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ताजमहल को तेजोमहालय बताने वाले पक्ष की केंद्र सरकार ने ठुकरा दी ये डिमांड, कही बड़ी बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 31 Mar 2018 11:48 AM IST
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ताज महल
- फोटो : SELF
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तेजोमहालय बनाम ताजमहल केस में केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में एक और बयान दिया गया है। इसमें कहा गया है कि ताज के बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराने का कोई औचित्य नहीं है।
यह मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा है। दूसरे पक्ष ने इसके तेजोमहालय होने के संबंध में कोर्ट में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।
केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा कि ताजमहल के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर जारी है। इसके बाद इसके बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराए जाने का न तो कोई औचित्य है और न ही यह संभव है।
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यह मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा है। दूसरे पक्ष ने इसके तेजोमहालय होने के संबंध में कोर्ट में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।
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केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा कि ताजमहल के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर जारी है। इसके बाद इसके बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराए जाने का न तो कोई औचित्य है और न ही यह संभव है।
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अगर तेजोमहालय पक्ष के पास कोई साक्ष्य है, तो वह कोर्ट के सामने प्रस्तुत करे। यह जवाब उस याचना के संबंध में दिया गया जिसमें कहा गया था कि ताजमहल के बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाए तो इसके तेजोमहालय यानि मंदिर होने का सच सामने आ जाएगा।
उधर, तेजोमहालय पक्ष के अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने लोहामंडी के नया बांस निवासी इफ्तिखार खान के पत्र पर आपत्ति की। इस पत्र में ताजमहल को सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए वक्फ बोर्ड का रजिस्टर तलब करने की याचना की गई थी।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने इस याचना पर अपना जवाब देने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख नियत की है।
उधर, तेजोमहालय पक्ष के अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने लोहामंडी के नया बांस निवासी इफ्तिखार खान के पत्र पर आपत्ति की। इस पत्र में ताजमहल को सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए वक्फ बोर्ड का रजिस्टर तलब करने की याचना की गई थी।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने इस याचना पर अपना जवाब देने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख नियत की है।