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गेहूं खरीद से संतुष्ट नहीं प्रशासन, 65 फीसदी पर ही सिमट गया लक्ष्य
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एटा। गेहूं खरीद का लक्ष्य पिछले साल की अपेक्षा 450 मीट्रिक टन कम जिले को मिला था। इसके बावजूद भी अधिकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए। इतना ही नहीं पिछली साल के आंकड़ों को देखा जाए तो 18 हजार मीट्रिक टन से कम खरीद हो सकी है।
जिले को गेहूं खरीद का लक्ष्य 60 हजार 500 मीट्रिक टन मिला था। लक्ष्य को पूरा करने के लिए शासन की ओर से पहले 15 जून तक का समय दिया गया, लेकिन जब लक्ष्य पूरा होता नजर नहीं आया तो सरकार ने प्रशासन को मौका देते हुए दस दिन का समय बढ़ाकर 25 जून कर दिया। इसके बावजूद भी जिले का लक्ष्य 65.19 फीसदी ही हो सका। जब कि पिछले साल जिले को 65 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, तब यहां पर 57 हजार 739 मीट्रिक टन की खरीद हुई थी। अगर पिछले साल के आंकड़े देखे जाए तो 18 हजार 295 मीट्रिक टन खरीद कम हुई है। सबसे खराब प्रदर्शन पीसीएफ का रहा है, अकेले पीसीएफ की ओर से 12 हजार 497 मीट्रिक टन गेहूं कम खरीदा है। इसकी वजह से जिले भर के अधिकारियों को कम लक्ष्य होने को लेकर परेशानी झेलनी पड़ी है। वहीं दूसरे नंबर पर कम खरीद करने वाला कर्मचारी कल्याण निगम है इसने लक्ष्य के सापेक्ष 3634 मीट्रिक टन खरीद कम की है। जिले में हुई खरीद को लेकर प्रशासन संतुष्ट नहीं दिख रहा है।
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जिले को गेहूं खरीद का लक्ष्य 60 हजार 500 मीट्रिक टन मिला था। लक्ष्य को पूरा करने के लिए शासन की ओर से पहले 15 जून तक का समय दिया गया, लेकिन जब लक्ष्य पूरा होता नजर नहीं आया तो सरकार ने प्रशासन को मौका देते हुए दस दिन का समय बढ़ाकर 25 जून कर दिया। इसके बावजूद भी जिले का लक्ष्य 65.19 फीसदी ही हो सका। जब कि पिछले साल जिले को 65 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, तब यहां पर 57 हजार 739 मीट्रिक टन की खरीद हुई थी। अगर पिछले साल के आंकड़े देखे जाए तो 18 हजार 295 मीट्रिक टन खरीद कम हुई है। सबसे खराब प्रदर्शन पीसीएफ का रहा है, अकेले पीसीएफ की ओर से 12 हजार 497 मीट्रिक टन गेहूं कम खरीदा है। इसकी वजह से जिले भर के अधिकारियों को कम लक्ष्य होने को लेकर परेशानी झेलनी पड़ी है। वहीं दूसरे नंबर पर कम खरीद करने वाला कर्मचारी कल्याण निगम है इसने लक्ष्य के सापेक्ष 3634 मीट्रिक टन खरीद कम की है। जिले में हुई खरीद को लेकर प्रशासन संतुष्ट नहीं दिख रहा है।
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