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शिक्षक दिवस: शिक्षा विभाग ने 100 शिक्षकों को किया सम्मानित, डीएम बोले- निजी जैसे बेहतर हों सरकारी स्कूल
Sun, 06 Sep 2026 10:44 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 06 Sep 2026 10:44 AM IST
सार
शिक्षक दिवस पर शिक्षा विभाग की ओर से सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें उत्कृष्ट कार्य करने वाले 100 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
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जिलाधिकारी ने शिक्षकों को किया सम्मानित।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
शिक्षक दिवस पर बेसिक शिक्षा विभाग ने 100 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस अवसर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में भी निजी विद्यालयों जैसा बेहतर स्तर होना चाहिए।
जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का सालाना बजट 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अनुसार, एक बच्चे की शिक्षा पर सालाना करीब 50 हजार रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि जब निजी स्कूल समान फीस पर अच्छी शिक्षा दे सकते हैं तो सरकारी स्कूलों में भी गुणवत्ता बेहतर क्यों नहीं हो सकती।
सम्मान समारोह शनिवार को हरीपर्वत स्थित हॉलीडे इन होटल में आयोजित किया गया। इसमें निपुण विद्यालय बने और बेहतर नामांकन वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सहायक परियोजना प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार, नगर खंड शिक्षा अधिकारी सुमित कुमार, डीसी लवली सिंह और डीसी कुलदीप तिवारी भी उपस्थित रहे।
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जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का सालाना बजट 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अनुसार, एक बच्चे की शिक्षा पर सालाना करीब 50 हजार रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि जब निजी स्कूल समान फीस पर अच्छी शिक्षा दे सकते हैं तो सरकारी स्कूलों में भी गुणवत्ता बेहतर क्यों नहीं हो सकती।
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सम्मान समारोह शनिवार को हरीपर्वत स्थित हॉलीडे इन होटल में आयोजित किया गया। इसमें निपुण विद्यालय बने और बेहतर नामांकन वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सहायक परियोजना प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार, नगर खंड शिक्षा अधिकारी सुमित कुमार, डीसी लवली सिंह और डीसी कुलदीप तिवारी भी उपस्थित रहे।
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अब जमीन पर बैठकर नहीं पढ़ेंगे बच्चे
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि जिले के करीब 17 हजार विद्यालयों में फर्नीचर की जरूरत थी। अब लगभग आठ हजार विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने का काम शुरू हो गया है। इसका लक्ष्य है कि कोई भी विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर न हो। हर बच्चे को कक्षा में बैठने की बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में भी 25-25 लाख रुपये की लागत से काम हो रहा है। पीएम श्री विद्यालयों में भी भामाशाहों के सहयोग से 10-10 लाख रुपये की राशि से विभिन्न सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार पर चिंता
जिलाधिकारी ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार में आगरा का नाम न आने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि भविष्य में ऐसे हर पुरस्कार में आगरा के कम से कम एक विद्यालय का नाम आना चाहिए। विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ स्वच्छता, अनुशासन और बेहतर वातावरण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डीएम ने जोर दिया कि यह सामूहिक प्रयास से ही संभव होगा।
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि जिले के करीब 17 हजार विद्यालयों में फर्नीचर की जरूरत थी। अब लगभग आठ हजार विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने का काम शुरू हो गया है। इसका लक्ष्य है कि कोई भी विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर न हो। हर बच्चे को कक्षा में बैठने की बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में भी 25-25 लाख रुपये की लागत से काम हो रहा है। पीएम श्री विद्यालयों में भी भामाशाहों के सहयोग से 10-10 लाख रुपये की राशि से विभिन्न सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार पर चिंता
जिलाधिकारी ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार में आगरा का नाम न आने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि भविष्य में ऐसे हर पुरस्कार में आगरा के कम से कम एक विद्यालय का नाम आना चाहिए। विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ स्वच्छता, अनुशासन और बेहतर वातावरण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डीएम ने जोर दिया कि यह सामूहिक प्रयास से ही संभव होगा।