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Agra: बुलडोजर सड़क चिह्नित कर ढहाएगा कब्जा, पुनर्वास तक डीएम-कमिश्नर के बंगलों में रहेंगे विस्थापित

Tue, 05 May 2026 03:00 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Tue, 05 May 2026 03:00 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में पिक एंड चूज की नीति नहीं चलेगी। कार्रवाई सड़क के दोनों तरफ समान रूप से होगी।

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Bulldozer will mark the road and demolish the encroachment displaced people will stay in the bungalows
राजा मंडी बाजार स्थित लाभचन्द्र मार्केट में पट्टे की भूमि पर खड़े होटल धर्मलोक और चंद्रलोक स्त्

विस्तार

आगरा के राजामंडी बाजार स्थित लाभचंद्र मार्केट मामले में अवमानना याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़क को चिह्नित कर अवैध कब्जों व अतिक्रमण को ध्वस्त किया जाए। विस्थापित दुकानदारों के लिए प्रशासन पुनर्वास की योजना बनाए। यदि ऐसा नहीं किया तो विस्थापित दुकानदारों के परिवारों को डीएम और कमिश्नर के बंगलों में रखा जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने 10 फरवरी को डीएम को राजामंडी बाजार स्थित लाभचंद्र मार्केट में सड़क चिह्नित कर अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। 14 दिन का समय दिया था लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। जिस पर याचिकाकर्ता अमरजोत सूरी ने प्रमुख सचिव नगर विकास, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगरायुक्त सहित आठ अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की।
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिकारियों की तरफ से पैरवी के लिए अटॉर्नी जनरल के. वैंकट रमनी पेश हुए। उन्होंने अदालत से कहा कि उन्होंने प्रकरण को समझ लिया है। उन्होंने कोर्ट से कार्रवाई के लिए मोहलत मांगी। पीठ ने कहा कि सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने की राह में कोई बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने न केवल अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश दिया बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी ध्यान में रखा।
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सुनवाई के दौरान जब लाभचंद्र मार्केट क्षेत्र की रिपोर्ट और तस्वीरें अदालत के समक्ष पेश की गईं, तो पीठ ने पक्षपात की संभावनाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में पिक एंड चूज की नीति नहीं चलेगी। कार्रवाई सड़क के दोनों तरफ समान रूप से होगी।

सड़क के दोनों तरफ मार्केट में होटल चंद्रलोक और धर्मलोक खड़े हुए हैं। अदालत में नगर निगम की तरफ से सहायक नगरायुक्त श्रद्धा पांडेय पेश हुईं। बेंच ने कहा कि अदालत के सामने पेश होने की अपनी गंभीरता होती है। मैंने तस्वीरें देखी हैं, अतिक्रमण दोनों तरफ से हटाया जाना चाहिए ताकि न्याय होता दिखे।

अफसरों से कोर्ट ने कहा हम आपके साथ
लाभचंद्र मार्केट में अतिक्रमण और पक्के निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई से कतरा रहे अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। पीठ ने अधिकारियों को निडर होकर आदेश का पालन कराने के लिए कहा। कहा कि आप नियमानुसार अपना काम करिए, अदालत आपके साथ है। हम आपको पूरा आश्वासन देते हैं कि कर्तव्य पालन में आपको किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। कोर्ट ने प्रशासन को जमीनी सर्वेक्षण और विस्थापितों के पुनर्वास की विस्तृत योजना तैयार करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।


पुनर्वास की टिप्पणी बनी नजीर
अदालत ने इस मामले में विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर जो टिप्पणी की, वह नजीर बन गई है। पीठ ने कहा कि किसी भी प्रभावित को विस्थापित करना समाधान नहीं है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा मेरे मन में यह बात बिल्कुल स्पष्ट है। आदेश में यह दर्ज किया जाएगा कि सड़क से हटाए गए प्रत्येक दुकानदार को संबंधित अधिकारियों के सरकारी निवास में तब तक ठहराया जाएगा जब तक उनका पुनर्वास नहीं होता। इसकी शुरुआत डीएम के बंगले से होगी और यदि कमिश्नर सबसे बड़े अधिकारी हैं तो उनके निवास से भी। हर बड़े अधिकारी के यहां एक-एक पीड़ित परिवार को रखा जाएगा।
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