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यूपी न्यूज: एक हजार साल पुराना चंदवार किला...क्या जानते हैं इसकी कहानी? अब सरकार सहेजेगी ऐतिहासिक विरासत
Sat, 29 Aug 2026 09:58 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उलाजा न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उलाजा न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 29 Aug 2026 09:58 AM IST
सार
यमुना किनारे स्थित ऐतिहासिक चंदवार किले के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने ₹1.50 करोड़ मंजूर किए हैं। करीब 1000 साल पुराने किले का अब मुख्य प्रवेश द्वार ही बचा है, जो जर्जर हालत में है। संरक्षण कार्य के तहत प्रवेश द्वार को सुरक्षित करने के साथ चहारदीवारी बनाई जाएगी, ताकि संरक्षित भूमि को अवैध कब्जों से बचाया जा सके।
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चंदवार किला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यमुना नदी के किनारे फतेहाबाद से सटे चंदवार के किले का 500 साल में पहली बार संरक्षण किया जाएगा। राज्य पुरातत्व विभाग चंदवार के किले के संरक्षण पर 1.50 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एक हजार साल पहले विक्रम संवत 1052 में चौहान वंशीय राजपूत राजा चंद्रसेन ने चंदवार की स्थापना की थी। इसके किले का अब केवल मुख्य प्रवेश द्वार ही बचा हुआ है, जो जर्जर हालत में है। इसकी मेहराब और दीवारें गिरने के कगार पर हैं। तीन साल पहले ही राज्य सरकार ने चंदवार के किले को संरक्षित घोषित किया है।
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राजा जयचंद और मोहम्मद गोरी के बीच हुए युद्ध से इतिहास में चर्चित चंदवार के खंडहरों और मिट्टी के टीलों, पेड़ और कुओं में एक हजार साल पुरानी जैन प्रतिमाएं यहां से निकलती रहीं हैं, जिसने इतिहास को नई दिशा दी। चंदवार का किला सदियों से इतिहास को समेटे है, जिसे पर्यटन विकास की योजनाओं के साथ संरक्षित भी किया जा रहा है। बजट मंजूर होने के साथ ही यहां बरसात खत्म होते ही संरक्षण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पूर्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उप अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. आरके सिंह ने चंदवार के टीलों को संरक्षित करने के साथ उत्खनन का प्रस्ताव तैयार किया था लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली।
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राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी ने बताया कि चंदवार का किला ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके किले को संरक्षित करने के लिए 1.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे किले का मुख्य प्रवेश द्वार संरक्षित करने के साथ चहारदीवारी का निर्माण किया जाएगा ताकि संरक्षित की गई 0.112 हेक्टेयर जमीन भी अवैध कब्जों से सुरक्षित रह सके।
इसलिए महत्वपूर्ण है चंदवार
- 10 वीं सदी में राजपूत राजा चंद्रसेन ने स्थापित किया
- 10वीं और 11 वीं सदी की जैन प्रतिमाओं का गढ़ है
- वर्ष 1194 में राजा जयचंद और मोहम्मद गोरी के बीच यहीं युद्ध हुआ
- भगवान चंद्रप्रभु की स्फटिक मणि की पद्मासन प्रतिमा यहीं मिली
- वर्ष 1397 में धनपाल ने काव्य ग्रंथ बाहुबली चरित की रचना की
- वर्ष 1018 में महमूद गजनवी और राजा चंद्रपाल के बीच युद्ध हुआ
- वर्ष 1197 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने चंदवार पर आक्रमण किया
- वर्ष 1301 में अलाउद्दीन खिलजी ने भी चंदवार पर हमला किया
- 10 वीं से 16 वीं शताब्दी तक हर आक्रांता ने चंदवार पर आक्रमण किया
- वर्ष 1526 में मुगल बादशाह बाबर वैभव गाथा सुनकर तीन बार चंदवार पहुंचा
- यमुना किनारे बटेश्वर से शुरू 101 मंदिरों की शृंखला चंदवार तक पहुंचती है
- वर्ष 1632 में ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों ने इसे बेहतरीन शहर बताया।
- 10 वीं सदी में राजपूत राजा चंद्रसेन ने स्थापित किया
- 10वीं और 11 वीं सदी की जैन प्रतिमाओं का गढ़ है
- वर्ष 1194 में राजा जयचंद और मोहम्मद गोरी के बीच यहीं युद्ध हुआ
- भगवान चंद्रप्रभु की स्फटिक मणि की पद्मासन प्रतिमा यहीं मिली
- वर्ष 1397 में धनपाल ने काव्य ग्रंथ बाहुबली चरित की रचना की
- वर्ष 1018 में महमूद गजनवी और राजा चंद्रपाल के बीच युद्ध हुआ
- वर्ष 1197 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने चंदवार पर आक्रमण किया
- वर्ष 1301 में अलाउद्दीन खिलजी ने भी चंदवार पर हमला किया
- 10 वीं से 16 वीं शताब्दी तक हर आक्रांता ने चंदवार पर आक्रमण किया
- वर्ष 1526 में मुगल बादशाह बाबर वैभव गाथा सुनकर तीन बार चंदवार पहुंचा
- यमुना किनारे बटेश्वर से शुरू 101 मंदिरों की शृंखला चंदवार तक पहुंचती है
- वर्ष 1632 में ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों ने इसे बेहतरीन शहर बताया।