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Agra: फ्लैट का नहीं किया बैनामा, अब बिल्डर को 45 दिन में करनी होगी रजिस्ट्री; 2.10 लाख रुपये भी देने के आदेश
Fri, 13 Feb 2026 10:49 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Fri, 13 Feb 2026 10:49 PM IST
सार
बिल्डर ने 27 मार्च 2012 को फ्लैट आवंटित कर दिया। 20 मई 2016 को फ्लैट पर कब्जा मिल गया। कई बार कहने के बाद भी बैनामा नहीं किया गया। विधिक नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
बिल्डर ने 34 लाख रुपये लेने के बाद वर्ष 2016 में फ्लैट पर कब्जा दे दिया। मगर, पीड़िता के पक्ष में बैनामा नहीं किया। शिकायत पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने आदेश पारित किया कि बिल्डर को 45 दिन के भीतर फ्लैट का बैनामा करना होगा। साथ ही मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 2.10 लाख रुपये भी अदा करने होंगे।
थाना न्यू आगरा क्षेत्र के कुंवर कॉलोनी निवासी डॉ. शुचिता सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आयोग में एनआईएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शैलेंद्र सिंह (निवासी लक्ष्मण नगर, शाहगंज) और पथौली निवासी निदेशक शीलेंद्र खिरवार व अन्य के खिलाफ वाद दायर किया था।
आरोप लगाया था कि वर्ष 2012 में विपक्षी की ओर से निर्मित द फ्लोरेंस प्लेटिनम बहुमंजिला बिल्डिंग में तत्कालीन कार्यकारी निदेशक प्रभात मिश्रा के आग्रह पर जी-704 सप्तम तल पर 1458 वर्ग मीटर का एक फ्लैट बुक किया था। 100 रुपये के स्टांप पर वायर एग्रीमेंट कर 34 लाख रुपये का भुगतान किया। विपक्षी ने 27 मार्च 2012 को फ्लैट आवंटित कर दिया। 20 मई 2016 को फ्लैट पर कब्जा मिल गया। कई बार कहने के बाद भी बैनामा नहीं किया गया। विधिक नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया।
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थाना न्यू आगरा क्षेत्र के कुंवर कॉलोनी निवासी डॉ. शुचिता सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आयोग में एनआईएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शैलेंद्र सिंह (निवासी लक्ष्मण नगर, शाहगंज) और पथौली निवासी निदेशक शीलेंद्र खिरवार व अन्य के खिलाफ वाद दायर किया था।
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आरोप लगाया था कि वर्ष 2012 में विपक्षी की ओर से निर्मित द फ्लोरेंस प्लेटिनम बहुमंजिला बिल्डिंग में तत्कालीन कार्यकारी निदेशक प्रभात मिश्रा के आग्रह पर जी-704 सप्तम तल पर 1458 वर्ग मीटर का एक फ्लैट बुक किया था। 100 रुपये के स्टांप पर वायर एग्रीमेंट कर 34 लाख रुपये का भुगतान किया। विपक्षी ने 27 मार्च 2012 को फ्लैट आवंटित कर दिया। 20 मई 2016 को फ्लैट पर कब्जा मिल गया। कई बार कहने के बाद भी बैनामा नहीं किया गया। विधिक नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया।
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