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Agra: भाई ने तीन साथियों के साथ मिलकर उजाड़ा था बहन का सुहाग, अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Tue, 04 Oct 2022 02:35 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 04 Oct 2022 02:35 PM IST
सार

जिला जज ने जीजा की हत्या के मामले में साले सहित चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों पर 60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
 

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Brother-in-law killer Jija sentenced to life imprisonment by the court along with three accomplices
court new - फोटो : istock

विस्तार

जिला जज ने युवक की हत्या के मामले में उसके साले राकेश, सुरेश मीना, मूलचंद और मुन्नालाल को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। चारों को 60 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है। 
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थाना मलपुरा में दर्ज मामले के मुताबिक, वादी श्रीमती का कहना है कि उसके भाई राकेश की शादी 24 जून 2010 को हुई थी। वह ननद अनसुइया के साथ भाई की शादी में शामिल होने मायके बरारा आई थी। मां ने भाई की शादी में चढ़ाने के लिए उसकी सास राधा देवी से जेवर मांगे थे, जिन्हें वह मायके लेकर आई थी। पति योगेश उर्फ बाबूलाल मेरे भाई की बरात में शामिल होने पहुंचे मगर तब तक बरात जा चुकी थी। इसके चलते वह ससुराल में ही रुके। सुबह बरात के लौटने पर पति ने उसे (श्रीमती) को विदा करने को कहा। परिजन ने मना किया तो जेवरात वापस मांगे। विवाद होने पर आरोपी उसके पति को खींचकर घर के बाहर ले गए। उसने (श्रीमती) व ननद ने विरोध किया तो दोनों को कमरे में बंद कर दिया गया। दूसरे दिन पति की लाश बंबे की पटरी पर पड़ी मिली। पुलिस के रिपोर्ट नहीं लिखने पर अदालत के आदेश पर पति की हत्या के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपियों में मुन्नालाल बेरी चाहर कागारौल और अन्य तीनों आरोपी ग्राम बरारा, मलपुरा के रहने वाले हैं। 
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वादिनी के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय आहूजा, डीजीसी बसंत गुप्ता, नीरज पाराशर के तर्कों के आधार पर जिला जज ने आरोपियों को दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास और साठ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। आधी राशि पीड़िता को दिलाने के आदेश भी किए। 
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ससुराल में रहकर लड़ी न्याय की जंग

अधिवक्ता ने बताया कि भाई और रिश्तेदारों के खिलाफ वादिनी ने ससुराल में रहकर न्याय की जंग लड़ी। वह अपनी सास के साथ दीवानी में पैरवी करने आती थी। जवान बेटे की मौत से सास राधा देवी टूट चुकी थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फैसले के बाद सास-बहू के आंखों में न्याय मिलने की खुशी के आंसू थे। 

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