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लॉकडाउन में ब्लड बैंकों में रक्त की कमी, दस दिन से नहीं आए रक्तदाता, दान करने की अपील
Wed, 01 Apr 2020 01:57 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 01 Apr 2020 01:57 PM IST
सार
थैलेसीमिया के 200 मरीज हैं पंजीकृत
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
लॉकडाउन के चलते रक्तदान शिविर नहीं लग पा रहे हैं, इससे ब्लड बैंकों में रक्त की कमी हो गई है। थैलेसीमिया, एनमिक गर्भवती महिला और लावारिस के इलाज में दिक्कत आ रही है। ऐसे में ब्लड बैंक संचालकों ने लोगों से रक्तदान करने की अपील की है।
एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सेना अस्पताल समेत जिले में 18 ब्लड बैंक हैं। इन पर हर महीने 10-12 हजार ब्लड यूनिट की जरूरत रहती है। मरीजों को रक्त लेेने के लिए उसके परिजन को एक यूनिट रक्तदान करना होता है। लेकिन थैलेसीमिया, लावारिस मरीजों, हीमोफीलिया, एड्स रोगी, बीपीएल कार्डधारक मरीज, दिव्यांग मरीजों के लिए बिना एक्सचेंज के रक्त उपलब्ध कराया जाता है।
बीते लगभग दस दिन से कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन है, इससे रक्तदान शिविर नहीं लग रहे हैं, यहां तक कि सिंगल डोनर भी कम आ रहे हैं। इससे इन मरीजों के इलाज में दिक्कत आ रही है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सेना अस्पताल समेत जिले में 18 ब्लड बैंक हैं। इन पर हर महीने 10-12 हजार ब्लड यूनिट की जरूरत रहती है। मरीजों को रक्त लेेने के लिए उसके परिजन को एक यूनिट रक्तदान करना होता है। लेकिन थैलेसीमिया, लावारिस मरीजों, हीमोफीलिया, एड्स रोगी, बीपीएल कार्डधारक मरीज, दिव्यांग मरीजों के लिए बिना एक्सचेंज के रक्त उपलब्ध कराया जाता है।
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बीते लगभग दस दिन से कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन है, इससे रक्तदान शिविर नहीं लग रहे हैं, यहां तक कि सिंगल डोनर भी कम आ रहे हैं। इससे इन मरीजों के इलाज में दिक्कत आ रही है।
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थैलेसीमिया के 200 मरीज हैं पंजीकृत
एसएन मेडिकल कॉलेज, समर्पण ब्लड बैंक और लोकहितम ब्लडबैंक में थैलेसीमिया के लगभग 200 मरीज पंजीकृत हैं। महीने में प्रत्येक मरीज को एक से दो यूनिट रक्त की जरूरत होती है। स्टॉक में रखे रक्त से इनका इलाज हो रहा था। अब स्टॉक में भी कमी होने से इनके इलाज में परेशानी खड़ी हो गई है।
भीड़ न जुटने देना ही कारगर
कोरोना वायरस से बचाव के लिए भीड़ न जुटना ही कारगर है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से शिविर लगाने के बजाए ब्लड बैंक में इनडोर शिविर लगाए और एक मीटर की दूरी का पालन करे, जिससे यह समस्या हल हो जाएगी। - जुनाब अली, ड्रग इंस्पेक्टर
एक-एक कर रक्तदान करें
एसएन मेडिकल कॉलेज भर्ती होने वाले सड़क हादसे, कैंसर, कैदी समेत ऐेसे कई मरीज रहते हैं, जिनको डोनर बिना ही रक्त दिया जाता है, लोगों से अपील है कि एक-एक करके जागरूक लोग रक्तदान करने आ सकते हैं। - डॉ. नीतू चौहान, प्रभारी ब्लड बैंक एसएन कॉलेज
रोज एक-दो रक्तदान से भी मदद मिलेगी
थैलेसीमिया के मरीजों को रक्त की कुछ अंतराल में जरूरत रहती है, रक्त की कमी के कारण बीते दिनों पदाधिकारियों ने ही रक्तदान किया। सामाजिक संगठन एक-दो रक्तदाताओं को रोज ब्लड बैंक भेजे इससे भी राहत मिलेगी। - बृजमोहन अग्रवाल, अध्यक्ष समर्पण ब्लड बैंक समिति
सामाजिक संगठन दिन तय करें
सामाजिक संगठन अपने सदस्यों के लिए दिन तय कर दें और ब्लड बैंक में आकर पांच-दस लोग अलग-अलग वक्त में आकर रक्तदान कर जाएं, जिससे भीड़ भी नहीं जुटेगी और रक्त की कमी भी नहीं रहेगी। - अखिलेश अग्रवाल, निदेशक लोकहितम ब्लड बैंक
एसएन मेडिकल कॉलेज, समर्पण ब्लड बैंक और लोकहितम ब्लडबैंक में थैलेसीमिया के लगभग 200 मरीज पंजीकृत हैं। महीने में प्रत्येक मरीज को एक से दो यूनिट रक्त की जरूरत होती है। स्टॉक में रखे रक्त से इनका इलाज हो रहा था। अब स्टॉक में भी कमी होने से इनके इलाज में परेशानी खड़ी हो गई है।
भीड़ न जुटने देना ही कारगर
कोरोना वायरस से बचाव के लिए भीड़ न जुटना ही कारगर है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से शिविर लगाने के बजाए ब्लड बैंक में इनडोर शिविर लगाए और एक मीटर की दूरी का पालन करे, जिससे यह समस्या हल हो जाएगी। - जुनाब अली, ड्रग इंस्पेक्टर
एक-एक कर रक्तदान करें
एसएन मेडिकल कॉलेज भर्ती होने वाले सड़क हादसे, कैंसर, कैदी समेत ऐेसे कई मरीज रहते हैं, जिनको डोनर बिना ही रक्त दिया जाता है, लोगों से अपील है कि एक-एक करके जागरूक लोग रक्तदान करने आ सकते हैं। - डॉ. नीतू चौहान, प्रभारी ब्लड बैंक एसएन कॉलेज
रोज एक-दो रक्तदान से भी मदद मिलेगी
थैलेसीमिया के मरीजों को रक्त की कुछ अंतराल में जरूरत रहती है, रक्त की कमी के कारण बीते दिनों पदाधिकारियों ने ही रक्तदान किया। सामाजिक संगठन एक-दो रक्तदाताओं को रोज ब्लड बैंक भेजे इससे भी राहत मिलेगी। - बृजमोहन अग्रवाल, अध्यक्ष समर्पण ब्लड बैंक समिति
सामाजिक संगठन दिन तय करें
सामाजिक संगठन अपने सदस्यों के लिए दिन तय कर दें और ब्लड बैंक में आकर पांच-दस लोग अलग-अलग वक्त में आकर रक्तदान कर जाएं, जिससे भीड़ भी नहीं जुटेगी और रक्त की कमी भी नहीं रहेगी। - अखिलेश अग्रवाल, निदेशक लोकहितम ब्लड बैंक