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एयरपोर्ट के लिए बदला सिविल टर्मिनल का प्लान
एयरपोर्ट के लिए बदला सिविल टर्मिनल का प्लान
Updated Fri, 27 Oct 2017 12:30 PM IST
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एयरपोर्ट के लिए बदला सिविल टर्मिनल का प्लान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों राजी हैं। इसके वायदे भी किए जा रहे हैं लेकिन फिलहाल जमीन पर तैयारी सिविल टर्मिनल की ही चल रही है। इतना जरूर हुआ है कि इसका प्लान बदल दिया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर विस्तार देकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शक्ल दी जा सके। सिविल टर्मिनल 55 एकड़ जमीन में बन जाएगा। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण चल रहा है। वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 155 एकड़ और जमीन की जरूरत होगी।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण भविष्य का खाका खींच रहा है। पहले चरण में सिर्फ सिविल टर्मिनल तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में इसे विस्तार देकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना दिया जाएगा। कोई तोड़फोड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अलग से जमीन की जरूरत होगी। 55 एकड़ जमीन सिविल टर्मिनल के लिए मिल रही है। 155 एकड़ और मिल जाने पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए काम किया जा सकता है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रदेश शासन ने आगरा में एयरपोर्ट बनाने का एलान किया था। रविवार को आगरा आए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेश शर्मा ने भी स्पष्ट कर दिया था कि खेरिया एयरपोर्ट में प्रस्तावित सिविल टर्मिनल (एन्क्लेव) का ही विस्तार कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शक्ल दी जाएगी। तीन दिन पहले इस मुद्दे पर एयरपोर्ट अथारिटी मुख्यालय में बैठक भी हुई है। इसमें तय हुआ कि अब एयरपोर्ट की प्लानिंग दो फेज में होगी। सिविल टर्मिनल का निर्माण अब इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
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जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार
आगरा। एडीएम प्रशासन हरनाम सिंह का कहना है कि विस्तार के लिए जमीन धनौली और मलपुरा की ओर से ही ली जाएगी। पथौली की ओर का क्षेत्र एयरफोर्स के ही क्षेत्राधिकार में रहेगा। जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव पहले ही तैयार हो चुका है।
लेखपालों की हड़ताल ने रोका काम
आगरा। सिविल टर्मिनल के लिए प्रशासन धनौली, बल्हेरा और अभयपुरा गांव के काश्तकारों से जमीन खरीद रहा है। प्रशासन का दावा है कि अक्टूबर तक जरूरी करीब 24.3 हेक्टेयर जमीन एयरपोर्ट अथारिटी को हैंडओवर कर दी जाएगी लेकिन लेखपालों की हड़ताल ने खरीद की प्रक्रिया को रोक रखा है। एडीएम भूमि अध्याप्ति नगेंद्र प्रताप ने बताया कि खरीद प्रक्रिया लेखपालों की हड़ताल समाप्त होने के बाद ही शुरू हो पाएगी।
इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के लिए सिविल एन्क्लेव के लिए खरीदी गई जमीन पर्याप्त नहीं है। अभी और जमीन की जरूरत होगी। कुल कितनी जमीन चाहिए, इस मुद्दे पर मुख्यालय में बैठक हो चुकी है। सिविल एन्क्लेव और इंटरनेशनल एयरपोर्ट की योजना दो फेज में तैयार करने का निर्णय हुआ है।
- प्रभाकर मिश्रा, निदेशक एयरपोर्ट, आगरा
फ्लैश बैक
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले ही आगरा से शुरू हो गई थी फ्लाइट
