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Agra News: भागवत कथाओं में दिया निष्काम भक्ति और सदाचार का संदेश, बटेश्वर में रचाया रुक्मिणी विवाह, सीकरी और बाह में गूंजी भागवत की महिमा, भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु

Wed, 03 Jun 2026 11:39 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:39 PM IST
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Bhagwat Kathas convey the message of selfless devotion and morality, Rukmini's marriage was celebrated in Bateshwar, the glory of Bhagwat resonated in Sikri and Bah, devotees immersed in devotion.
नगला बले डाबर में श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
आगरा। ताजनगरी के ग्रामीण अंचल में इन दिनों श्रीमद्भागवत कथा के आयोजनों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। बटेश्वर, फतेहपुर सीकरी और बाह में आयोजित कथाओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। कहीं भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह उत्सव की धूम रही, तो कहीं प्रह्लाद की अटूट भक्ति और निष्काम कर्म के सिद्धांतों से मानव जीवन के कर्तव्यों का बोध कराया गया। भजनों की धुन और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से पंडाल गूंज उठे और भक्त भावविभोर होकर झूमने पर मजबूर हो गए।
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बटेश्वर में धूमधाम से मनाया रुक्मिणी विवाह उत्सव
प्रसिद्ध तीर्थ धाम बटेश्वर के खांद स्थित बीएस पब्लिक स्कूल में चल रही भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचिका शास्त्री नीतू यादव ने कृष्ण लीलाओं, कंस वध और कुब्जा उद्धार का वर्णन किया। इसके बाद रुक्मिणी विवाह के पावन प्रसंग ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान परीक्षित शौकीराम, श्री देवी, योगेश कुमार, रीता देवी सहित सैकड़ों भक्त मौजूद रहे। आयोजक मुन्नेश यादव ने क्षेत्रवासियों से धर्म लाभ उठाने की अपील की।
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सीकरी में प्रह्लाद भक्ति और भरत चरित्र का वर्णन
ग्राम नगला बले डाबर में आयोजित कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पूज्य श्री त्रिवेणी दास जी महाराज ने प्रह्लाद भक्ति और भरत चरित्र के माध्यम से मोह-माया से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने अजामिल उपाख्यान और दक्ष यज्ञ प्रसंग सुनाते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता और श्रद्धा होनी चाहिए।
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बाह में गूंजे हरि बोल के जयघोष
जय नरायन मंदिर बाह में तीसरे दिन प्रवचन करते हुए आचार्य माधव मयंक तिवारी ने कहा कि शरीर नश्वर है और भागवत ही मनुष्य को उसके वास्तविक कर्तव्यों का बोध कराती है। उन्होंने लोभ, मोह और अहंकार का त्याग कर निष्काम भाव से प्रभु की शरण में जाने की बात कही। कथा के दौरान पूरा पंडाल ''हरि बोल'' के जयकारों से गुंजायमान रहा।
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