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भरगैन पीएचसी पर डेढ़ महीने से लटके रहे ताले, लोग परेशान
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भरगैन। 60 हजार की आबादी वाले कस्बे में चिकित्सा के कोई समुचित इंतजाम नही हैं। बीमार लोगों को जहां-तहां इलाज के लिए जाना पड़ता है। यहां बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी ताले लगे नजर आते हैं। क्योंकि यहां चिकित्सक की स्थायी तैनाती नहीं है। पिछले डेढ़ माह से तो अस्पताल में ताला लटका है। मंगलवार को अस्पताल के ताले तो खुल गए, लेकिन कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा केवल एक फार्मासिस्ट मौजूद रहे। अव्यवस्थाओं से लोग परेशान हैं।
भरगैन नगर पंचायत की श्रेणी का कस्बा है, लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। एक फार्मासिस्ट की तैनाती ही इस अस्पताल में रहती है। चिकित्सकों की स्थायी तैनाती यहां नहीं है। कस्बे के आदिल खान बताते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र में इतनी बदहाली है कि यहां के खिड़की, दरवाजे भी टूटे हैं। स्वास्थ्य केंद्र के आसपास काफी झाडियां हैं। समसुल हसन का कहना है कि कस्बे में कोई बीमार होता है तो उसे पटियाली या अन्य जगह लेकर जाना पड़ता है। कोरोना की महामारी के दौरान भी लोगों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा है।
कई गांव जुड़े हैं चिकित्सा कें द्र से
भरगैन। कस्बे के चौकी अतनपुर, भल्लपुर, मेंदपुर, गनु, किंदन, कनेसर, सलेमपुर, माखेरा, बरईपुर, भूड़, चमन, नगरिया, सादनगर, नगरिया जाटव, सिरसा, गूजरपुर, हजरतगंज, रोकरी, घटमई,गडिय़ा, जलालपुर, बहावलपुर, भैंसरी सहित तमाम गांव के लोग भी इसी पीएचसी पर निर्भर हैं।
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- कस्बे में 60 हजार की आबादी है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर समुचित व्यवस्थाएं नहीं मिल पातीं। कोई भी बीमार होता है तो उसे बाहर लेकर जाना पड़ता है। पिछले डेढ़ माह से अस्पताल बंद था। जिसका ताला भी आज कल में ही खुला है। यहां चिकित्सक की नियमित तैनाती की जाए। जिससे लोगों को इलाज मिल सके।- रिहान खान।
- स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हर समय ही लोग परेशान रहते हैं। चिकित्सालय तो यहां बना दिया गया है, लेकिन चिकित्सालय बनाकर सुविधा बहाल करना सरकार भूल गई। स्वास्थ्य विभाग को लोगों की कतई चिंता नहीं है। जन प्रतिनिधि भी इस समस्या पर ध्यान नहीं देते। जब चिकित्सक ही नहीं होंगे तो अस्पताल का क्या होगा- समीर खान।
भरगैन के स्वास्थ्य केंद्र पर शीघ्र व्यवस्थाओं की बहाली की जाएगी। कोरोना के कारण सभी अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गई थी। इन्हें जल्द संचालित किया जाएगा। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
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भरगैन नगर पंचायत की श्रेणी का कस्बा है, लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। एक फार्मासिस्ट की तैनाती ही इस अस्पताल में रहती है। चिकित्सकों की स्थायी तैनाती यहां नहीं है। कस्बे के आदिल खान बताते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र में इतनी बदहाली है कि यहां के खिड़की, दरवाजे भी टूटे हैं। स्वास्थ्य केंद्र के आसपास काफी झाडियां हैं। समसुल हसन का कहना है कि कस्बे में कोई बीमार होता है तो उसे पटियाली या अन्य जगह लेकर जाना पड़ता है। कोरोना की महामारी के दौरान भी लोगों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा है।
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कई गांव जुड़े हैं चिकित्सा कें द्र से
भरगैन। कस्बे के चौकी अतनपुर, भल्लपुर, मेंदपुर, गनु, किंदन, कनेसर, सलेमपुर, माखेरा, बरईपुर, भूड़, चमन, नगरिया, सादनगर, नगरिया जाटव, सिरसा, गूजरपुर, हजरतगंज, रोकरी, घटमई,गडिय़ा, जलालपुर, बहावलपुर, भैंसरी सहित तमाम गांव के लोग भी इसी पीएचसी पर निर्भर हैं।
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- कस्बे में 60 हजार की आबादी है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर समुचित व्यवस्थाएं नहीं मिल पातीं। कोई भी बीमार होता है तो उसे बाहर लेकर जाना पड़ता है। पिछले डेढ़ माह से अस्पताल बंद था। जिसका ताला भी आज कल में ही खुला है। यहां चिकित्सक की नियमित तैनाती की जाए। जिससे लोगों को इलाज मिल सके।- रिहान खान।
- स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हर समय ही लोग परेशान रहते हैं। चिकित्सालय तो यहां बना दिया गया है, लेकिन चिकित्सालय बनाकर सुविधा बहाल करना सरकार भूल गई। स्वास्थ्य विभाग को लोगों की कतई चिंता नहीं है। जन प्रतिनिधि भी इस समस्या पर ध्यान नहीं देते। जब चिकित्सक ही नहीं होंगे तो अस्पताल का क्या होगा- समीर खान।
भरगैन के स्वास्थ्य केंद्र पर शीघ्र व्यवस्थाओं की बहाली की जाएगी। कोरोना के कारण सभी अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गई थी। इन्हें जल्द संचालित किया जाएगा। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।