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यूपी एमएलसी चुनाव नतीजे: भाजपा को ये चूक पड़ गई भारी, आगरा शिक्षक सीट पर मिली हार; विधानसभा चुनाव के लिए सबक
Fri, 30 Oct 2026 12:40 PM IST
Arun Parashar
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:40 PM IST
सार
पिछले स्नातक चुनाव में विरोधी रहे हरि किशोर तिवारी को हाईकमान के आदेश पर शिक्षक सीट पर प्रत्याशी तो बनाया गया, लेकिन उनका पार्टी के भीतर ही तालमेल नहीं बन पाया। वहीं, चुनाव के दौरान न तो वह मतदाताओं तक पहुंच सके, न ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने ज्यादा जनसंपर्क में जोर दिया।
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भाजपा का झंडा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
विस्तार
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुए विधान परिषद चुनाव के परिणामों ने भाजपा को झटका और सीख एक साथ दी है। स्नातक सीट पर जीत और शिक्षक सीट पर मिली हार ने साफ किया कि अगर आधी-अधूरी तैयारी के साथ कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की उपेक्षा कर मनमाने प्रत्याशी उतारे, तो एमएलसी चुनाव सरीखे नतीजे देखने को मिल सकते हैं। पार्टी में अंदरखाने इस पर चर्चा शुरू हो गई है। दोनों ही चुनावों में जीत और हार के वास्तविक कारण खोजे जा रहे हैं, जिससे कमियों को दूरकर विधानसभा चुनाव में बेहतर परिणाम लाए जा सकें।
दरअसल, स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव विधानसभा चुनाव से इतर होते हैं। एमएलसी चुनाव में अमूमन जो प्रत्याशी ज्यादा वोट बनवाता है, उतना ही उसके जीतने की संभावना प्रबल होती है। प्रत्याशी कौन है, यह दूसरी बड़ी वजह होता है। वहीं, विधानसभा चुनाव में पार्टी कार्यकर्ता की सक्रियता, संगठन की बात मतदाताओं तक पहुंचना, प्रत्याशी कौन जैसे कई कारक काम करते हैं। भाजपा अपने ज्यादातर चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम-काम के बूते जीतने के गुमान में रहती रही है।
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दरअसल, स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव विधानसभा चुनाव से इतर होते हैं। एमएलसी चुनाव में अमूमन जो प्रत्याशी ज्यादा वोट बनवाता है, उतना ही उसके जीतने की संभावना प्रबल होती है। प्रत्याशी कौन है, यह दूसरी बड़ी वजह होता है। वहीं, विधानसभा चुनाव में पार्टी कार्यकर्ता की सक्रियता, संगठन की बात मतदाताओं तक पहुंचना, प्रत्याशी कौन जैसे कई कारक काम करते हैं। भाजपा अपने ज्यादातर चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम-काम के बूते जीतने के गुमान में रहती रही है।
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इसी रवैये की वजह से एमएलसी चुनाव की दो सीटों पर दो तरह के परिणाम आए। एक ओर पार्टी ने खाटी कार्यकर्ता और लंबे समय से तैयारी कर रहे डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह को चेहरा बनाया। पार्टी के भीतर कुछ नाराजगी के बावजूद जब चुनाव प्रचार परवान चढ़ा तो कार्यकर्ताओं ने जमकर वोट बनवाए और नतीजा गुरुजी के पक्ष में रहा। वहीं, पिछले स्नातक चुनाव में विरोधी रहे हरि किशोर तिवारी को हाईकमान के आदेश पर शिक्षक सीट पर प्रत्याशी तो बनाया गया, लेकिन उनका पार्टी के भीतर ही तालमेल नहीं बन पाया। वहीं, चुनाव के दौरान न तो वह मतदाताओं तक पहुंच सके, न ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने ज्यादा जनसंपर्क में जोर दिया।
मतदान से पांच दिन पहले लखनऊ से आए फरमान के बाद हर जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी सक्रिय तो हुए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पार्टी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। अब मानवेंद्र की जीत और हरि किशोर की हार के बाद इस बात पर चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि भाजपा को सर्वे या फील्ड रिपोर्ट और सुझाव दरकिनार कर मनमाने प्रत्याशी उतारने से बचना होगा वर्ना नतीजे सिफर ही रहेंगे।
मतदान से पांच दिन पहले लखनऊ से आए फरमान के बाद हर जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी सक्रिय तो हुए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पार्टी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। अब मानवेंद्र की जीत और हरि किशोर की हार के बाद इस बात पर चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि भाजपा को सर्वे या फील्ड रिपोर्ट और सुझाव दरकिनार कर मनमाने प्रत्याशी उतारने से बचना होगा वर्ना नतीजे सिफर ही रहेंगे।
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दो सर्वे दे चुके बड़े बदलाव के संकेत
पार्टी की ओर से अभी तक दो सर्वे कराए जा चुके हैं। इन सर्वे में अकेले आगरा की ही नौ में से आधी सीटों पर चेहरे न बदलने पर हार का फीडबैक मिल चुका है। अंतिम फैसला लेने से पहले पार्टी के पास कम से कम दो और सर्वे की रिपोर्ट आने का समय है।
2 नवंबर को बरेली में होगा मंथन
2 नवंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बरेली में हर बूथ अध्यक्ष से रूबरू होंगे। जाहिर है, एमएलसी चुनाव के परिणाम उस बैठक में चर्चा और मंथन का एक आधार बनेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस मंथन के बाद जो अमृत निकलेगा, पार्टी उसी का पान कर आगे की रणनीति पर काम शुरू करेगी।
पार्टी की ओर से अभी तक दो सर्वे कराए जा चुके हैं। इन सर्वे में अकेले आगरा की ही नौ में से आधी सीटों पर चेहरे न बदलने पर हार का फीडबैक मिल चुका है। अंतिम फैसला लेने से पहले पार्टी के पास कम से कम दो और सर्वे की रिपोर्ट आने का समय है।
2 नवंबर को बरेली में होगा मंथन
2 नवंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बरेली में हर बूथ अध्यक्ष से रूबरू होंगे। जाहिर है, एमएलसी चुनाव के परिणाम उस बैठक में चर्चा और मंथन का एक आधार बनेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस मंथन के बाद जो अमृत निकलेगा, पार्टी उसी का पान कर आगे की रणनीति पर काम शुरू करेगी।