आगरा। मुगलिया दौर में पूरे देश की और अंग्रेजी हुकूमत में यूनाइटेड प्राविंस की राजधानी रहे आगरा का दुर्भाग्य है कि कमजोर राजनीति के कारण आज उसे कभी केंद्र तो कभी राज्य सरकार से अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है, जबकि 77 साल पहले टाटा एयरलाइंस ने आगरा के आकाश को पहली बार विमान की उड़ान की आवाज से गुंजा दिया। 1939 में आगरा एयर स्ट्रिप को टाटा एयरलाइंस ने बनवाया। दो साल यानी 1941 तक कराची-मुंबई-ग्वालियर-आगरा तक टाटा एयरलाइंस ने पोस्टल एयर सर्विस चलाई। टाटा एयरलाइंस के कारण ही आगरा जयपुर रोड पर खेरिया एयरपोर्ट का चर्चित ‘टाटा गेट’ है।
दूसरे विश्व युद्ध से पहले सामरिक नहीं, बल्कि आगरा की अंग्रेजी हुकूमत में महत्वपूर्ण स्थिति के कारण विमान सेवा शुरू हो चुकी थी। विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी मित्र सेनाओं ने चाइना-बर्मा-इंडिया एयर कमांड आगरा की हवाई पट्टी से ही शुरू किया और इसे विस्तार दिया। रेल लाइन के नजदीक होने के कारण खेरिया हवाई अड्डे को प्राथमिकता दी गई थी। आजाद होने पर 15 अगस्त 1947 को ही आगरा एयरफोर्स स्टेशन स्थापित किया गया। 1963 में एयरफोर्स परिसर में पहली बार 14 एकड़ में सिविल एन्क्लेव स्थापित किया गया।
अब एक फ़्लाइट को भी तरसा आगरा
30 साल तक लगातार इंडियन एयरलाइंस आगरा को हवाई नक्शे से जोड़े रहा, लेकिन उसके बाद कमजोर राजनीति से आगरा का हक छीना जाता रहा। अब आगरा में एक भी शिड्यूल्ड फ्लाइट नहीं है। साल में छह महीने ही फ्लाइट आती है और वह भी सप्ताह में तीन दिन। सिविल एन्क्लेव तक के लिए चार साल में जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाया।
एयरपोर्ट के लिए शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
बाह। सर्वे का ड्रामा कर सैफई को चुनने और भदरौली को ठुकराने से नाराज बाह, पिनाहट क्षेत्र के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को रिटायर्ड शिक्षकों ने बाह के ब्लॉक मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर भदरौली का हक छीनने पर आंदोलन की चेतावनी दी। शिक्षक संगठन अध्यक्ष राज बहादुर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। अशोक दुबे ने कहा कि सैफई ही हर सुविधा ले जाना ठीक नहीं। संघर्ष समिति संयोजक अहिवरन सिंह परिहार ने कहा कि अब पूरे तहसील क्षेत्र में जनांदोलन चलेगा। रामानंद शर्मा, उमेंद्र सिंह चौहान, दुली चंद, रामतीर्थ पांडेय, रनवीर पचौरी, जोधाराम, रामसेवक, सुनील आदि मौजूद रहे।
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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण भविष्य का खाका खींच रहा है। पहले चरण में सिर्फ सिविल टर्मिनल तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में इसे विस्तार देकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना दिया जाएगा। कोई तोड़फोड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अलग से जमीन की जरूरत होगी। 55 एकड़ जमीन सिविल टर्मिनल के लिए मिल रही है। 155 एकड़ और मिल जाने पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए काम किया जा सकता है।
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गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रदेश शासन ने आगरा में एयरपोर्ट बनाने का एलान किया था। रविवार को आगरा आए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेश शर्मा ने भी स्पष्ट कर दिया था कि खेरिया एयरपोर्ट में प्रस्तावित सिविल टर्मिनल (एन्क्लेव) का ही विस्तार कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शक्ल दी जाएगी। तीन दिन पहले इस मुद्दे पर एयरपोर्ट अथारिटी मुख्यालय में बैठक भी हुई है। इसमें तय हुआ कि अब एयरपोर्ट की प्लानिंग दो फेज में होगी। सिविल टर्मिनल का निर्माण अब इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
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जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार
