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Agra News: धीरे-धीरे थम रही थीं सांसें...खाकी ने थाम ली जिंदगी
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घायल ट्रेवल्स संचालक को कार का शीशा तोड़ निकालते दारोगा कपिल।वीडियो
आगरा। अंधेरी रात में सड़क किनारे खड़ी कार में दोनों हाथों से टपकती खून की हर बूंद के साथ क्षीण होती जीवन की उम्मीद...कर्ज में डूबे ट्रैवल एजेंसी संचालक मनोज ने ब्लेड से नसें काटकर जिंदगी खत्म करने के लिए खौफनाक कदम उठाया था। गश्त पर निकले पुलिसकर्मियों ने संदेह होने पर कार के अंदर झांककर देखा तो दंग रह गए।
खून से लथपथ और बेसुध मनोज को देखा तो बिना समय गंवाए कार का शीशा तोड़कर निकाला और अस्पताल लेकर पहुंचे। सही समय पर इलाज मिलने से युवक की जान बच गई। खाकी ने मौत को हराकर एक बिखरते परिवार को फिर से संवार दिया।
शनिवार रात करीब 10 बजे सिकंदरा की प्राक्षी टावर चौकी के प्रभारी कपिल कुमार, दरोगा रामवीर, वीरेंद्र, सिपाही नितिन और नरेंद्र गश्त कर रहे थे। सिकंदरा के सुनारी चौराहे के पास कार खड़ी देखी तो उसके करीब गए। ड्राइविंग सीट पर खून से लथपथ चालक को बेसुध देखा। कार खोलने का प्रयास किया तो अंदर से लॉक थी। दरोगा कपिल कुमार ने तुरंत ईंट उठाकर कार का शीशा तोड़ा।
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साथियों की मदद से चालक को निकाला तो सांसें चल रही थीं। रुमाल से दोनों हाथों पर पट्टी बांधी और उसी कार से तुरंत सिकंदरा स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। जेब में मिले आधार कार्ड से युवक की पहचान किरावली के सहारा गांव निवासी मनोज कुमार के रूप में हुई।
इसके बाद किरावली के मिढ़ाकुर चौकी प्रभारी को जानकारी दी। पुलिसकर्मी मनोज कुमार के घर पहुंचे और पिता करन सिंह को घटना से अवगत कराया। परिजन थोड़ी देर में ही अस्पताल पहुंच गए। तब तक मनोज खतरे से बाहर आ गए थे। उन्हें खून चढ़ाया जा रहा था। परिजन ने पुलिस का आभार जताया।
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15 मिनट और देर होने पर जा सकती थी जान
पुलिसकर्मी घायल मनोज कुमार को अस्पताल लेकर पहुंचे तब तक काफी खून बह चुका था। एक निजी अस्पताल ने हालत गंभीर देख भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिसकर्मी दूसरे अस्पताल पहुंचे और अपनी जिम्मेदारी पर भर्ती कराया। ब्लडप्रेशर काफी कम हो चुका था। करीब दो घंटे में चिकित्सक ब्लड प्रेशर सामान्य कर पाए। चिकित्सकों ने कहा कि 15 मिनट और देर हो जाती तो जान बचाना मुश्किल था।
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पुलिसकर्मियों ने बेहद सराहनीय कार्य किया है। सभी को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। गोल्डन ऑवर में इलाज मिलने से युवक की जान बच गई। कोई घायल मिले तो सभी को उसे तत्काल इलाज दिलवाने का प्रयास करना चाहिए। - दीपक कुमार, पुलिस आयुक्त
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तीन पेज का सुसाइड नोट मिला
