फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   bharat vikas parishad in kusth aasharam

‘संस्कार’ की यह कैसी ‘संस्कृति’

Wed, 14 Sep 2016 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 14 Sep 2016 12:06 AM IST
विज्ञापन
bharat vikas parishad in kusth aasharam
भारत विकास परिषद की संस्कार और सुरभि शाखा ने उड़ाया कुष्ठ रोगियों की सेवा का मखौल - फोटो : अमर उजाला
भारत विकास परिषद के प्रमुख प्रकल्प में से एक है ‘संस्कृति माह’ लेकिन इस संस्कृति माह के दौरान ही परिषद की संस्कार और सुरभि शाखा ने मंगलवार को कुष्ठ रोगियों की सेवा का ऐसा मखौल उड़ाया कि कुष्ठ आश्रम के लोग भी हैरत में पड़ गए। ‘संस्कार’ शाखा के सदस्यों ने कुष्ठ रोगियों की कथित ‘सेवा’ के नाम पर इस तरह से भोजन कराया कि यह भारतीय परंपरा के मुताबिक नहीं रहा। जमीन पर आसन और बिछौने के बिना ही खाना परोसा गया और भोजन की पवित्र थाली के साथ बैठे कुष्ठ रोगियों को सदस्यों ने अपने पैरों में बैठाकर फोटो खिंचवाए।
विज्ञापन

ताजगंज के गांधी कुष्ठ आश्रम में संस्कार और सुरभि शाखा ने संयुक्त रूप से आश्रम के लोगों को शाम का भोजन प्रदान किया। आश्रम के लोगों को संस्क ार और सुरभि शाखा के सदस्यों ने कुछ इस तरह से भोजन कराया कि न तो किसी को भोजन कराते समय संस्कृति का ख्याल रहा और न ही बुजुर्गों के सम्मान का। भारतीय संस्कृति में जमीन पर बैठाकर भोजन कराने और भोजन परोसने तक की परंपरा और संस्कार हैं, जिसमें आसन बिछाने, चौकी पर थाली रखने जैसे कदम शामिल हैं। अशोभनीय तरीके से संस्कृति के उलट बुजुर्गों को पैरों में बैठाकर कैमरे के फ्लैश चलवाए गए। 
विज्ञापन

इस मामले में भारत विकास परिषद संस्कार शाखा कोषाध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि कुष्ठ आश्रम के लोग किसी के सामने खाना नहीं खाते। भोजन देने के कार्यक्रम में इस तरह से फोटो खिंचवाया गया, लेकिन इसके बाद वह लोग अपने अपने कमरों में खाना लेकर चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
समाज सेवा का नाम, फोटो खिंचाना काम
समाजसेवा के क्षेत्र में आगरा ने देश भर में कई मिसाल कायम की हैं जिसे दूसरे शहर अब अपना रहे हैं, लेकिन इस बीच कई सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों ने समाजसेवा के नाम पर अपनी मार्केटिंग शुरू की है। मीडिया के कैमरों की फ्लैश चमकने पर ही कोई स्कूली बच्चों को पेन-पेसिंल, लंच बॉक्स बांटने का काम कर रहा है तो कोई बुजुर्गों को आइसक्रीम खिलाने को सेवा का नाम दे रहा है। स्कूल के चार-पांच बच्चों को बैग और कापी देने को समाजसेवा बताकर खुद की पीठ ठोंकी जा रही है तो कोई फल, मिठाई देकर खुद को चर्चित रखने में व्यस्त है।


गरीबों को दान भी फाइव स्टार होटल में
समाजसेवा का मखौल उड़ाते हुए कई संगठन विकलांगों को ट्राईसाइकिल देने का कार्यक्रम भी महंगे होटलों में कर रहे हैं। गरीबों को दान में बेशक चंद हजार रुपये खर्च किए गए, लेकिन उस समारोह और पार्टी का खर्च लाखों रुपये में करने को समाजसेवा का नाम दिया जा रहा है। अनेक संगठन एक व्हील चेयर से ज्यादा खर्च आयोजन पर कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed