मथुरा: आत्मनिर्भर क्षेत्रीय सहकारी समिति ने मुर्दों के नाम दे दिया लाखों का कर्ज
- वसूली नोटिस मिलने पर कर्जदार परिवारों में खलबली
- ग्रामीणों ने दर्ज कराई शिकायत, बैंक मैनेजर ने कहा- जांच कराई जाएगी
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मथुरा जिले के राया स्थित सहकारी बैंक शाखा के मैनेजर की ओर से दी गई वसूली सूचना ने ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों के किसानों की नींद उड़ा दी है। बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक आत्मनिर्भर क्षेत्रीय सहकारी समिति सरूपा का किसानों पर लाखों रुपये बकाया है। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनकी मौत एक दशक पहले हो चुकी है। मौत के बाद उनके द्वारा ऋण लेना दर्शाया गया है।
करीब पांच-छह साल पहले तक ग्रामीण अंचल में किसान खाद-बीज के लिए सहकारी समितियों का उपयोग करते थे। सोनई क्षेत्र स्थित आत्मनिर्भर सहकारी समिति सरूपा में भी इस क्षेत्र के कई हजार किसानों के खाते हैं। हालांकि अब खाद-बीज की खुले बाजार में सुलभता से खरीद होने पर अधिकांश किसानों ने लेनदेन बंद कर दिया है।
पिछले सप्ताह सहकारी बैंक राया के मैनेजर की ओर से किसानों को पुराना बकाया ऋण चुकता करने के नोटिस भेजे गए। इस पर किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई। किसानों का कहना है कि उन्होंने तो पिछले 6-7 साल से कोई ऋण ही नहीं लिया है। गांव के नरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके नाम पर 65 हजार का ऋण दर्शाया गया है।
कई मृतकों के नाम पर कर्ज
बसंत लाल ने बताया कि उनके और पिता के नाम पर एक लाख रुपये से अधिक का ऋण रिकॉर्ड में दर्ज है। सहकारी बैंक के कर्जदाता किसानों में नौ साल पहले मृतक चंद्रभान शर्मा निवासी चिमला भी कर्जदार हैं। उनकी पुत्रवधू मुन्नी देवी पर भी 46 हजार का कर्ज है।
आनंद प्रकाश की मौत चार साल पहले हो गई, लेकिन उन्हें भी कर्जदार बताया गया है। किसानों का आरोप है कि आत्मनिर्भर सहकारी समिति के सचिव ने यह गोलमाल किया है। किसानों के रिकॉर्ड पर फर्जी तौर तरीके से धन निकासी की है।
ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और डीएम पोर्टल के साथ एआर कोऑपरेटिव से भी की है। इस संबंध में सहकारी बैंक राया के मैनेजर अर्जुन सिंह का कहना है कि मामले की उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जा रही है। जांच कराई जाएगी।