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आगरा: एसएन मेडिकल कॉलेज में मानसिक और टीबी रोगियों को मिलेगी 15 दिन की दवाई
Mon, 19 Oct 2020 03:43 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 19 Oct 2020 03:43 PM IST
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एसएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
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एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग और वक्ष एवं क्षय रोग के मरीजों को एक बार में 15 दिन की दवा दी जाएगी। कैंसर के मरीजों को पूर्व की तरह एक महीने और अन्य विभाग के मरीजों को सात दिन की दवा दी जाएगी। ओपीडी में मरीजों की भीड़ कम करने के लिए यह सुविधा की जाएगी।
दो नवंबर से शुरू हो रही सामान्य ओपीडी के लिए सोमवार को प्राचार्य डॉ. संजय काला ने ओपीडी प्रभारी डॉ. यतेंद्र चाहर और सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर एक बार में दी जाने वाली दवाओं को दोगुने दिन का किया है। इसमें मानसिक और वक्ष रोग विभाग में एक बार सात दिन की दवा दी जाती थी।
बाल रोग, स्त्री रोग, सर्जरी, हड्डी रोग, त्वचा रोग, दंत रोग, नेत्र रोग के मरीजों को तीन दिन की दवा दी जाती थी। प्रवेश और निकासी की व्यवस्था में बदलाव करते हुए फव्वारा रोड से प्रवेश और नेत्र रोग विभाग की ओर से निकासी होगी। ओपीडी का समय अब तीन घंटे ही रहेगा। सुबह नौ से 12 बजे तक ही मरीज देखे जाएंगे। ओपीडी में शीशे का चैंबर और बेरीकेडिंग का कार्य शुरू हो गया है।
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दो नवंबर से शुरू हो रही सामान्य ओपीडी के लिए सोमवार को प्राचार्य डॉ. संजय काला ने ओपीडी प्रभारी डॉ. यतेंद्र चाहर और सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर एक बार में दी जाने वाली दवाओं को दोगुने दिन का किया है। इसमें मानसिक और वक्ष रोग विभाग में एक बार सात दिन की दवा दी जाती थी।
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बाल रोग, स्त्री रोग, सर्जरी, हड्डी रोग, त्वचा रोग, दंत रोग, नेत्र रोग के मरीजों को तीन दिन की दवा दी जाती थी। प्रवेश और निकासी की व्यवस्था में बदलाव करते हुए फव्वारा रोड से प्रवेश और नेत्र रोग विभाग की ओर से निकासी होगी। ओपीडी का समय अब तीन घंटे ही रहेगा। सुबह नौ से 12 बजे तक ही मरीज देखे जाएंगे। ओपीडी में शीशे का चैंबर और बेरीकेडिंग का कार्य शुरू हो गया है।
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कोरोना वायरस के कारण भीड़ कम करने के लिए मरीजों की दवाइयां अब दुगने दिन की गई है। पंजीकरण के बाद ही मरीज देखे जाएंगे। चिकित्सक और स्टाफ की ड्यूटी चार्ट भी बनाया जा रहा है। डॉ. सजय काला, प्राचार्य
एक बार पंजीकरण पर एक ही विभाग के देखेंगे मरीज
जिस बीमारी के इलाज के लिए पंजीकरण कराया है, उसी का इलाज पा सकेंगे। किसी दूसरी मर्ज के लिए दोबारा से पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण के मरीज नहीं देखे जाएंगे। टेलीमेडिसिन पर फोन करने के बाद उन्हें कोडवर्ड दिया जाएगा, जिसकी सूची तय दिन गेट स्क्रीनिंग टीम के पास रहेगी। मिलान कराने पर ही मरीज अंदर आ सकेगा।
मरीजों को दिए जाएंगे पांच से दस मिनट
मरीजों को देखने के लिए समय तय कर दिया है। दंत रोग में एक मरीज को दस मिनट, मेडिसिन-त्वचा रोग में पांच मिनट और बाल रोग, स्त्री रोग, हड्डी रोग में लगभग छह मिनट का समय दिया जाएगा। तय समय और दिन पर मरीज नहीं आता है तो उसे नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा।
एक बार पंजीकरण पर एक ही विभाग के देखेंगे मरीज
जिस बीमारी के इलाज के लिए पंजीकरण कराया है, उसी का इलाज पा सकेंगे। किसी दूसरी मर्ज के लिए दोबारा से पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण के मरीज नहीं देखे जाएंगे। टेलीमेडिसिन पर फोन करने के बाद उन्हें कोडवर्ड दिया जाएगा, जिसकी सूची तय दिन गेट स्क्रीनिंग टीम के पास रहेगी। मिलान कराने पर ही मरीज अंदर आ सकेगा।
मरीजों को दिए जाएंगे पांच से दस मिनट
मरीजों को देखने के लिए समय तय कर दिया है। दंत रोग में एक मरीज को दस मिनट, मेडिसिन-त्वचा रोग में पांच मिनट और बाल रोग, स्त्री रोग, हड्डी रोग में लगभग छह मिनट का समय दिया जाएगा। तय समय और दिन पर मरीज नहीं आता है तो उसे नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा।