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रसीद बुक के नाम पर मंडी में हो रही हजारों की अवैध वसूली
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नवीन मंडी स्थल
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। शहर के आगरा रोड स्थित नवीन मंडी में रसीद बुक के नाम पर मंडी समिति का खेल उजागर हुआ है। यहां आढ़तियों से निर्धारित दर के बजाए कई गुने दामों की वसूली की जा रही है, लेकिन किसी को भी इसकी भनक नहीं है। मंडी समिति क्रय और विक्रय के लिए आढ़तियों को 6 आर और 9 आर नाम की दो रसीद बुक जारी करती है। मंडी में रोजाना लगभग 50 रसीद बुक खत्म हो जाती हैं। इन रसीद बुक के लिए 50 रुपये प्रति रसीद बुक का शुल्क निर्धारित है, लेकिन मंडी समिति इसके सौ नहीं दो सौ नहीं बल्कि पांच सौ रुपये वसूल करती है। सूत्रों के अनुसार ये वसूली सालों से चल रहा है।
आढ़तियों से पांच से सात सौ रुपये वसूले जाते
कुछ आढ़तियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिन आढ़तियों के पास पक्की दुकाने हैं, उन्हें तो तीन सौ या चार सौ में रसीद बुक मिल जाती है, लेकिन जिनके पास जगह नहीं और उन्होंने टिनशेड डाल रखे हैं, उन्हें रसीद बुक के लिए पांच से सात सौ रुपये तक देने पड़ते हैं। अधिक रुपये न देने पर मंडी समिति जगह खाली करानी की चेतावनी देती है। इसके चलते रुपये देने के बाद भी कोई आढ़ती अपना मुंह भी नहीं खोलता है।
अगर रोजाना 50 रसीद बुक के हिसाब से भी जोड़ें तो लगभग 20 हजार से 25 हजार रुपये का रोजाना गोलमाल हो रहा है। अधिकारियों को भी इसकी भनक नहीं है, लेकिन अब कुछ आढ़तियों ने मंडी समिति के इस खेल को उजागर करने की तैयारी कर ली है। वे जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर साक्ष्यों के साथ इसकी शिकायत करेंगे।
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इस काम आती है 6आर और 9आर
आढ़तियों को मंडी से दो रसीद बुक जारी की जाती हैं। इसमें 6 आर किसानों को देने के लिए होती है। इस रसीद के माध्यम से किसानों को आयकर से छूट मिल जाती है। वहीं, व्यापारियों के लिए 9 आर रसीद काटी जाती है। इस रसीद के बिना आढ़ती व्यापारी को माल नहीं बेच सकते हैं।
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आढ़तियों से पांच से सात सौ रुपये वसूले जाते
कुछ आढ़तियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिन आढ़तियों के पास पक्की दुकाने हैं, उन्हें तो तीन सौ या चार सौ में रसीद बुक मिल जाती है, लेकिन जिनके पास जगह नहीं और उन्होंने टिनशेड डाल रखे हैं, उन्हें रसीद बुक के लिए पांच से सात सौ रुपये तक देने पड़ते हैं। अधिक रुपये न देने पर मंडी समिति जगह खाली करानी की चेतावनी देती है। इसके चलते रुपये देने के बाद भी कोई आढ़ती अपना मुंह भी नहीं खोलता है।
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अगर रोजाना 50 रसीद बुक के हिसाब से भी जोड़ें तो लगभग 20 हजार से 25 हजार रुपये का रोजाना गोलमाल हो रहा है। अधिकारियों को भी इसकी भनक नहीं है, लेकिन अब कुछ आढ़तियों ने मंडी समिति के इस खेल को उजागर करने की तैयारी कर ली है। वे जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर साक्ष्यों के साथ इसकी शिकायत करेंगे।
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इस काम आती है 6आर और 9आर
आढ़तियों को मंडी से दो रसीद बुक जारी की जाती हैं। इसमें 6 आर किसानों को देने के लिए होती है। इस रसीद के माध्यम से किसानों को आयकर से छूट मिल जाती है। वहीं, व्यापारियों के लिए 9 आर रसीद काटी जाती है। इस रसीद के बिना आढ़ती व्यापारी को माल नहीं बेच सकते हैं।