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आगरा: व्हाट्सएप पर लेते थे सेना में भर्ती कराने का ठेका, गिरफ्तार दलालों ने उगले तीन सैन्यकर्मियों के नाम

Sat, 06 Mar 2021 07:21 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 06 Mar 2021 07:21 PM IST
सार

  • व्हाट्सएप पर लेते थे सेना में भर्ती कराने का ठेका, पूछताछ में दलालों ने उगले कई राज
  • पुलिस के निशाने पर तीनों आरोपी सैन्यकर्मी, मिलिट्री इंटेलीजेंस को भेजी रिपोर्ट

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brokers exposes name of three military personnel in fraud case name of sena bharti
सेना भर्ती में फर्जीवाड़े के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के सिकंदरा स्थित आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज में चल रही सेना भर्ती के दौरान शुक्रवार को दो दलाल पकड़े गए थे। दोनों तीन सैन्यकर्मियों की मदद से भर्ती कराने का ठेका लेते थे। आरोपियों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि दलाल सैन्यकर्मियों से बात व्हाट्सएप कॉल से करते थे। कागजात भी इस पर भेजते थे। सैन्यकर्मियों के ओके लिखने पर अभ्यर्थी से रकम ली जाती थी।

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थाना सिकंदरा पुलिस ने शुक्रवार को फर्जी दस्तावेजों की मदद से सेना में भर्ती होने आए बुलंदशहर के ताड़पुर खादर निवासी अजीत कुमार को गिरफ्तार किया था। वह मेडिकल प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन के दौरान पकड़ा गया था। 
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अजीत ने पुलिस को बताया था कि दो दलालों ने छह लाख रुपये में भर्ती कराने का ठेका लिया था। उसकी निशानदेही पर दलाल डौकी के नगरिया निवासी रंजीत कुमार और मथुरा के नौहझील निवासी शशि कुरैशी को गिरफ्तार किया था। तीनों को जेल भेज दिया गया है। 

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आगरा जिले के रहने वाले हैं तीन सैन्यकर्मी

थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि दलालों से पूछताछ में पता चला कि वे डौकी के गांव नगरिया निवासी योगेंद्र कुमार, सौरव और विकास के संपर्क में थे। तीनों ही सेना में अलग-अलग जगह पर तैनात हैं। शशि अभ्यर्थियों को ढूंढकर लाता है। 

इसके बाद रंजीत सैन्यकर्मियों से बात करता था। इसके लिए व्हाट्सएप कॉल और चैटिंग का सहारा लिया जाता है। दलाल युवाओं को फंसाने के बाद व्हाट्स एप पर सैन्यकर्मियों को कागजात भेजते थे। उनके ओके करने पर ही अभ्यर्थी से एडवांस रकम ली जाती थी। 

सेना में भर्ती कराने का ठेका छह लाख रुपये तक में लिया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों की मोबाइल की जांच में यह बात सामने आई है। भर्ती प्रक्रिया से पहले अभ्यर्थी को सैन्यकर्मियों से भी मिलाने दलाल लेकर जाते थे। इसके लिए जगह तय की जाती थी। 

एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि सेना में फर्जी दस्तावेजों से भर्ती कराने वाले गैंग में शामिल फौजी कहां तैनात हैं? इसकी जानकारी के लिए मिलिट्री इंटेलीजेंस को रिपोर्ट दी है। सैन्यकर्मियों को मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई सेना के अधिकारियों को करनी है।

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