फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   chaitanya mahaprabhu charan paduka reached in chandroday temple vrindavan

बंगाल से वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर लाई गईं चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाएं, दर्शन का मौका ना चूकें

Tue, 22 Oct 2019 12:08 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा) Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 22 Oct 2019 12:08 PM IST
विज्ञापन
chaitanya mahaprabhu charan paduka reached in chandroday temple vrindavan
चंद्रोदय मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाओं का महाभिषेक करते गौड़ीय संत - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाएं पहुंच गई हैं। चरण पादुकाओं को पश्चिम बंगाल के नवद्वीप से सोमवार को वृंदावन लाया गया। यहां चरण पादुका का भव्य स्वागत कर उन्हें मंदिर प्रांगण में स्थापित कर महाभिषेक किया गया।
विज्ञापन


चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाओं का स्वागत संस्था प्रमुख मधु पंडित दास, प्रदेश मंत्री उदयभान सिंह व तीर्थनगरी के संतजनों ने किया। संतों द्वारा संकीर्तन करते हुए चरण पादुकाओं को पालकी द्वारा मंदिर प्रांगण में लाया गया। जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पादुकाओं का पंचगव्य व पंचामृत से महाभिषेक किया गया। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- अहोई अष्टमी: जिन बेटों ने नाता तोड़ा, उनकी दीर्घायु के लिए 'तप' कर रहीं विधवा माताएं
विज्ञापन
विज्ञापन


दामोदराष्टकम के गायन के बीच चैतन्य महाप्रभु के समक्ष दीपदान किया गया। चैतन्य महाप्रभु के 108 नामों का उच्चारण करते हुए चरण पादुकाओं का स्वर्ण पुष्प व पुष्प अर्पित कर पूजन किया गया। कार्यक्रम में मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास, फूलडोल बिहारी दास, नवलगिरी आदि संत मौजूद रहे।

नवद्वीप के धामेश्वर मंदिर से लाई गईं हैं पादुकाएं

संस्था प्रमुख मधु पंडित दास ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु की पादुकाएं नवद्वीप स्थित धामेश्वर मंदिर में विराजमान रहती हैं। ये पादुकाएं संन्यास ग्रहण करने से पूर्व चैतन्य महाप्रभु ने अपनी पत्नी देवी विष्णुप्रिया को भेंट की थीं।

देवी विष्णुप्रिया ने जीवन भर इन पादुकाओं की सेवा की थी। चैतन्य महाप्रभु 504 वर्ष पहले वृंदावन आए थे। अब बांकेबिहारी की नगरी में उनकी पादुकाएं पहुंची हैं। चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाएं 25 अक्टूबर की शाम को नवद्वीप पश्चिम बंगाल वापस लौट जाएंगी।

यह है चंद्रोदय मंदिर की खासियत
वृंदावन में बनने वाला चंद्रोदय मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। यह मंदिर कुतुब मीनार से भी तीन गुना उंचा होगा। इतना ही नहीं, इस मंदिर की नींव दुनिया की सबसे उंची इमारत बुर्ज खलीफा से भी तीन गुना गहरी होगी।

वृंदावन चन्द्रोदय मंदिर की ऊंचाई 700 फुट या 210 मीटर होगी। दिल्ली में 72.5 मीटर के कुतुब मीनार से इस इसकी ऊंचाई 3 गुना ज्यादा होगी, जिस के कारण पूर्ण होने पर, यह विश्व का सबसे ऊंचा धर्मालय बन जाएगा।
 

इसके गगनचुम्बी शिखर के अलावा इस मंदिर की दूसरी विशेष आकर्षण यह है की मंदिर परिसर में 26 एकड़ के भूभाग पर चारों ओर 12 कृत्रिम वन बनाए जाएंगे।

मंदिर के वन क्षेत्र को कुछ वैसा ही बनाने का प्रयास किया जाएगा जैसा विवरण कृष्ण साहित्य में मिलता है। पूरी तरह से तैयार होने के बाद यह मंदिर कृष्ण भक्तों की वृंदावन की कल्पना को पूरी तरह से साकार करेगा।

मंदिर की सबसे ऊंची मंजिला का नाम ब्रज मंडल दर्शन रखा गया है। यहां से ब्रज के 76 धार्मिक स्थानों और ताजमहल तक को दूरबीन से देखा जा सकेगा। पूरे मंदिर का भ्रमण करने में श्रद्धालुओं को तीन से चार दिन लगेंगे।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां क्लिक करें 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed