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UP: सेंसर बताएंगे कहां फंसा है नाले में कूड़ा, कंट्रोल रूम देगा अलर्ट; इस नगर निगम में लागू होगा बंगलूरू माॅडल
Sun, 12 Apr 2026 03:14 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 12 Apr 2026 03:14 PM IST
सार
दक्षिण भारत के शहरों में ड्रेनेज और सीवर लाइनों में सेंसर तकनीक का उपयोग हो रहा है। यह सिस्टम जलस्तर बढ़ने, कचरा फंसने या ओवरफ्लो की स्थिति में तत्काल कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है। इससे समस्या विकराल होने से पहले ही उसका समाधान कर लिया जाता है।
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नगर निगम आगरा
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विस्तार
आगरा को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए अब नगर निगम बंगलूरू मॉडल अपनाएगा। नाले में कहां कूड़ा फंसा है और कहां रुकावट है, यह सेंसर बताएगा। बंगलूरू, मैसूर और ऊटी के स्टडी टूर से लौटे पार्षदों ने शहर की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था के लिए बंगलूरू मॉडल लागू करने की रिपोर्ट सौंपी है।
बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत के शहरों में ड्रेनेज और सीवर लाइनों में सेंसर तकनीक का उपयोग हो रहा है। यह सिस्टम जलस्तर बढ़ने, कचरा फंसने या ओवरफ्लो की स्थिति में तत्काल कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है। इससे समस्या विकराल होने से पहले ही उसका समाधान कर लिया जाता है। पार्षदों का मानना है कि यदि आगरा में प्रमुख ड्रेन और सीवर नेटवर्क पर सेंसर लगाए जाएं, तो बारिश के दिनों में होने वाले जलभराव से मुक्ति मिल सकती है।
भाजपा पार्षद प्रकाश केशवानी ने बताया कि बंगलूरू और मैसूर में छोटे-बड़े सभी नाले पूरी तरह से कवर हैं। नालों के ढके होने से लोग उनमें कूड़ा नहीं फेंक पाते। जल प्रवाह सुचारू रहता है और संक्रामक बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके विपरीत, आगरा में खुले नालों में प्लास्टिक और सॉलिड वेस्ट गिरने से अक्सर ड्रेनेज चोक हो जाता है।
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एसटीपी में आगरा आगे, ड्रेनेज में पीछे
रिपोर्ट में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि तकनीकी रूप से आगरा कई मामलों में दक्षिण के शहरों से बेहतर है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) की तकनीक में आगरा, बंगलूरू और मैसूर से भी आगे है। कमी केवल ड्रेनेज के प्रबंधन और आधुनिक निगरानी तंत्र की है। महापौर हेमलता दिवाकर का कहना है पार्षदों की रिपोर्ट पर सदन में मंथन होगा।
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बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत के शहरों में ड्रेनेज और सीवर लाइनों में सेंसर तकनीक का उपयोग हो रहा है। यह सिस्टम जलस्तर बढ़ने, कचरा फंसने या ओवरफ्लो की स्थिति में तत्काल कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है। इससे समस्या विकराल होने से पहले ही उसका समाधान कर लिया जाता है। पार्षदों का मानना है कि यदि आगरा में प्रमुख ड्रेन और सीवर नेटवर्क पर सेंसर लगाए जाएं, तो बारिश के दिनों में होने वाले जलभराव से मुक्ति मिल सकती है।
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भाजपा पार्षद प्रकाश केशवानी ने बताया कि बंगलूरू और मैसूर में छोटे-बड़े सभी नाले पूरी तरह से कवर हैं। नालों के ढके होने से लोग उनमें कूड़ा नहीं फेंक पाते। जल प्रवाह सुचारू रहता है और संक्रामक बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके विपरीत, आगरा में खुले नालों में प्लास्टिक और सॉलिड वेस्ट गिरने से अक्सर ड्रेनेज चोक हो जाता है।
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एसटीपी में आगरा आगे, ड्रेनेज में पीछे
रिपोर्ट में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि तकनीकी रूप से आगरा कई मामलों में दक्षिण के शहरों से बेहतर है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) की तकनीक में आगरा, बंगलूरू और मैसूर से भी आगे है। कमी केवल ड्रेनेज के प्रबंधन और आधुनिक निगरानी तंत्र की है। महापौर हेमलता दिवाकर का कहना है पार्षदों की रिपोर्ट पर सदन में मंथन होगा।