आत्महत्या के प्रयास से पहले मनोज ने कार में तीन पेज का सुसाइड नोट छोड़ा था। उसमें अपने माता-पिता, पत्नी और तीनों बेटियों से माफी मांगी। खुद के कर्ज से परेशान होने की बात लिखी थी। बेटियों का ध्यान रखने और उनके नाम लिखकर माफी मांगी। पिता को संबोधित कर लिखा कि मैं मरने के बाद भी आपसे प्यार करूंगा। जब आप ये लेटर पढ़ोगे तब शायद मैं न रहूं। बताइए मैं किसका गुनाहगार हूं। आपका, मम्मी का या राधा का। पत्नी से माफी मांगी कि मैंने ही कहा था कि प्लॉट बेचना है पर मैं पापा के डर से ये नहीं कर सका।
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खून से लथपथ और बेसुध मनोज को देखा तो बिना समय गंवाए कार का शीशा तोड़कर निकाला और अस्पताल लेकर पहुंचे। सही समय पर इलाज मिलने से युवक की जान बच गई। खाकी ने मौत को हराकर एक बिखरते परिवार को फिर से संवार दिया।
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शनिवार रात करीब 10 बजे सिकंदरा की प्राक्षी टावर चौकी के प्रभारी कपिल कुमार, दरोगा रामवीर, वीरेंद्र, सिपाही नितिन और नरेंद्र गश्त कर रहे थे। सिकंदरा के सुनारी चौराहे के पास कार खड़ी देखी तो उसके करीब गए। ड्राइविंग सीट पर खून से लथपथ चालक को बेसुध देखा। कार खोलने का प्रयास किया तो अंदर से लॉक थी। दरोगा कपिल कुमार ने तुरंत ईंट उठाकर कार का शीशा तोड़ा।
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साथियों की मदद से चालक को निकाला तो सांसें चल रही थीं। रुमाल से दोनों हाथों पर पट्टी बांधी और उसी कार से तुरंत सिकंदरा स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। जेब में मिले आधार कार्ड से युवक की पहचान किरावली के सहारा गांव निवासी मनोज कुमार के रूप में हुई।
इसके बाद किरावली के मिढ़ाकुर चौकी प्रभारी को जानकारी दी। पुलिसकर्मी मनोज कुमार के घर पहुंचे और पिता करन सिंह को घटना से अवगत कराया। परिजन थोड़ी देर में ही अस्पताल पहुंच गए। तब तक मनोज खतरे से बाहर आ गए थे। उन्हें खून चढ़ाया जा रहा था। परिजन ने पुलिस का आभार जताया।
15 मिनट और देर होने पर जा सकती थी जान
पुलिसकर्मी घायल मनोज कुमार को अस्पताल लेकर पहुंचे तब तक काफी खून बह चुका था। एक निजी अस्पताल ने हालत गंभीर देख भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिसकर्मी दूसरे अस्पताल पहुंचे और अपनी जिम्मेदारी पर भर्ती कराया। ब्लडप्रेशर काफी कम हो चुका था। करीब दो घंटे में चिकित्सक ब्लड प्रेशर सामान्य कर पाए। चिकित्सकों ने कहा कि 15 मिनट और देर हो जाती तो जान बचाना मुश्किल था।
पुलिसकर्मियों ने बेहद सराहनीय कार्य किया है। सभी को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। गोल्डन ऑवर में इलाज मिलने से युवक की जान बच गई। कोई घायल मिले तो सभी को उसे तत्काल इलाज दिलवाने का प्रयास करना चाहिए। - दीपक कुमार, पुलिस आयुक्त
तीन पेज का सुसाइड नोट मिला
आत्महत्या के प्रयास से पहले मनोज ने कार में तीन पेज का सुसाइड नोट छोड़ा था। उसमें अपने माता-पिता, पत्नी और तीनों बेटियों से माफी मांगी। खुद के कर्ज से परेशान होने की बात लिखी थी। बेटियों का ध्यान रखने और उनके नाम लिखकर माफी मांगी। पिता को संबोधित कर लिखा कि मैं मरने के बाद भी आपसे प्यार करूंगा। जब आप ये लेटर पढ़ोगे तब शायद मैं न रहूं। बताइए मैं किसका गुनाहगार हूं। आपका, मम्मी का या राधा का। पत्नी से माफी मांगी कि मैंने ही कहा था कि प्लॉट बेचना है पर मैं पापा के डर से ये नहीं कर सका।