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खतरे में पड़ी उफनाई चंबल के पानी में फंसे घड़ियाल शिशुओं की जिंदगी

Tue, 03 Aug 2021 01:33 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 03 Aug 2021 01:33 AM IST
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Chambal floods kill 40 percent of all gharial's babies
चंबल के पानी में फंसे घडि़याल शिशुओं की जिंदगी। संवाद - फोटो : Agra Dehat
बाह। एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्च्युरी में शामिल चंबल नदी में आए उफान से घड़ियाल शिशुओं की जिंदगी फिर खतरे में पड़ गई है। चंबल की बाढ़ में सबसे अधिक शिशुओं की मौत होती है। आकलन है कि करीब 40 फीसदी शिशु हर वर्ष बाढ़ में मारे जाते हैं। कुछ मिट्टी युक्त गंदे पानी से अंधे होकर मगरमच्छ और कछुए की कटहवा प्रजाति का निवाला बन जाते हैं। अन्य पचनदा से यमुना में पहुंच जाते हैं और वहां अनुकूल परिस्थितियां नहीं होने पर उनकी मौत हो जाती है।
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इस साल चंबल सेंक्च्युरी की बाह रेंज में हैचिंग से 2,800 घड़ियाल शिशुओं का जन्म हुआ। पिछले साल 2000 शिशु जन्मे थे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 2 से 5 फीसदी शिशु ही जीवित रह पाते हैं। शिशुओं की मौत का एक मुख्य कारण चंबल नदी में हर साल आने वाली बाढ़ है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि इस दौरान पानी में गंदगी और मिट्टी से घड़ियाल शिशु अंधे हो जाते हैं और अपना बचाव नहीं कर पाते। मगरमच्छ और कटहवा कछुआ उनका शिकार कर लेते हं।
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टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) के प्रोजेक्ट अफसर रोहित झा ने बताया कि पानी के साथ बड़ी संख्या में घड़ियाल शिशु बहकर पचनदा से होते यमुना नदी में पहुंच जाते है। जहां पर इनका जीवन बचना मुश्किल हो जाता है। हालांकि उफान में बहे वयस्क घड़ियाल ठिकाने पर लौट आते हैं।
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उफान के साथ बहे शिशु यदि चंबल के खादर में पहुंच जाते हैं तो इनके बचने की संभावना बढ़ जाती है। नदी का जलस्तर सामान्य होने वन विभाग की टीम राजस्थान से लगे रेहा से लेकर उदयपुर खुर्द तक इनको तलाश कर नदी में पहुंचाती है। ग्रामीणों को घड़ियाल, मगरमच्छ के खादरों में दिखने पर विभाग को सूचना देने के लिए जागरूक किया जाता है।

चंबल के उफान का वयस्क घड़ियाल, डॉल्फिन और मगरमच्छ की संख्या पर असर नहीं पड़ता। डॉल्फिन अपना स्थान नहीं छोड़ती। मगरमच्छ और घड़ियाल अपने पुराने ठिकाने पर वापस लौट आते हैं।
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