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भजन गायक विनोद अग्रवाल को पसंद थी चूल्हे पर सिकी मिस्सी रोटी, अक्सर आते थे आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 06 Nov 2018 07:35 PM IST
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भजन गायक विनोद अग्रवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
भजन गायक विनोद अग्रवाल बेहद सामान्य जीवन जीते थे। हास्य उनके जीवन का हिस्सा था। खाने में आमतौर पर परहेज नहीं करते थे। जलेबी देखकर मुंह में पानी आ जाता था तो गोलगप्पे भी शौक से खाते थे। आगरा के गोलगप्पे उन्हें बेहद पसंद थे।
मुरलीधर मनुहार संस्था के अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी के मुताबिक जब विनोद अग्रवाल का कहीं आवागमन होता था और उन्हें आगरा होकर निकलना होता था तो वे कुछ देर आगरा में रुक कर ही जाते थे। पुष्पेंद्र त्रिवेदी के निवास पर रुकते थे।
वहां वे चूल्हे पर सिकी मिस्सी रोटी खाना पसंद करते थे। मिठाई में उन्हें जलेबी बेहद पसंद थी। कहीं भी जलेबी दिखी नहीं गाड़ी रुकवा देते थे। आगरा की चाट और गोलगप्पे खाने के भी शौकीन थे।
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मुरलीधर मनुहार संस्था के अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी के मुताबिक जब विनोद अग्रवाल का कहीं आवागमन होता था और उन्हें आगरा होकर निकलना होता था तो वे कुछ देर आगरा में रुक कर ही जाते थे। पुष्पेंद्र त्रिवेदी के निवास पर रुकते थे।
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वहां वे चूल्हे पर सिकी मिस्सी रोटी खाना पसंद करते थे। मिठाई में उन्हें जलेबी बेहद पसंद थी। कहीं भी जलेबी दिखी नहीं गाड़ी रुकवा देते थे। आगरा की चाट और गोलगप्पे खाने के भी शौकीन थे।
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निराला था उनके जीने का अंदाज
विधायक योगेंद्र उपाध्याय, रिंकेश अग्रवाल, रीतेश शुक्ला आदि बताते हैं कि उनका जीवन जीने का अंदाज निराला था। उनका मानना था कि प्रभु निवास हास्य में है। लोगों को चेहरे पर हंसी ईश्वर का ही अमूल्य वरदान है।
व्यक्ति को हर परिस्थिति में धैर्य रखना चाहिए और मुस्कराते रहना चाहिए। इसलिए अक्सर वे अपने नाम के अनुरूप विनोदी स्वभाव के थे। जब कृष्ण की भक्ति में डूबते तो आंखों अश्रुओं की धारा फूट उठती और उसके बाद चेहरे पर वही मुस्कान का स्वभाव था।
मई, 2019 का आमंत्रण किया था स्वीकार
पुष्पेंद्र त्रिवेदी बताते हैं कि इस बार नव संवत्सर पर तो उन्हें आना ही था लेकिन पुष्पेंद्र त्रिवेदी के निजी कार्यक्रम में भी आने का निमंत्रण स्वीकार किया था। पहले निजी कार्यक्रम में आने से इनकार कर रहे थे लेकिन जब पुष्पेंद्र त्रिवेदी की मां ने अधिकार के साथ उनके कान खींचे तो विनोद अग्रवाल ने कहा कि अब तो हाईकमान यहां आ गया मैं जरूर आऊंगा लेकिन विनोद अग्रवाल अपना वादा पूरा किए बिना ही इस दुनिया से विदा ले गए।
व्यक्ति को हर परिस्थिति में धैर्य रखना चाहिए और मुस्कराते रहना चाहिए। इसलिए अक्सर वे अपने नाम के अनुरूप विनोदी स्वभाव के थे। जब कृष्ण की भक्ति में डूबते तो आंखों अश्रुओं की धारा फूट उठती और उसके बाद चेहरे पर वही मुस्कान का स्वभाव था।
मई, 2019 का आमंत्रण किया था स्वीकार
पुष्पेंद्र त्रिवेदी बताते हैं कि इस बार नव संवत्सर पर तो उन्हें आना ही था लेकिन पुष्पेंद्र त्रिवेदी के निजी कार्यक्रम में भी आने का निमंत्रण स्वीकार किया था। पहले निजी कार्यक्रम में आने से इनकार कर रहे थे लेकिन जब पुष्पेंद्र त्रिवेदी की मां ने अधिकार के साथ उनके कान खींचे तो विनोद अग्रवाल ने कहा कि अब तो हाईकमान यहां आ गया मैं जरूर आऊंगा लेकिन विनोद अग्रवाल अपना वादा पूरा किए बिना ही इस दुनिया से विदा ले गए।