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UP: एयरफोर्स में 40 साल बाद शामिल हो रहा सी-295, जानें खासियत...दोगुनी हो जाएगी भारतीय वायुसेना की ताकत
Tue, 28 Jan 2025 10:43 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 28 Jan 2025 10:43 AM IST
सार
सैन्य परिवहन में एएन-32 के बाद सी-295 एयरफोर्स में शामिल होने जा रहा है। इस विमान के आने के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत दोगुनी हो जाएगी। जानें क्या हैं इसकी खासियत...
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सी-295
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सैन्य परिवहन और आपदा राहत के लिए एयरफोर्स में 40 साल पहले एंटोनोव-32 यानी एएन-32 विमान शामिल हुए थे। भारतीय वायुसेना के आगरा एयरफोर्स स्टेशन को एएन-32 विमानों का बेस स्टेशन बनाया गया था। अब नई पीढ़ी के उन्नत स्पेन में निर्मित सी-295 विमान भारतीय वायु सेना का हिस्सा बन रहे हैं। मंगलवार को एयरफोर्स के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में सी-295 विमानों का बेड़ा आगरा एयरफोर्स स्टेशन में शामिल होगा।
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वर्ष 1984-85 में तत्कालीन सोवियत संघ के यूक्रेन से एंटोनोव-32 विमानों की खरीद की गई थी। यह विमान सैन्य परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए। भारतीय वायुसेना ने 125 विमानों की खरीद की थी, जिनमें से लगभग 100 ही अब सेवा में हैं। इन विमानों की खरीद के 40 साल बाद अब स्पेन के सेविले में निर्मित सी-295 विमानों का बेड़ा भारतीय वायुसेना में शामिल हो रहा है। मंगलवार को आगरा एयरफोर्स स्टेशन पर समारोह हो रहा है, जिसमें यह विमान शामिल होंगे। स्पेन की कंपनी एयरबस ने टाटा के साथ करार किया है।
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हर साल 12 विमानों का बेड़ा होगा शामिल
सैन्य परिवहन, चिकित्सा निकासी, आपदा राहत जैसे मिशन के साथ पैराड्रॉपिंग में भी सी-295 विमानों का इस्तेमाल एयरफोर्स करेगा। सी-295 के 56 विमान खरीदे जाएंगे। इनमें 16 विमान स्पेन में निर्मित हो रहे हैं, जबकि बाकी 40 विमान टाटा के वडोदरा परिसर में बनाए जाएंगे। हर साल 12 विमानों का बेड़ा वायुसेना में शामिल होगा। यह विमान 71 पैराट्रूपर्स को ले जा सकता है, जबकि एएन-32 की क्षमता केवल 42 पैराट्रूपर्स की है। आगरा में तीन माह पहले सी-295 विमानों के लिए फुल मोशल सिम्युलेटर पर पायलटों का प्रशिक्षण शुरू किया गया था। उन्हें टेक्निकल शिफ्ट, पैराड्रॉपिंग, पैराट्रूपिंग, चिकित्सा निकासी, आपदा राहत जैसे मिशन के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
सैन्य परिवहन, चिकित्सा निकासी, आपदा राहत जैसे मिशन के साथ पैराड्रॉपिंग में भी सी-295 विमानों का इस्तेमाल एयरफोर्स करेगा। सी-295 के 56 विमान खरीदे जाएंगे। इनमें 16 विमान स्पेन में निर्मित हो रहे हैं, जबकि बाकी 40 विमान टाटा के वडोदरा परिसर में बनाए जाएंगे। हर साल 12 विमानों का बेड़ा वायुसेना में शामिल होगा। यह विमान 71 पैराट्रूपर्स को ले जा सकता है, जबकि एएन-32 की क्षमता केवल 42 पैराट्रूपर्स की है। आगरा में तीन माह पहले सी-295 विमानों के लिए फुल मोशल सिम्युलेटर पर पायलटों का प्रशिक्षण शुरू किया गया था। उन्हें टेक्निकल शिफ्ट, पैराड्रॉपिंग, पैराट्रूपिंग, चिकित्सा निकासी, आपदा राहत जैसे मिशन के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
हादसों के साथ एएन-32 का जुड़ा रहा नाम
वर्ष 1984-85 में तत्कालीन सोवियत संघ से खरीदे गए एएन-32 विमानों का हादसों के साथ नाम जुड़ा ही रहा। आगरा में बेस स्टेशन बनने के महज दो साल में एएन-32 वर्ष 1986 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अरब सागर में गायब होने के साथ लद्दाख, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश आदि जगहों पर लगातार दुर्घटनाओं से इन पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन इनका संचालन जारी रहा। अब सी-295 विमान सैन्य परिवहन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
वर्ष 1984-85 में तत्कालीन सोवियत संघ से खरीदे गए एएन-32 विमानों का हादसों के साथ नाम जुड़ा ही रहा। आगरा में बेस स्टेशन बनने के महज दो साल में एएन-32 वर्ष 1986 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अरब सागर में गायब होने के साथ लद्दाख, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश आदि जगहों पर लगातार दुर्घटनाओं से इन पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन इनका संचालन जारी रहा। अब सी-295 विमान सैन्य परिवहन की जिम्मेदारी संभालेंगे।