडेय बिजली करंट से जलने से गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचे। यहां से उसे वर्न वार्ड के लिए भेजा गया। स्ट्रेचर न मिलने पर परिजन उसे मोटर साइकिल से ही वर्न वार्ड में ले गए।
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