आगरा। एडीएम प्रशासन हरनाम सिंह का कहना है कि विस्तार के लिए जमीन धनौली और मलपुरा की ओर से ही ली जाएगी। पथौली की ओर का क्षेत्र एयरफोर्स के ही क्षेत्राधिकार में रहेगा। जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव पहले ही तैयार हो चुका है।
लेखपालों की हड़ताल ने रोका काम
आगरा। सिविल टर्मिनल के लिए प्रशासन धनौली, बल्हेरा और अभयपुरा गांव के काश्तकारों से जमीन खरीद रहा है। प्रशासन का दावा है कि अक्टूबर तक जरूरी करीब 24.3 हेक्टेयर जमीन एयरपोर्ट अथारिटी को हैंडओवर कर दी जाएगी लेकिन लेखपालों की हड़ताल ने खरीद की प्रक्रिया को रोक रखा है। एडीएम भूमि अध्याप्ति नगेंद्र प्रताप ने बताया कि खरीद प्रक्रिया लेखपालों की हड़ताल समाप्त होने के बाद ही शुरू हो पाएगी।
इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के लिए सिविल एन्क्लेव के लिए खरीदी गई जमीन पर्याप्त नहीं है। अभी और जमीन की जरूरत होगी। कुल कितनी जमीन चाहिए, इस मुद्दे पर मुख्यालय में बैठक हो चुकी है। सिविल एन्क्लेव और इंटरनेशनल एयरपोर्ट की योजना दो फेज में तैयार करने का निर्णय हुआ है।
- प्रभाकर मिश्रा, निदेशक एयरपोर्ट, आगरा
फ्लैश बैक
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले ही आगरा से शुरू हो गई थी फ्लाइट
आगरा। मुगलिया दौर में पूरे देश की और अंग्रेजी हुकूमत में यूनाइटेड प्राविंस की राजधानी रहे आगरा का दुर्भाग्य है कि कमजोर राजनीति के कारण आज उसे कभी केंद्र तो कभी राज्य सरकार से अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है, जबकि 77 साल पहले टाटा एयरलाइंस ने आगरा के आकाश को पहली बार विमान की उड़ान की आवाज से गुंजा दिया। 1939 में आगरा एयर स्ट्रिप को टाटा एयरलाइंस ने बनवाया। दो साल यानी 1941 तक कराची-मुंबई-ग्वालियर-आगरा तक टाटा एयरलाइंस ने पोस्टल एयर सर्विस चलाई। टाटा एयरलाइंस के कारण ही आगरा जयपुर रोड पर खेरिया एयरपोर्ट का चर्चित ‘टाटा गेट’ है।
दूसरे विश्व युद्ध से पहले सामरिक नहीं, बल्कि आगरा की अंग्रेजी हुकूमत में महत्वपूर्ण स्थिति के कारण विमान सेवा शुरू हो चुकी थी। विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी मित्र सेनाओं ने चाइना-बर्मा-इंडिया एयर कमांड आगरा की हवाई पट्टी से ही शुरू किया और इसे विस्तार दिया। रेल लाइन के नजदीक होने के कारण खेरिया हवाई अड्डे को प्राथमिकता दी गई थी। आजाद होने पर 15 अगस्त 1947 को ही आगरा एयरफोर्स स्टेशन स्थापित किया गया। 1963 में एयरफोर्स परिसर में पहली बार 14 एकड़ में सिविल एन्क्लेव स्थापित किया गया।
अब एक फ़्लाइट को भी तरसा आगरा
30 साल तक लगातार इंडियन एयरलाइंस आगरा को हवाई नक्शे से जोड़े रहा, लेकिन उसके बाद कमजोर राजनीति से आगरा का हक छीना जाता रहा। अब आगरा में एक भी शिड्यूल्ड फ्लाइट नहीं है। साल में छह महीने ही फ्लाइट आती है और वह भी सप्ताह में तीन दिन। सिविल एन्क्लेव तक के लिए चार साल में जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाया।
एयरपोर्ट के लिए शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
बाह। सर्वे का ड्रामा कर सैफई को चुनने और भदरौली को ठुकराने से नाराज बाह, पिनाहट क्षेत्र के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को रिटायर्ड शिक्षकों ने बाह के ब्लॉक मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर भदरौली का हक छीनने पर आंदोलन की चेतावनी दी। शिक्षक संगठन अध्यक्ष राज बहादुर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। अशोक दुबे ने कहा कि सैफई ही हर सुविधा ले जाना ठीक नहीं। संघर्ष समिति संयोजक अहिवरन सिंह परिहार ने कहा कि अब पूरे तहसील क्षेत्र में जनांदोलन चलेगा। रामानंद शर्मा, उमेंद्र सिंह चौहान, दुली चंद, रामतीर्थ पांडेय, रनवीर पचौरी, जोधाराम, रामसेवक, सुनील आदि मौजूद रहे।