एक्सक्लूसिव: ताजनगरी की सड़कों के गड्ढे लोगों की तोड़ रहे हड्डियां, चौंकाने वाली है यह रिपोर्ट

धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 11 Sep 2021 12:42 PM IST

सार

ताजनगरी में सड़कों पर गड्ढे भरने के लिए कई बार अभियान चला, लेकिन जर्जर सड़कों की हालत नहीं सुधरी। स्थिति यह है कि सड़कों के गड्ढे लोगों की हड्डियां तोड़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की स्टडी में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। पढ़ें, यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट....
सड़कों पर गड्ढे (फाइल)
सड़कों पर गड्ढे (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ताजनगरी की जर्जर सड़कों के गड्ढे लोगों को दर्द दे रहे हैं। इनमें बाइक समेत गिरने से लोगों की हड्डियां टूट रही हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के चिकित्सक बताते हैं कि दुर्घटना और गड्ढों में गिरकर फ्रैक्चर के लगभग बराबर मामले हैं। बरसात के दिनों में फ्रैक्चर के डेढ़ गुना मरीज बढ़े हैं।
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हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीपी पाल ने बताया कि ओपीडी और इमरजेंसी में फ्रैक्चर के रोजाना 20 से 25 मरीज आ रहे हैं। इनमें से आठ से 10 मरीजों की हड्डी गड्ढे में बाइक समेत गिरने से टूटी। सबसे ज्यादा फ्रैक्चर पैरों में मिला। एक से तीन जगह हड्डी टूटने के भी दो-तीन मामले मिलते हैं। ऐसे मरीजों में 26 से 38 साल के बीच है। 


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मरीजों से यह पता चला कि वे कामकाजी और छात्र हैं जो दुपहिया वाहन उपयोग करते हैं। लॉकडाउन को छोड़ दिया जाए तो लगभग हर महीने में यही स्थिति है। बरसात के दिनों में संख्या डेढ़ गुना बढ़ जाती है। अन्य कारणों से दुर्घटना में फ्रैक्चर वाले मरीजों की बात करें तो इनकी संख्या भी आठ से 10 ही रहती है। इनमें हाथ-पैर, कंधे में फ्रैक्चर अधिक मिलता है। 

गड्ढायुक्त सड़कों से हो रहा रीढ़-कमर और कंधे में दर्द
एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के डॉ. बृजेश शर्मा ने बताया कि कमर, कंधे, पीठ और रीढ़ की हड्डी में दर्द की एक वजह गड्ढायुक्त सड़कों पर दुपहिया वाहन चलाना है। औसतन रोजाना 30-50 किमी दुपहिया वाहन चलाने वालों ने ये परेशानी बताई। झटकों से लोगों के कंधों, रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव से दर्द उभरने लगता है। 

दुर्घटनाग्रस्त-गड्ढों में गिरने के बराबर मामले
आगरा ऑर्थोपैडिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. संजय प्रकाश ने बताया कि 120 हड्डी रोग विशेष हैं और औसतन हर चिकित्सक के पास सप्ताह में तीन से पांच मरीज गड्ढे में गिरने से पैरों में फ्रेक्चर के आते हैं। इतनी ही संख्या अन्य दुर्घटनाओं में फ्रेक्चर वाले रहते हैं। दोनों ही मामलों में अधिकांश मरीज युवा हैं, यह चिंताजनक है। 
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