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Agra News: डॉक्टर को दिखाने से पहले 70 फीसदी खुद ही लेते दवाएं, ओवरडोज से मर्ज बिगड़ी

Tue, 07 Oct 2025 02:31 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Oct 2025 02:31 AM IST
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By December next year, you will be able to travel by metro for 30 km.
आगरा। बदले मौसम से बुखार-खांसी, जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मेडिसिन और बाल रोग विभाग में हर दूसरे को ये परेशानी मिल रही है। डॉॅक्टर बताते हैं कि इसमें से 60-70 फीसदी मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, पेट दर्द पर खुद ही सिरप, एंटीबायोटिक दवा ले लेते हैं। इससे मर्ज बिगड़ने पर दाेगुना से अधिक समय में ठीक होती हैं। दुष्प्रभाव भी मिलते हैं।
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मेडिसिन विभाग के डॉ. अजित चाहर ने बताया कि खांसी, जुकाम, सिर-पेट में दर्द के मरीज 70 फीसदी डॉक्टर को दिखाने से पहले ही मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा-सिरप ले लेते हैं। दर्द निवारक से पेट में अल्सर, किडनी-लिवर की दिक्कत बन रही हैं। एंटीबायोटिक बेअसर होने लगती हैं। सामान्य बुखार, खांसी में तो एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं है।
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बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि खांसी-सिरप देने से पहले बच्चे का वजन, उम्र को देखते डोज तय करते हैं। खांसी अलग-अलग तरह की होती है और इसकी दवा-सिरप अलग होता है। कई बार कफ सिरप की जरूरत भी नहीं पड़ती। ओपीडी में 40-45 फीसदी ऐेसे बच्चे हैं, जिनको परिजन खुद या फिर झोलाछाप से इलाज करा चुके होते हैं। इससे परेशानी बढ़ जाने से वायरल बुखार को ठीक होने में 7-10 दिन का समय लगता है। खांसी दो सप्ताह तक रह सकती है।
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पर्चा-दवा और जांच में लगे तीन घंटे, मरीजों ने झेली मारामारी
- सोमवार को एसएन में 3732 मरीज आए। हॉल ठसाठस भर गया। सबसे ज्यादा सुबह 9 से 12 बजे तक मारामारी रही। पर्चा, दवा और जांच कराने में मरीजों को तीन घंटे का समय लगा। लाइन में खड़े होने से बुजुर्ग मरीजों की हालत खराब हो गई। सबसे ज्यादा मेडिसिन विभाग में 761, हड्डी रोग में 366, त्वचा रोग में 350 और वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में 342 मरीज आए। मलपुरा निवासी राहुल कुशवाहा ने बताया कि घुटनों में दर्द की शिकायत पर पिता को हड्डी रोग विभाग में दिखाने लाया। पर्चा बनवाने, डाॅक्टर को दिखाने और फिर दवा लेने में तीन घंटा से अधिक समय लग गया।
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ये दिए सुझाव:
- वायरल बुखार में पैरासिटामॉल लें, एंटीबायोटिक-कफ सिरप न लें।
- डॉक्टर के परामर्श से ही दवाएं लें। दो साल तक के बच्चे को सिरप न दें।
- ठंडा पानी पीने और खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री न खाएं।
- सांस-अस्थमा मरीज अपनी दवाएं बंद न करें।
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