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मथुरा: फूल बंगले की छांव में विराजे जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी
Tue, 12 Apr 2022 08:25 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 12 Apr 2022 08:25 PM IST
सार
बांकेबिहारी मंदिर में कामदा (फूलडोल) एकादशी से जन-जन के आराध्य ठाकुर जी ने आज फूल बंगले की छांव में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए।
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फूल बंगले की छांव में विराजे ठाकुर बांकेबिहारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गर्मी बढ़ी तो आराध्य को भी गर्मी से बचाव के जतन होने लगे हैं। कामदा (फूलडोल) एकादशी से ठाकुर श्रीबांके बिहारी ने भव्य फूल बंगले की छांव में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। मंगलवार से शुरू हुआ यह क्रम आगामी 108 दिनों तक चलेगा। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज सुबह और शाम फूलों के बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
सुबह आराध्य फूलों से सजे बंगले में विराजमान हुए तो संपूर्ण मंदिर उनके जयकारों से गुंजायमान हो उठा। ठाकुरजी के बंगले को गुलाब, गेंदा, मोगरा, चमेली, रायबेली, रजनीगंधा, कुंद, लिली, मिलाइट, टाटा रोज के अलावा विदेशी फूल आर्केट, एंथोरियम, एस्ट्रजल सहित सुगंधित फूलों से सजाया गया। मंदिर प्रांगण में सुगंधित इत्र का भी छिड़काव किया गया।
मंदिर में आ रही फूलों की सुगंध भक्तों को अपने आराध्य के श्रीचरणों में ले जा रही थी। ठाकुर श्रीबांके बिहारी के अनुपम दर्शन के लिए श्रद्धालु अपलक निहारते रहे। दर्शन का यह क्रम देर रात तक जारी रहा। कामदा (फूलडोल) एकादशी से ठाकुर श्रीबांके बिहारी मंदिर सहित वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में फूलबंगला सजाने का क्रम प्रारंभ हो गया है।
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ठाकुर श्रीबांके बिहारीजी के बनने वाले फूलबंगलों में रायबेल, गुलाब, चंपा, रजनीगंधा और गेंदा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अधिक सुंदर बंगला बनाने के लिए विदेशी फूल भी प्रयोग किए जाते हैं। देशी फूलों की आपूर्ति ब्रज क्षेत्र से ही की जाती है, जबकि विदेशी फूल कोलकाता, बेंगलुरु और मुंबई से मंगाए जाते हैं।
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सुबह आराध्य फूलों से सजे बंगले में विराजमान हुए तो संपूर्ण मंदिर उनके जयकारों से गुंजायमान हो उठा। ठाकुरजी के बंगले को गुलाब, गेंदा, मोगरा, चमेली, रायबेली, रजनीगंधा, कुंद, लिली, मिलाइट, टाटा रोज के अलावा विदेशी फूल आर्केट, एंथोरियम, एस्ट्रजल सहित सुगंधित फूलों से सजाया गया। मंदिर प्रांगण में सुगंधित इत्र का भी छिड़काव किया गया।
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मंदिर में आ रही फूलों की सुगंध भक्तों को अपने आराध्य के श्रीचरणों में ले जा रही थी। ठाकुर श्रीबांके बिहारी के अनुपम दर्शन के लिए श्रद्धालु अपलक निहारते रहे। दर्शन का यह क्रम देर रात तक जारी रहा। कामदा (फूलडोल) एकादशी से ठाकुर श्रीबांके बिहारी मंदिर सहित वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में फूलबंगला सजाने का क्रम प्रारंभ हो गया है।
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ठाकुर श्रीबांके बिहारीजी के बनने वाले फूलबंगलों में रायबेल, गुलाब, चंपा, रजनीगंधा और गेंदा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अधिक सुंदर बंगला बनाने के लिए विदेशी फूल भी प्रयोग किए जाते हैं। देशी फूलों की आपूर्ति ब्रज क्षेत्र से ही की जाती है, जबकि विदेशी फूल कोलकाता, बेंगलुरु और मुंबई से मंगाए जाते हैं।