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Agra News: बोगस फर्मों से 25 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी, केस दर्ज

Thu, 21 Aug 2025 11:12 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Thu, 21 Aug 2025 11:12 PM IST
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Case of GST evasion of more than 25 crores registered against bogus firms
मैनपुरी। जीएसटी की स्पेशल इंटेलिजेंस विंग (एसआईबी) ने दो बोगस फर्मों के रैकेट का खुलासा किया है। इनके जरिये 25 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी क्लेम कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है। तीन माह चली जांच के बाद शहर कोतवाली पुलिस को इन दोनों बोगस फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज कराए गए हैं। दोनों फर्म कुरावली थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग गांव के पते पर पंजीकृत हैं। एसआइवी के उपायुक्त संजीव कुमार की ओर से शहर कोतवाली में दर्ज मुकदमे के अनुसार कुरावली के नगला सूपा निवासी 18 वर्षीय प्रियांशु पुत्र अशोक कुमार के नाम से पीके ट्रेडर्स नाम की फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया। जांच में सामने आया कि न तो इस पते पर कोई फर्म मौजूद है और न ही प्रियांशु नाम का कोई व्यक्ति रहता है। इस बोगस फर्म के माध्यम से दिल्ली की दस से अधिक, कानपुर की एक, लखनऊ की सात फर्मों को खिलौने, कपड़े, लोहे के उत्पाद व अन्य माल की बिक्री दर्शाई गई। विभिन्न कंपनियों ने 21 करोड़ 32 लाख से अधिक का जीएसटी क्लेम किया। राज्य कर अधिकारी पंकज सिंह द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक कोमल रतूरी पुत्र राकेश रतूरी के नाम से एमके एंटरप्राइजेज का पंजीकरण नगला सूपा, बेलाहार, कुरावली के पते पर कराया गया। इस फर्म ने बोगस बिक्री दिखाकर जीएसटी पोर्टल पर बिल अपलोड किए। इनके आधार पर विभिन्न कंपनियों ने 5 करोड़ 92 लाख से अधिक का बोगस क्लेम किया। इस मामले में भी जांच में पता चला कि यह फर्म और इसका संचालक दोनों ही अस्तित्व में नहीं हैं।
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देशव्यापी नेटवर्क की आशंका
इन बोगस फर्मों के जरिये देश के अलग-अलग राज्यों की कंपनियों ने गलत तरीके से क्लेम किए हैं। एसआईवी को संदेह है कि यह एक बड़ा संगठित गिरोह है, जो बोगस कंपनियों के माध्यम से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है। अब विभाग उन कंपनियों की भी जांच कर रहा है, जिन्होंने इन बोगस फर्मों से फर्जी बिल लिए थे।
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यह होती हैं बोगस फर्म
वित्तीय सलाहकार एवं जीएसटी अधिवक्ता प्रखर दीक्षित ने बताया कि बोगस वो फर्म होती हैं जो टैक्स चोरी के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, जिसे वस्तु या सेवा में कारोबार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। कागजों में उस तरह की सेवाओं और वस्तुओं की खरीद-बिक्री दिखाई जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे फर्मों द्वारा वस्तु और सेवा का कोई काम नहीं किया जाता है। कागजों में कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया जाता है।
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बयान--
पुलिस ने दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
- अरुण कुमार सिंह, एसपी सिटी
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