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UP: 'जन्मे राधा-कृष्ण'...जन्माष्टमी पर अस्पतालों में गूंजी किलकारी, खुशियों से भर गया आंगन; मनाया जश्न
Sun, 17 Aug 2025 12:35 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 17 Aug 2025 12:35 PM IST
सार
जन्माष्टमी पर एक ओर कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी चल रही थी, तो कई परिवारों के लिए ये दिन खास बन गया। संतान की प्राप्ति से आंगन खुशियों से भर गया। शिशु के जन्म पर जमकर जश्न मनाया।
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जन्माष्टमी पर अस्पताल में जन्मे शिशु।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
संतान की प्राप्ति...परम सौभाग्य। दिन भी जन्माष्टमी। इस शुभ दिन को अस्पतालों में 371 बालक-बालिका जन्में, जिन्हें परिजन कृष्ण और राधा का स्वरूप मान रहे हैं। कुछ तो ऐसे दंपती हैं, जिन्हें कई साल बाद पहली बार माता-पिता बनने का सुख मिला है। इस खुशी से उनकी आंखें ही छलक आईं। बोले- भगवान ने तो हमारा घर खुशियों से भर दिया है। कई अभिभावकों ने शिशुओं के नाम कान्हा-राधिका रखने की बात भी कही।
जिले में 132 मेटरनिटी होम और 80 से अधिक सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें जन्माष्टमी के दिन 371 शिशुओं का जन्म हुआ है। लेडी लॉयल, एसएन मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में तो जन्माष्टमी के दिन संतान होने पर जश्न भी मनाया। महिला जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षिक डॉ. रचना गुप्ता ने बताया कि जन्माष्टमी पर प्रसव के लिए उत्साह रहता है। इसके लिए अस्पताल में तैयारी भी कर रखी थी।
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह ने बताया कि सिजेरियन के दो मामलों में तो दंपती ने जन्माष्टमी का ही दिन चुना। सीएमओ डाॅ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 371 शिशुओं का जन्म हुआ है। इसमें 193 बालक और 178 बालिकाएं हैं।
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जिले में 132 मेटरनिटी होम और 80 से अधिक सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें जन्माष्टमी के दिन 371 शिशुओं का जन्म हुआ है। लेडी लॉयल, एसएन मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में तो जन्माष्टमी के दिन संतान होने पर जश्न भी मनाया। महिला जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षिक डॉ. रचना गुप्ता ने बताया कि जन्माष्टमी पर प्रसव के लिए उत्साह रहता है। इसके लिए अस्पताल में तैयारी भी कर रखी थी।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह ने बताया कि सिजेरियन के दो मामलों में तो दंपती ने जन्माष्टमी का ही दिन चुना। सीएमओ डाॅ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 371 शिशुओं का जन्म हुआ है। इसमें 193 बालक और 178 बालिकाएं हैं।
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केस एक: पहली संतान, नाम रखा गोविंदा
शास्त्रीपुरम निवासी लवकेश सिंह ने बताया कि उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में बेटा पैदा हुआ है। जन्माष्टमी पर पहली बार पिता भी बना हूं। इससे खुशियां दोगुना हो गईं। मैं तो उसे गोविंदा पुकारने भी लगा हूं।
केस दो: 12 साल बाद जुड़वां बच्चे हुए
मथुरा निवासी मुकेश ने बताया कि 12 साल बाद संतान हुई है, भगवान की कृपा देखिए कि बेटा और बेटी दोनों एक साथ दे दिए। इतने वर्षों बाद दो संतान और जन्माष्टमी के दिन। मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं है।
केस तीन: सब बोल रहे राधिका जी आई हैं
नुनिहाई के अजय कुमार ने बताया कि एसएन में पत्नी ने जन्माष्टमी के दिन बिटिया को जन्म दिया है। मेरी ये पहली संतान है। अस्पताल में सभी कह रहे हैं कि राधा जी आई हैं।
शास्त्रीपुरम निवासी लवकेश सिंह ने बताया कि उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में बेटा पैदा हुआ है। जन्माष्टमी पर पहली बार पिता भी बना हूं। इससे खुशियां दोगुना हो गईं। मैं तो उसे गोविंदा पुकारने भी लगा हूं।
केस दो: 12 साल बाद जुड़वां बच्चे हुए
मथुरा निवासी मुकेश ने बताया कि 12 साल बाद संतान हुई है, भगवान की कृपा देखिए कि बेटा और बेटी दोनों एक साथ दे दिए। इतने वर्षों बाद दो संतान और जन्माष्टमी के दिन। मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं है।
केस तीन: सब बोल रहे राधिका जी आई हैं
नुनिहाई के अजय कुमार ने बताया कि एसएन में पत्नी ने जन्माष्टमी के दिन बिटिया को जन्म दिया है। मेरी ये पहली संतान है। अस्पताल में सभी कह रहे हैं कि राधा जी आई हैं।