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प्रमाणपत्रों के सत्यापन में हुई देरी तो बीएसए जिम्मेदार
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 05 Jun 2016 02:19 AM IST
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प्रमाणपत्रों के सत्यापन में हुई देरी तो बीएसए जिम्मेदार
- फोटो : Amar Ujala
30 जून तक करवाना होगा समायोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन
जिनके प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं उन पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
प्रमाणपत्रों के सत्यापन न होने से सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 200 से अधिक शिक्षामित्रों को अभी तक वेतन नहीं मिल पा रहा है। पहले चरण में समायोजित शिक्षामित्रों का दो और दूसरे चरण वालों का एक वर्ष पूरा हो गया है। शासन ने 30 जून तक सभी के प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। देरी के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
पहले चरण में 1138 शिक्षामित्र और दूसरे चरण में 1278 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हुए। पहले चरण के करीब 47 और दूसरे चरण के 170-180 शिक्षामित्रों को वेतन नहीं मिल रहा है। इनके प्रमाणपत्रों का सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसकी शिकायतें शासन स्तर पर पहुंच रही हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह बोर्ड और विश्वविद्यालयों से तत्काल सत्यापन रिपोर्ट मंगाएं। 30 जून तक सभी के प्रमाणपत्रों के सत्यापन करा लिए जाएं।
वहीं पहले चरण में दस शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे, इन पर अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा सकी है। चालू सत्र में भी 20 से अधिक शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। शासन ने प्रमाणपत्रों की तत्काल जांच कराकर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार सक्सेना का कहना है कि प्रमाणपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट मंगाई जा रही है। संदिग्ध प्रमाणपत्र वाले शिक्षामित्रों की रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को दी गई है, जिनके प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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जिनके प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं उन पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
प्रमाणपत्रों के सत्यापन न होने से सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 200 से अधिक शिक्षामित्रों को अभी तक वेतन नहीं मिल पा रहा है। पहले चरण में समायोजित शिक्षामित्रों का दो और दूसरे चरण वालों का एक वर्ष पूरा हो गया है। शासन ने 30 जून तक सभी के प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। देरी के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
पहले चरण में 1138 शिक्षामित्र और दूसरे चरण में 1278 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हुए। पहले चरण के करीब 47 और दूसरे चरण के 170-180 शिक्षामित्रों को वेतन नहीं मिल रहा है। इनके प्रमाणपत्रों का सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसकी शिकायतें शासन स्तर पर पहुंच रही हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह बोर्ड और विश्वविद्यालयों से तत्काल सत्यापन रिपोर्ट मंगाएं। 30 जून तक सभी के प्रमाणपत्रों के सत्यापन करा लिए जाएं।
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वहीं पहले चरण में दस शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे, इन पर अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा सकी है। चालू सत्र में भी 20 से अधिक शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। शासन ने प्रमाणपत्रों की तत्काल जांच कराकर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार सक्सेना का कहना है कि प्रमाणपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट मंगाई जा रही है। संदिग्ध प्रमाणपत्र वाले शिक्षामित्रों की रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को दी गई है, जिनके प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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