कोरोना काल में चौरासी कोस यात्रा मार्ग सूना, ब्रज के पर्यटन उद्योग 60 करोड़ का नुकसान
- ब्रज चौरासी कोस यात्रा आध्यात्मिक नहीं बल्कि पर्यटन, पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से भी खास है।
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देश-विदेश से हर साल लाखों श्रद्धालु ब्रज की पावन धरा की परिक्रमा के साथ-साथ पर्यावरण का सौंदर्य निहारते हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से ब्रज चौरासी कोस यात्रा मार्ग सूना है, जिस कारण ब्रज के पर्यटन उद्योग को अनुमानित 60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
ब्रज चौरासी कोस यात्रा के दौरान प्राचीन मंदिर, उनसे जुड़ी गौरव गाथाएं, संस्कृति और अमूल्य धरोहर देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही हैं। यही कारण है कि हर साल कार्तिक माह और अधिक मास में लाखों की संख्या में भक्त ब्रज दर्शन को आते रहे हैं।
भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े स्थलों के दर्शन की अभिलाषा को पूरा करने के लिए हजारों भक्त ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कर पुण्य कमाते हैं। कोरोना काल में इस यात्राओं का न होना उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के पर्यटन के साथ पर्यावरण और आर्थिक स्तर के लिए भी नुकसानदेय है। एक अनुमान के मुताबिक ब्रज चौरासी कोस यात्राओं का आयोजन न होने से पर्यटन उद्योग को 60 करोड़ का नुकसान हुआ है।
इन राज्यों से आते हैं श्रद्धालु
इन देशों से आते हैं श्रद्धालु
अमेरिका, अफ्रीका, इंग्लेंड, आस्ट्रेलिया, उज्बेकिस्तान, यूक्रेन, कनाडा, त्रिनिदाद, मॉरीशस, दुबई, कतर, नेपाल, रसिया आदि देशों से भी श्रद्धालु भक्तिभावना लिए आते हैं और ब्रज चौरासी कोस की यात्रा करते हैं।
वृंदावन इस्कॉन के पीआरओ रवि लोचनदास ने बताया कि इस्कॉन वृंदावन द्वारा हर वर्ष ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का आयोजन किया जाता है। विगत वर्ष कई देशों से लगभग 1500 विदेशी भक्त यात्रा में शामिल हुए थे। कोरोना के कारण इस वर्ष ब्रज चौरासी कोस यात्रा की संभावना कम है।
कोरोना काल में नहीं आ रहे श्रद्धालु
दीर्घविुष्ण मंदिर के महंत कांतानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज चौरासी कोस यात्रा करने के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां भक्ति का भाव लेकर आते हैं। श्रद्धालु यहां आकर सोहनी सेवा (स्वच्छता अभियान) को विशेष महत्व देते हैं। उनका मानना है कि ठाकुरजी की इस पावन धरा पर सोहनी सेवा करने से उनके लिए वैकुंठ के द्वार खुल जाएंगे। वहीं यहां प्राचीन और पौराणिक स्थलों के संरक्षण-संवर्धन के लिए श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के पौधे रोपने में योगदान दे रहे हैं।
जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने कहा कि कोरोना वायरस से सबसे बड़ा नुकसान ब्रज के पर्यटन को हुआ है। हर साल जहां ब्रज में तीन करोड़ लोग आते थे। वहां बीते छह माह में यह आंकड़ा नगण्य है। ऐसे में ब्रज यात्राओं के स्थगित होने से ब्रज के पर्यटन को करीब 60 करोड़ का नुकसान हुआ है।