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श्रीपारस प्रकरण में लापरवाही पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को हटाया
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आगरा। श्रीपारस हॉस्पिटल प्रकरण में बृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश चंद (आरसी) पांडेय को शासन ने पद से हटा दिया है। सीएमओ पर मॉकड्रिल कांड में जांच और कोविड मरीजों से मनमानी वसूली करने वाले अस्पतालों के खिलाफ लचर कार्यशैली के आरोप लग रहे थे। जिसके बाद बृहस्पतिवार को सीएमओ की तबादला सूची में डॉ. पांडेय का नाम शामिल हो गया।
श्रीपारस हॉस्पिटल में 26 अप्रैल की सुबह ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की गई। जिसमें कथित 22 मौतों के आरोप लगे। जांच में स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। जिसके बाद उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए। बृहस्पतिवार को शासन ने 50 सीएमओ की तबादला सूची जारी की। जिसमें डॉ. आरसी पांडेय पर गाज गिर गई। पांडेय करीब 14 महीने आगरा में सीएमओ रहे। इनसे पहले मई 2020 में खराब कोविड प्रबंधन के लिए तत्कालीन सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स पर गाज गिरी थी। उन्हें सीएमओ पद से हटाकर तब शासन ने डीएम कार्यालय से संबंद्ध किया था। सेवानिवृत्त होने तक वह डीएम कार्यालय से संबंद्ध रहे। सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय की जगह स्वास्थ्य महानिदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव को नया सीएमओ बनाया गया है। उनकी जगह डॉ. आरसी पांडेय को भेजा गया है।
श्रीपारस हॉस्पिटल पर मेहरबानियों के आरोप
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय पर श्रीपारस हॉस्पिटल प्रकरण में मेहरबानियों के आरोप हैं। पिछले साल लगी श्रीपारस की सील इस साल सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय की अगुवाई में खोली गई थी। कोविड हॉस्पिटल का दर्जा भी सीएमओ ने दिलाया था। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय का एक बाबू भी श्रीपारस संचालक डॉ. अरिन्जय जैन पर मेहरबान रहा। बदले में बाबू ने अपने स्वजन की श्रीपारस में लैब खोल ली। इस मामले में राज्यमंत्री डॉ. उदयभान सिंह ने शासन में शिकायत की। जिसके बाद बाबू को हॉस्पिटल पंजीकरण पटल से हटाया गया था।
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मनमानी वसूली पर नहीं लगा सके रोक
संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों को निजी अस्पतालों में उचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए बेड की कीमतें तय की थीं, परंतु आगरा में कोविड अस्पतालों ने मनमानी वसूली की। महामारी समिति में 55 से अधिक शिकायत आई। जिसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया। शासन को शपथ पत्र दाखिल करना पड़ा। ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध आरोप साबित होने के बाद भी सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने ठोस कार्रवाई नहीं की। जिसका खामियाजा उन्हें पद गवांकर उठाना पड़ा।
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श्रीपारस हॉस्पिटल में 26 अप्रैल की सुबह ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की गई। जिसमें कथित 22 मौतों के आरोप लगे। जांच में स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। जिसके बाद उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए। बृहस्पतिवार को शासन ने 50 सीएमओ की तबादला सूची जारी की। जिसमें डॉ. आरसी पांडेय पर गाज गिर गई। पांडेय करीब 14 महीने आगरा में सीएमओ रहे। इनसे पहले मई 2020 में खराब कोविड प्रबंधन के लिए तत्कालीन सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स पर गाज गिरी थी। उन्हें सीएमओ पद से हटाकर तब शासन ने डीएम कार्यालय से संबंद्ध किया था। सेवानिवृत्त होने तक वह डीएम कार्यालय से संबंद्ध रहे। सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय की जगह स्वास्थ्य महानिदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव को नया सीएमओ बनाया गया है। उनकी जगह डॉ. आरसी पांडेय को भेजा गया है।
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श्रीपारस हॉस्पिटल पर मेहरबानियों के आरोप
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय पर श्रीपारस हॉस्पिटल प्रकरण में मेहरबानियों के आरोप हैं। पिछले साल लगी श्रीपारस की सील इस साल सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय की अगुवाई में खोली गई थी। कोविड हॉस्पिटल का दर्जा भी सीएमओ ने दिलाया था। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय का एक बाबू भी श्रीपारस संचालक डॉ. अरिन्जय जैन पर मेहरबान रहा। बदले में बाबू ने अपने स्वजन की श्रीपारस में लैब खोल ली। इस मामले में राज्यमंत्री डॉ. उदयभान सिंह ने शासन में शिकायत की। जिसके बाद बाबू को हॉस्पिटल पंजीकरण पटल से हटाया गया था।
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मनमानी वसूली पर नहीं लगा सके रोक
संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों को निजी अस्पतालों में उचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए बेड की कीमतें तय की थीं, परंतु आगरा में कोविड अस्पतालों ने मनमानी वसूली की। महामारी समिति में 55 से अधिक शिकायत आई। जिसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया। शासन को शपथ पत्र दाखिल करना पड़ा। ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध आरोप साबित होने के बाद भी सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने ठोस कार्रवाई नहीं की। जिसका खामियाजा उन्हें पद गवांकर उठाना पड़ा।